#UGCAct का कमाल, सवाल ही सवाल....
आज DU कैंपस के बाहर वंचित, शोषित, दबे, कुचले तबके के छात्रों ने आज एक महिला यूट्यूबर से जाति पूछकर उसकी लिंचिग करने का दुस्प्रयास किया। 🙄
वो भी पुलिस की मौजूदगी में।
इस लड़की की गलती सिर्फ इतनी थी कि ये Brahmin जाति से है।
कोई उसको धक्के मार रहा था, कोई उसके कपड़े फाड़ना चाह रहा था, कोई उसको उठाने के लिए बोल रहा था तो कोई उसके अंगों को बदनियती से छूने का प्रयास कर रहा था। 🤨
यहां तक कि रेप की धमकी भी दी जाती है।
शर्मनाक...
कुछ दिनों पहले बिहार के दरभंगा में स्वर्णों के पूरे #हरिनगर_गांव पर भी FIR दर्ज की गई थी।
क्या भारत में अब ब्राह्मण होना गुनाह है ? 🤔
हम कैसे समाज का निर्माण कर रहे हैं ?
सवाल समाज और व्यवस्था दोनों पर है ⁉️
बड़ी खबर...
GC स्टूडेंट्स ने मंत्रियों से भिड़ना शुरू कर दिया है। मिनिस्टर विजय शाह से पूछा कि हॉस्टल, रेंट अलाउंस और स्टेशनरी स्कीम सिर्फ़ SC/ST स्टूडेंट्स तक ही क्यों हैं, और गरीब OBC और GC स्टूडेंट्स के लिए भी ऐसा ही सपोर्ट मांगा। #Justice_For_रूचि_तिवारी
UGC समर्थन की आड़ मे ब्राह्मण पत्रकार बेटियों के साथ बदसलूकी की गई,सिर्फ इसलिए की वह ब्राह्मण है।
नतीजे जो भी हो लेकिन अब चुप नहीं बैठेगा मेरा समाज।जैसे को तैसा जवाब देंगे 🫵
इस मंच से खुलकर कह रहा हूँ मैं अब से सिर्फ सवर्ण हूँ।मुझे गर्व है अपने ब्राह्मणवादी सवर्ण होने पर।🚩
भीमवाद मुर्दाबाद 🤧 ब्राह्मणवाद जिंदाबाद ✅
#GCAtrocityAct
#Justice_For_रूचि_तिवारी
अब तो बंट गए...
बस कटना बाकि है...
शुक्रिया @dpradhanbjp 🙏
देश का सामान्य वर्ग, मध्यम वर्ग, ईमानदारी से टैक्स देने वाला वर्ग, बिना आरक्षण पढ़ाई करने और नौकरी पाने वाला वर्ग... इसी लायक है कि उसके साथ अभी और नाइंसाफी हो...उसका और शोषण हो...उसको गाली मिले..उसको सड़क पर पीटा जाए...उसे झूठे मामलों में फंसाया जाए...जेल में डाला जाए...और कोई कानून उसका बचाव न कर पाए...इसी लायक है ये वर्ग... बढ़िया काम कर रहे हैं आप 🙏
#ugc
कोई भी लड़की, उसकी जाति या परिवार चाहे जैसा भी हो, ऐसे अत्याचार की हक़दार नहीं होती। जब किसी बेटी की इज़्ज़त पर हमला होता है, तो वह अपराध से आगे पूरे समाज की शर्म बन जाता है।
दोषी केवल अपराधी नहीं, हमारी चुप्पी भी है, क्योंकि हर खामोशी गलत करने वालों का हौसला बढ़ाती है।
अब गां$ का गाजापट्टी बनेगा
सारे नीलटो को गिरफ्तार किया जा रहा है
इन्हीं सड़कछाप डफलीबाजों ने रूचि तिवारी का मॉब लिंचिंग करने का कोशिश किया था
उन पर सख्त धाराओं में कार्यवाही की जाएगी
अब औकात पता लगेगा
Today at Delhi University, what happened to Ruchi Tiwari is a warning to every General Category.
It's time to aggressively demand:
General Category Atrocity Act
&
National Commission for General Category (NCGC)
Silence is no longer an option now!
