सजना संवरना तेरा ,बिजली गिरा गया।
रूप तेरा सलौना ,मेरे दिल को भा गया।
ढूंढे से भी नहीं मिलता ,चैन मेरे दिल को
ढूंढूं ग़र दिल ,तो भी जाने कहां गया।
बार बार पलकों को तेरा गिरा कर उठाना,
दीवाने को ये और दीवाना बना गया ।
सुरिंदर
दिल आराम तलब है यारो।
मगर कितना अजब है यारो
दिन रात ये धड़कता ही रहे
मन की अपने किसी से न कहे।
कहा मैंने तू थक जायेगा रे
बोला
रूका मैं तो तू फंस जायेगा रे
भगवान तुझे याद कर लेंगे
एकदम से मैं संभला
मैं बोला
अरे ऐसी बात नहीं है यार।
बस ऐसे ही आ गया था
मुझे तुझ पे ज़रा प्यार।
Sk
हर किरदार को इक वज़न देते है ये लफ्ज़
क्यूं न हर शब्द तराजू में पहले तोला जाए
सर्द लहजे से अक्सर कांप उठती है रूहें
पिंजरा अल्फाजों का प्यार से ही खोला जाए।
सुरिंदर कौर
सच बोलने वाले लोग ,कितने झूठे होते हैं
हर पल मुस्काये लेकिन अंदर से टूटे होते हैं।
सच बोलने वाले लोग अक्सर तन्हा होते हैं।
इज्जत की तो छोड़ो ,हर पल रूस्वा होते हैं।
इतनी कड़वाहट दुनिया में, जाने कैसे फैली है
��्यान से देखा तो यहां पे,हर चादर ही मैली है।
सुरिंदर कौर
मुद्दत बाद जब भी हुआ उनसे जो सामना
तमन्ना फिर मचली हमने दिल को समझाया।
अजब से मरहलों से वास्ता रहा जिंदगी में
जिसे जितना चाहा ,उसने ही किया पराया।
सुरिंदर कौर
लुभाए है मन माटी की महक
नशा सा छाए मन जाए बहक
तपती धरा पर दो बूंदें सावन की
शीतल करे मन मनभावन सी
फूली सरसों महकी अमराई
कोयल ने भी ऐसी कूक सुनाई
चलते चलो ये सफ़र है बहुत सुहाना
भीनी भीनी खुशबू के संग याराना
मिट्टी के खिलौने हैं मिट्टी है हो जाना
इतनी है कहानी काहे फिर घबराना
तेरे हर अश्क को, हाजिर मेरी हथेली
बता दुःख खुल के ,न बना कोई पहेली।
कह दो जो भी दिल में है तेरे शिकायतें
यकीं रखो खुदा पर होगी जरूर इनायतें।
सुरिंदर कौर
क्यों लोग मोहब्बत की सज़ा ढूंढ रहे हैं।
बेग��ैरत से रकीबों में वफ़ा ढूंढ रहे हैं ।
तंग आ गये कशमकश ए जिंदगी से हम
आलम है ये कोई नयी क़जा ढूंढ रहे हैं
क्यों फैलाए हम अपना दामन खैरात को
हम तो बस थोड़ी सी दुआ ढूंढ रहे हैं।
सुरिंदर