बड़ी खुशखबरी 🎉🎉🎉 आज
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर बोले -
शिक्षा विभाग में शिक्षकों की इन भर्तियों के बाद अब दोबारा नई भर्ती करने का फैसला 👇👇👇👇
1st ग्रेड 2026 अब - 3800 पद
2nd ग्रेड 2026 अब - 18000 पद
3rd ग्रेड 2026 अब - 30,000 पद
तैयारी जारी रखें ✌️✌️✌️✌️✌️
#ङांगावास_हत्याकांड पर ङांगावास में पहुंचकर दलित पीड़ित परिवार से मिले क्षत्रिय राजेन्द्र सिंह गुढ़ा
11 वर्ष पहले डांगावास में 5 दलित लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इतने वर्षों बाद सभी 40 जाट आरोपियों का बरी हो जाना बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक है।
#dangawas
फिर गूंजने लगा डांगावास कांड का मुद्दा...
डांगावास कांड के पीड़ितों से मिलने पहुंचे पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा, पूर्व मंत्री ममता भूपेश, रिटायर्ड IPS सत्यवीर सिंह सहित भीम सेना और दलित समाज के नेता...
कहा- न्याय नहीं मिलने तक रूकेंगे नहीं...
12 अगस्त को जयपुर में होगा बड़ा प्रदर्शन...
यह माहौल साफ़ बता रहा है कि @ashokgehlot51 साहब के प्रति लोगों का जुड़ाव कितना गहरा है।
1980 से लेकर आज तक सियासत के उतार-चढ़ाव आए पर गहलोत जी की लोकप्रियता का ग्राफ कभी नीचे नहीं गिरा।
सादगी, अनुभव और जन-विश्वास का नाम ही अशोक गहलोत है!
#Vanrang2026Mumbai#ashokgehlot
डांगावास (राजस्थान): 2015 में जाट हिंदुओं ने दलितों पर हमला किया। 5 दलित सहित 6 लोगों की हत्या हुई। कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया।
ऊना (गुजरात): 2016 में हिंदुओं ने दलितों को बर्बरता से पीटा। कोर्ट ने सभी 35/40 आरोपियों को बरी कर दिया।
भारत दलितों के लिए एक 'नरक' है।
जिस दिन गटर नालियां साफ करते हुए किसी ब्राह्मण, बनिया की मौत हो जाएगी उसी दिन भारत में गटर नालियां साफ करने की मशीनें आ जाएंगी।
हम चाहतें हैं, गटर, और नाली साफ करने में, ब्राह्मण बनिया को आरक्षण मिलना चाहिए।
जिस देश में चपरासी को शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ाना पड़े, वहाँ की अहंकारी सत्ता 'विश्वगुरु' के सपने बेचने में व्यस्त है।
यह वीडियो राजस्थान के एक सरकारी स्कूल का है। स्कूल में शिक्षक नहीं थे, तो बच्चों को चपरासी पढ़ा रहा था। इसके विरोध में कल छात्रों ने स्कूल पर ताला लगा दिया और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराया।
कहाँ हैं रील बनाने वाली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी और विकास कार्यों का जिम्मा संभालने वाले मंत्री प्रवेश वर्मा जी?
विज्ञापनों और रीलों में काम दिखाने से ज़मीन पर काम नहीं हो जाता। दिल्ली की ऐसी हालत क्यों है? जवाब दीजिए।
14 मई 2015 - नागौर का डांगावास दलित नरसंहार
-------------- पृष्ठभूमि -------------
सन 1964 में अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल ने गाँव के ही जाट जाति के चिमनाराम को 23 बीघा जमीन गिरवीं रखी।
कुछ वर्षों बाद बरसाराम मेघवाल ने ब्याज सहित 2100 रुपए जाट जाति के चिमनाराम को दिए।
जातिवादी मानसिकता से ग्रसित जाट जाति के चिमनाराम की नीयत अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल की 23 बीघा जमीन पर खराब हो गईं।
सामंतवाद और वर्चस्ववाद के अहंकार में चूर जाट जाति के चिमनाराम ने अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल से 23 बीघा जमीन वापसी के बदले 25 हजार रुपये की माँग की।
अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल ने जाट जाति के चिमनाराम को 25 रुपए देने से मना किया,तो इनका सामन्तवादी,जातीय और वर्चस्ववादी अहंकार बाहर निकल आया।
अनुसूचित जाति के बरसराम मेघवाल पक्ष द्वारा इसका विरोध करने पर जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने अनुसूचित जाति के बरसराम मेघवाल पक्ष के साथ मारपीट की एवं जान से मारने की धमकियां दीं।
अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल ने न्यायालय की शरण ली। क़ई दशक बीत गए,लेकिन अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल के परिवार को उसकी 23 बीघा जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला।
----अनुसूचित जाति को मालिकाना हक----
सन 2011 में न्यायालय ने अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल के पक्ष में फैसला सुनाया और 23 बीघा जमीन का मालिकाना हक उन्हें देने का निर्णय दिया।