“ब्राह्मण है ना? आज तेरा नंगा परेड निकालेंगे… आज पकड़ में आई है तू…! मेरे कपड़े फाड़े जा रहे थे… गाड़ी का गेट खोल दिया था… मुझे घसीट कर लेकर जाने लगे थे।” 😓
ये शब्द हैं रुचि तिवारी के। वह DU में रिपोर्टिंग करने गई थी, जहाँ वामपंथी अंबेडकरवादी लड़के-लड़कियाँ UGC बिल के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे। उसका नाम और जाति — ब्राह्मण — पूछकर लगभग 500 लोगों की भीड़ ने उसे पीटना शुरू कर दिया। सब पढ़े लिखों की भीड़ थी। जिनको ब्राह्मण नाम से चिढ़ है। सोचो बिना यूजीसी बिल के इतनी नफरत है ... तो UGC बिल लागू होने के बाद आप के बालकों पर प्रताड़ना का क्या मंज़र होता .... 😲
आज बड़े नेता, केंद्रीय मंत्री, प्रधानमंत्री और विपक्ष सब शांत हैं। बस इसलिए खामोश हैं कि मामला सवर्ण का है, विशेष तौर पर ब्राह्मण का है।
अगर यही मामला किसी दलित का होता, तो बड़े-बड़े नेताओं का ट्वीट भी जाता। देश में आगजनी हो जाती।
वैसे तो ये कथित तौर पर राष्ट्रवादियों की सरकार है। तो फिर वामपंथी सरकार क्या बुरी थी। यहाँ सवर्ण सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे-ऐसे बिल लाकर आपके बच्चों को वामपंथियों से पिटवाया जा रहा है। सरकार सवर्णों पर ज़्यादती के नाम पर चुप है । सवर्ण लड़कियों की विश्वविद्यालयों में लींचिंग हो रही है। आपके बच्चों के आगे पढ़ने के रास्ते बंद करने की तैयारी है। 😓
वक़्त आ गया है कि सवर्ण समाज गंभीरता से इन सवालों के जवाब खोज ले कि अब आगे की रणनीति क्या रहेगी।👽
अभी 50% सवर्ण समाज जिसका खून पानी हो चुका है, वो अपने खोखले राष्ट्रवाद में, अंधभक्ति में मस्त है। उनके लिए ये बस एक न्यूज़ है, और मुकेश जोशी मोदी विरोधी है।
मगर ज़रा इस लड़की की जगह आपकी अपनी बेटी को वामपंथियों की भीड़ में रखकर कल्पना करें जो उसे केवल सवर्ण होने के अपराध में नोच रही है ! 😓
DU में जो रुचि तिवारी के साथ हुआ, वह वामपंथी-अम्बेडकरवादी छात्र पार्टियों के कारण हुआ, ऐसा मानना मूर्खता है। घटना का सतही कारण तो अवश्य ही ऐसी पार्टियों के छात्र नेता हैं, पर जड़ में क्या है?
जड़ में जातिवादी तुष्टिकरण और ब्राह्मण घृणा के नारों का सामान्यीकरण है। मोदी सरकार की उपलब्धि यही है कि अब भीमवादी खुल्ला घूम रहे हैं। कल तक जो दीवारों पर ‘ब्राह्मण बनिया कैम्पस छोड़ो’, ‘देयर विल बी ब्लड’, ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’ लिखा करते थे, अब वह ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’ के नारों से होते हुए, अब एक लड़की के कपड़े फाड़ने पर आ चुकी है क्योंकि उसका नाम ‘तिवारी’ है।
वामपंथी पार्टियों को अब हम नहीं कोसते क्योंकि हम जानते हैं उन्हें सशक्त करने वाले लोग सत्ता में हैं, जो ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ का नकली नारा रैलियों में लगा कर एकता का स्वांग रचते हैं।
जेएनयू में हाल ही में कुछ छात्रों को रस्टिकेट किया गया, जो एक अच्छा उदाहरण है, पर आगे क्या? कैम्पस में एक छात्रा के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने वाले को जेल होनी चाहिए।
आज रुचि तिवारी के पास कौन से विधिक विकल्प हैं? क्या वह कोर्ट में ‘जातिवादी घृणा’ का आधार बना सकती है? नहीं, क्योंकि वो जिस समाज से आती है, उसके पास ऐसा कोई विकल्प नहीं। उसे कोर्ट में यह बताना होगा कि उस पर हुए अपराध की जड़ में जातिवादी घृणा है, पर प्रतिवादी वकील कहेगा कि ब्राह्मणों के साथ कैसा जातिवाद?
यह विषाक्त वातावरण नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ही देन है। नाम उसी का लिया जाएगा जो ई-रिक्शा से वंदे भारत तक हर उपलब्धि का क्रेडिट लेता है। यह क्रेडिट भी मोदी जी का ही है।
ब्रा•ह्मण लड़की को घेरकर भीड़ ने हमला कर दिया उसे बेरहमी से पीटा उसके साथ अभद्रता.. की और ये सब हुआ DU में..
पर किसी को कानों कान खबर भी नहीं कोई न्यूज़ नहीं किसी नेता का कोई रिएक्शन नहीं पता है क्यों..? क्योंकि ये बेबस एक ब्रा•ह्मणों की बेटी है
ये दृश्य देखकर महाभारत में द्रौपदी का हुआ चीरहरण याद आ गया ये दृश्य बेहद भ•यावह और ड•रावना है।
ब्राह्मणवाद जिंदाबाद 🚩🚩
जब जुल्म ज्यादा होने लगें तो उसका विरोध करना आपका कर्तव्य और धर्म बन जाता है।
सवर्ण समाज UGC के विरोध में सड़कों पर हैं।
हमारा पूर्ण समर्थन हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में रुचि तिवारी के समर्थन में छात्र 'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' के नारे लगा रहे है।
हमें जीतना भी दबाया जाएगा। हम उतना ही एकजुट होंगे राख कितनी भी हो उसके नीचे आग जरूर होता है।
"ये ब्राह्मण है..मारो..मारो इसे.. मेरे कपड़े फाड़े... मेरी वीडियो बनाई.. जब तक मैं बेहोश नहीं होने लगी तब तक मुझे मारते रहे।"
- पत्रकार रुचि तिवारी, जिन पर डीयू में यूजीसी समर्थक प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था।