कौन मनुष्य किसके काम आता है
मनुष्य एक दूसरे के सहारे चलता है
जरूरत के वक्त इंसान कहां रहता है
हर मनुष्य अपने अपने जीवन का स्वार्थी होता है
दूसरों से आसरा रखना और किसी से उम्मीद रखना
साइन के जीवन का अपने आप का धोखाहै
इंसान जो होता है वह तो पाही देता है
इसमें शंका कहां रहता
मैं प्रदेश के युवाओं को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अगले 06 माह में हम 01 लाख युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं।
—मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी
लो अब ‘सोशलमीडिया बंदी’ आ गई!
सोशल मीडियावालों को सरकारी स्कूलों में जाने से रोकना बताता है कि सरकारी स्कूलों के हालात सच में बदहाली की दुखभरी कहानी कह रहे हैं। स्कूलों में क्लासरूम, बोर्ड, पंखे-बिजली, पीने के पानी, दोपहर के खाने, टॉयलेट, लैब, कॉपी-किताब, यूनिफ़ॉर्म से लेकर कई विषय के टीचर्स की बेहद कमी है।
सोशल मीडिया को तो सरकार रोक लेगी लेकिन जेन अल्फा का क्या करेगी?
लो अब ‘सोशलमीडिया बंदी’ आ गई!
सोशल मीडियावालों को सरकारी स्कूलों में जाने से रोकना बताता है कि सरकारी स्कूलों के हालात सच में बदहाली की दुखभरी कहानी कह रहे हैं। स्कूलों में क्लासरूम, बोर्ड, पंखे-बिजली, पीने के पानी, दोपहर के खाने, टॉयलेट, लैब, कॉपी-किताब, यूनिफ़ॉर्म से लेकर कई विषय के टीचर्स की बेहद कमी है।
सोशल मीडिया को तो सरकार रोक लेगी लेकिन जेन अल्फा का क्या करेगी?
अगर प्रजातंत्र को या किसी व्यक्ति को नौकरी नहीं डे उसको उस लायक बनाओ की बात अपने घर चलाने में साक्षम हो सके और यह बिना शासन प्रशासन के कैसे हो जिले का प्रशासन कभी सहयोग ही नहीं कर्ता और बोलते हैं साबका साथ साबका विकास
यह कौन सी नौकरी है जिसमें कोई वेतन का कोई प्रवधन नहीं है सिर्फ आसन और टसएलएली और सहानी बहुतई इंसान अपनी स्थिति को कैसे वर्टमैन में चला आएगा किसी को ढकने से उसकी गुणवत्ता नहीं धक जाति है किसी चीज को छुपा लेने से उसकी जीवन के राहास्य नहीं छोड़ते
योग्यता और गुणवत्ता का आधार कितना बड़ा होता है उसकी निशपक्षता कैसी होती है मानुषया को जब कुछ नहीं मिलता तो मानुषया अपना आधार खोलता है वाह सिर्फ अपने तक ही सीमित राहटा है हम आज भी किस मूल पर अज़ाड है
जिला प्रशासन की पूर्ति क्या होती है जनता जिला में कैसा प्रति बनाते हैं शासन का कम होता है अपने जिले का प्रजा का ऊपर प्रजाटेंट को विकसित करना यहां तो राजनीतिक परतियां खुद ही अपने आप को विकसित करती है प्रजातंत्र गायक हो जता है जो योग है उसको उसको नौकरी जस्ट लव तो है
जिला की जनता अपना प्रतिनिधिटीवी चुनने में असमर्थ रहते हैं सही प्रतमीधुत नहीं सुन पाते हैं गाआईएस कैसे जिले के अंदर बेरोजगारी पैदा हो जाति है अगर सरकर एक आदमी को एक घर में नौकरी डे देगी तो क्या सरकर का ज्यादा बजट बढ़ जाएगा जनपद सरकर बनाती है और जता ही सरकर से वंचित हो