अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की पड़ताल करते हुए बीबीसी ने दो ऐसे लोगों से बात की है जिन्होंने राम मंदिर में काम करते हुए दान और चढ़ावे की व्यवस्था को बेहद क़रीब से देखा है.
इन दोनों लोगों ने जो बातें कही हैं वो न सिर्फ़ चौंकाने वाली हैं बल्कि राम मंदिर की चढ़ावे से जुड़ी व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करती हैं.
चढ़ावा चोरी कैसी हो रही थी? क्या मामले को दबाने की कोशिश की गई? ज़िम्मेदारी और जवाबदेही किसकी है?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव (@raghvendra_rao) और प्रभात कुमार (@prabhat_tiwarii) ने.
देखिए अयोध्या से उनकी ये ख़ास पड़ताल.
अतिरिक्त रिपोर्टिंग: गौरव गुलमोहर (@gauravgulmohar)
ग्राफ़िक्स: वासिफ़ ख़ान और पुनीत बरनाला
आरक्षण के खिलाफ अब्दुल या जुम्मन मियां नही है. आरक्षण के खिलाफ बोलने लिखने वालों का सरनेम देखिए.
इन लोगों को आरक्षण से समस्य नही है. इन लोगों को आपके तरक्की से समस्या है. इन लोगों को आपके ऊंचे मकानों और जूतों से दिक्कत है.
आरक्षण विरोधी चाहते हैं दलित पिछड़ा और आदिवासी गरीब दीनहीन और असहाय नजर आएं. तब जाकर इन लोगों के आंखों को सुकून मिलता है.
हिन्दू समाज का एक वर्ग अपने ही हिन्दू समाज के एक वर्ग के आरक्षण का विरोध कर रहा है, ताकि समाज में उनका वर्चस्व बना रहे.
दुनिया यही एक समाज है जिसे दूसरों के मौलिक अधिकारों का दमन करने में बड़ा आनंद आता है.
जिस देश में हर साल 7 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषण की वजह से काल के गाल में समा जाते हैं। ऐसे दूध- दही और फल आदि की बर्बादी सिर्फ बेवकूफी कही जायेगी ।
अगर सच में ईश्वर होता तो ऐसे विक्षिप्त लोगों को सरसों तेल में डीप फ्राई करता ।
गरीब बच्चों को बांट दो भाई । यह बर्बादी केवल मूर्खता है।
बेहतरीन, लगे रहो बाबू , उम्मीद है इस बार UPSC निकल जाए, भाई तू 200 नहीं 500 लीटर पानी लेकर चल, गले में हांड़ी और कमर पर झाड़ू बांध लेता तो और शानदार लगता 🔥🔥
ये वीडियो देखिए 👇
मध्य प्रदेश के विदिशा में स्कूली छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर, उफनती नदी को पार करते दिखाई दे रहे हैं। छात्र रोज इसी तरह जान हथेली में रखकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
ये वही विदिशा है, जहां से पूर्व CM शिवराज सिंह चौहान सांसद हैं।
'विकास' के हवा-हवाई दावे करने वाली BJP मध्य प्रदेश में करीब 22 साल से सत्ता में है, लेकिन हकीकत सबके सामने है।
BJP के नेताओं को सिर्फ अपनी 'तिजोरी के विकास' की चिंता है, बाकी जनता जिए या मरे- उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है।
शर्मनाक!!
Madhya Pradesh: In Vidisha district, schoolchildren undertake a dangerous journey every day, hopping across the concrete pillars of a stop dam on the Betwa River to attend classes. @ChouhanShivraj@narendramodi
आरक्षण को डिफेंड करने का सबसे अच्छा तरीका है मुट्ठीभर जातियों के ओवर रिप्रजेंटेशन पर उठाओ ?
शुरुआत मीडिया और न्यायपालिका से की जाए.
कौन सी मेरिट के आधार पर प्राइवेट न्यूज़ चैनलों में भर्ती होती है. एडिटर और एंकर कौन सी परीक्षा पास कर चैनल में नौकरी पाए हैं ?
न्यायपालिका में ऐसे कई जज है जो वकालत कर रहे थे उन्हें कोलेजियम ने वकील से सीधा जज बना दिया.
हम नही चाहते संसाधनों पर किसी एक या तीन जाति का कब्जा हो. जिसकी जितनी आबादी है उस लिहाज उन्हें उतनी हिस्सेदारी मिलनी ही चाहिए.
भारत की सबसे बड़ी समस्या है जातीय भेदभाव और तीन जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन.
29 राज्य हैं लेकिन किसी भी राज्य में दलित मुख्यमंत्री नही है.
सुप्रीम कोर्ट में एक भी OBC जज नही है. मैनस्ट्रीम मीडिया में OBC SC ST नजर ही नही आते.
टॉप ब्यूरोक्रेसी में भी OBC SC ST किसी भी निर्णायक भूमिका में नही हैं.
ओवर रिप्रजेंटेशन पर बोलना सीखिए. बहुजन समाज का नेता कोई नही बोलेगा. उसी तरह जैसे बीजेपी के नेता आरक्षण के खिलाफ सामने नही बोलते.
इस लड़ाई को हम सबको मिलकर आगे ले जाना है. ओवर रिप्रजेंटेशन ने भारत को पिछड़ा मुल्क बनाए रखा है. सवर्ण ही नीति निर्माता हैं. बजट वहीं बनाते हैं, रक्षा सौदा वही करते हैं. इन लोगों के ओवर रिप्रजेंटेशन ने देश को बीमार कर दिया है.
भाजपा को जंतर मंतर वाला पढ़ा लिखा युवा नहीं चाहिए..उसे ये वाला युवा चाहिए…ये वाला युवा कांवड़ निकालता है…ये वाला युवा सरकार से कुछ नहीं मांगता है..ये वाला युवा सरकार को किसी भी चीज के लिए जिम्मेदार भी नहीं ठहराता है…ये वाला युवा जो मांगता है भगवान से मांगता है…अच्छे बुरे के लिए भगवान को जिम्मेदार ठहराता है..ये वाला युवा हर चीज के लिए भगवान को उत्तरदायी मानता है..इसीलिए भाजपा इस वाले युवा के ऊपर फूल बरसाती है…और जंतर-मंतर वाले युवा पर बंदूकों से पैलेट दागती है..आंसू गैर के गोले दागती है..PRAGYA KA PANNA पर पूरी रिपोर्ट- कुछ देर में... https://t.co/HtlvGZ0lKk
जब असम में लोग बाढ़ से त्रस्त हैं,
ऐसे समय में जब असम को प्रधानमंत्री जी की जरूरत है,
तब प्रधानमंत्री जी रोड शो में बिजी है,
ये कहां तक सही है?
और ये किसके पैसे से हो रहा है?