ओशो संवाद –
ओशो ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक *"संभोग से समाधि की ओर” में स्पष्ट कहते हैं पुरुष की जल्दबाज़ी, स्त्री का दमन और बिखरते रिश्ते क्या यह रिश्तों में दरार का मुख्य कारण है?
आइए शुरुआत करते हैं -
ओशो कहते हैं कि पुरुष की काम-ऊर्जा (Sexual Energy) स्थानीय होती है और वह बहुत जल्दी उत्तेजित होकर उतनी ही जल्दी शांत (Ejaculate) हो जाता है। पुरुष स्वभाव से जल्दबाज़ी में रहता है, क्योंकि उसकी प्रकृति 'शुरुआत' करने की है, वह रुक नहीं पाता है।
इसके विपरीत, स्त्री की ऊर्जा पूरे शरीर में फैली होती है। वह एक झील की तरह है जो धीरे-धीरे चरम आनंद (Orgasm) तक पहुँचने के लिए गहरे प्रेम, समय और धैर्य की आवश्यकता होती है। लेकिन पुरुष अपनी जल्दबाज़ी के कारण उसे बीच में ही छोड़ देता है।
भारतीय संस्कृति और समाज ने हमेशा स्त्री की इच्छाओं को दबाकर रखा है, जिससे वह अपनी ज़रूरतें बोल नहीं पाती। परिणाम? स्त्री अंदर ही अंदर अतृप्त और असंतुष्ट रह जाती है। ओशो कहते हैं यही गहरा असंतोष और संवाद की कमी आगे चलकर रिश्तों में दरार या अवैध संबंधों का कारण बनती है।
सावधानी दोनों के लिए ज़रूरी है:* पुरुषों को अपनी जल्दबाज़ी की आदत बदलकर धैर्य और संवेदनशीलता सीखनी होगी। वहीं, स्त्रियों को भी यह समझना होगा कि हर पुरुष की जैविक प्रवृत्ति एक जैसी होती है, इसलिए अपनी आवाज़ दबाने के बजाय खुलकर बात करें। रिश्ता तभी मुकम्मल है जब दोनों एक-दूसरे की गति का सम्मान करें।