मेड़ता न्यायालय द्वारा बीघा जमीन का मालिकाना हक अनुसूचित जाति के पक्ष में आने पर जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने खुद का अपमान एवं तिरस्कार समझा।
------ डांगावास में दलित नरसंहार --------
14 मई 2015 को जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के करीब 200 लोग अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल की जमीन पर कब्जा करने खेत पर आए।
अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल पक्ष के लोगों ने इसका विरोध किया तो जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने लाठी-डण्डों और धारदार हथियारों से मारपीट की।
यहाँ कि जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल की जमीन कब्जाने के लिए अनुसूचित जाति के लोगों के ऊपर ट्रैक्टर-मोटरसाइकिल तक चढ़ा दिए।
जातिवादी मानसिकता के तहत जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल से अनुसूचित जाति के लोगों को कुचल दिया,जिसमें अनुसूचित जाति के पाँच लोगों रतनाराम मेघवाल,पोखरराम मेघवाल,पांचाराम मेघवाल,खेमाराम मेघवाल और गणपतराम मेघवाल मृत्यु हो गई।
--------------वर्तमान---- ---------
अब मेड़ता अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति न्यायालय ने नागौर के डांगावास में अनुसूचित जाति के पाँच लोगों की हत्या के सभी 40 गुनहगारों को बरी कर दिया है।
मेड़ता एससी-एसटी न्यायालय ने सन्देह के लाभ में अनुसूचित जाति के पाँच लोगों की हत्या के दोषी जाट समाज के 40 लोगों को रिहा करने का आदेश दिया है।
मेड़ता एससी-एसटी न्यायालय ने न्यायपालिका को खुद भी सन्देह,पक्षपात और अन्याय साथ देने के घेरे में ला दिया है।
मेड़ता एससी-एसटी न्यायालय ने सभी 40 आरोपियों को रिहा कर दिया है,तो न्यायालय बताए कि अनुसूचित जाति के पाँच लोगों की वीभत्स हत्या किसने की?
@Mayawati@AnandAkash_BSP@bspindia
🚨 मिशन स्टार्ट... ✊
आपको क्या करना है... 👇
इन चारों के ट्विटर हेंडल्स कमेंट बॉक्स में मेंशन करने हैं।
शुरू हो जाओ... 🙏
[ टारगेट : 100+ कमेंट्स ]
कल सुबह इन चारों का ट्विट डांगावास पर मिल जाएगा।
संवैधानिक पद की जिम्मेदारी निभानी ही पड़ेगी। 🙏
भर दो कमेंट बॉक्स... 👇👇👇
14 मई 2015 - नागौर का डांगावास दलित नरसंहार
-------------- पृष्ठभूमि -------------
सन 1964 में अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल ने गाँव के ही जाट जाति के चिमनाराम को 23 बीघा जमीन गिरवीं रखी।
कुछ वर्षों बाद बरसाराम मेघवाल ने ब्याज सहित 2100 रुपए जाट जाति के चिमनाराम को दिए।
जातिवादी मानसिकता से ग्रसित जाट जाति के चिमनाराम की नीयत अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल की 23 बीघा जमीन पर खराब हो गईं।
सामंतवाद और वर्चस्ववाद के अहंकार में चूर जाट जाति के चिमनाराम ने अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल से 23 बीघा जमीन वापसी के बदले 25 हजार रुपये की माँग की।
अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल ने जाट जाति के चिमनाराम को 25 रुपए देने से मना किया,तो इनका सामन्तवादी,जातीय और वर्चस्ववादी अहंकार बाहर निकल आया।
अनुसूचित जाति के बरसराम मेघवाल पक्ष द्वारा इसका विरोध करने पर जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने अनुसूचित जाति के बरसराम मेघवाल पक्ष के साथ मारपीट की एवं जान से मारने की धमकियां दीं।
अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल ने न्यायालय की शरण ली। क़ई दशक बीत गए,लेकिन अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल के परिवार को उसकी 23 बीघा जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला।
----अनुसूचित जाति को मालिकाना हक----
सन 2011 में न्यायालय ने अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल के पक्ष में फैसला सुनाया और 23 बीघा जमीन का मालिकाना हक उन्हें देने का निर्णय दिया।
मेड़ता न्यायालय द्वारा बीघा जमीन का मालिकाना हक अनुसूचित जाति के पक्ष में आने पर जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने खुद का अपमान एवं तिरस्कार समझा।
------ डांगावास में दलित नरसंहार --------
14 मई 2015 को जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के करीब 200 लोग अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल की जमीन पर कब्जा करने खेत पर आए।
अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल पक्ष के लोगों ने इसका विरोध किया तो जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने लाठी-डण्डों और धारदार हथियारों से मारपीट की।
यहाँ कि जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने अनुसूचित जाति के बरसाराम मेघवाल की जमीन कब्जाने के लिए अनुसूचित जाति के लोगों के ऊपर ट्रैक्टर-मोटरसाइकिल तक चढ़ा दिए।
जातिवादी मानसिकता के तहत जाट जाति के चिमनाराम पक्ष के लोगों ने ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल से अनुसूचित जाति के लोगों को कुचल दिया,जिसमें अनुसूचित जाति के पाँच लोगों रतनाराम मेघवाल,पोखरराम मेघवाल,पांचाराम मेघवाल,खेमाराम मेघवाल और गणपतराम मेघवाल मृत्यु हो गई।
--------------वर्तमान---- ---------
अब मेड़ता अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति न्यायालय ने नागौर के डांगावास में अनुसूचित जाति के पाँच लोगों की हत्या के सभी 40 गुनहगारों को बरी कर दिया है।
मेड़ता एससी-एसटी न्यायालय ने सन्देह के लाभ में अनुसूचित जाति के पाँच लोगों की हत्या के दोषी जाट समाज के 40 लोगों को रिहा करने का आदेश दिया है।
मेड़ता एससी-एसटी न्यायालय ने न्यायपालिका को खुद भी सन्देह,पक्षपात और अन्याय साथ देने के घेरे में ला दिया है।
मेड़ता एससी-एसटी न्यायालय ने सभी 40 आरोपियों को रिहा कर दिया है,तो न्यायालय बताए कि अनुसूचित जाति के पाँच लोगों की वीभत्स हत्या किसने की?
जाटों और दलितों के संबंध 👇👇👇
बाबासाहेब अम्बेडकर की किताब से...
🔰 जाटों ने महापंचायत की।
🔰 दलितों से खेतों में जबरन मजदूरी करने को कहा।
🔰 दलितों ने मना कर दिया।
🔰 गुस्साए जाटों ने सामाजिक बहिष्कार कर दिया।
🔰 पानी और चारे पर भी रोक लगा दी।
🔰 महिलाओं से बदसलूकी और बच्चों से पिटाई।
बाबासाहेब कृषक जातियों को जमींनें सौंप देने के खिलाफ थे। उनका मानना था कि ऐसा होने से किसानों का दलितों पर अत्याचार बढ़ जाएगा।
जैसा कि नागौर के डांगावास में देखा गया...
सच स्वीकार करने में असहज मत होइए...🙏
सुनिए डांगावास नागौर कांड के पीड़ित गोविंद मेघवाल को........।
मै भी अब इस परिवार का एक हिस्सा हूँ। हम सब लोग डांगावास नागौर के पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़े है।
राजस्थान के डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मेरी बात हुई। 11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त को आए फैसले से वे बेहद आहत हैं। उनकी एक ही पीड़ा है यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो फिर उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या किसने की?
वर्ष 2015 में राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में हुए इस जघन्य हत्याकांड में 5 दलितों सहित कुल 6 लोगों की नृशंस हत्या हुई, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब एससी-एसटी विशेष अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी किए जाने से पीड़ित परिवार स्वयं को न्याय से वंचित महसूस कर रहा है।
यह केवल एक परिवार का मामला नहीं है। इस फैसले ने पूरे क्षेत्र, विशेषकर दलित समाज के लोगों के बीच असुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। लोगों के मन में यह सवाल है कि यदि इतनी बड़ी घटना में भी दोषियों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा और कानून के प्रति विश्वास कैसे कायम रहेगा?
डांगावास का फैसला उन पुराने जख्मों को फिर ताज़ा कर गया है, जो लक्ष्मणपुर बाथे जैसे नरसंहारों ने दलित समाज को दिए थे। वर्ष 1997 में बिहार के लक्ष्मणपुर बाथे में 58 दलितों का नरसंहार किया गया था, जिसमें 27 महिलाएं और 16 मासूम बच्चे भी शामिल थे। वर्षों बाद उस मामले में भी सभी आरोपी बरी हो गए। आज देश जानना चाहता है कि यदि सभी आरोपी निर्दोष हैं, तो इन निर्दोष लोगों की हत्या आखिर किसने की?
परिवार ने बताया है कि वे इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन न्याय की इस लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। हमें विश्वास है कि राजस्थान हाईकोर्ट में मामले के सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा होगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।