संपूर्ण विश्व को अनंत चतुर्दशी की अनंत शुभकामनाएँ!!!
जैन समाज में प्रचलित ‘क्षमा वाणी पर्व’ के इस महान अवसर पर ये सीख लें कि जीवन में भूल और गलती से किसी का मन दुखाना सामाजिक व्यवहार का हिस्सा है, जिसके कारण संबंधों में दूरी आ जाती है, जिन्हें आपसी समझ से पाटा भी जा सकता है।
इसीलिए ‘क्षमा वाणी’ के इस महान पर्व से क्षमा माँगने की व्यावहारिक सीख लें और जाने-अनजाने में हुई मन-वचन-करम की गलतियों के लिए आपस में क्षमा के सकारात्मक भाव से मानवीय संबंधों और संवेदनाओं को और भी दृढ़ करें। सबके मत को सहनशीलता के साथ सुनें और उनसे टकराव की जगह समायोजन करते हुए ‘जीओ और जीने दो’ की बात करें। ‘मत के भेद’ को सदैव विविधता को रूप मे देखा जाए और समय रहते उसे ‘मन का भेद’ बनने से रोका जाए तो जीवन सरल और मन शांत हो जाता है। सौहार्द और शांति ही जीवन की सबसे बड़ी और सच्ची उपलब्धि है।
क्षमा वीरस्य भूषणम्!
अयोध्या के ‘राम मंदिर’ में चढ़ावा चोरी की पहली सतही जाँच में ही आँकडा 70 से 50% आगे बढ़कर 105 हो गया है। ये बेहद निंदनीय है कि सरकारी देखरेख में ‘धर्म धन की चोरी’ का इतना अधर्मी कुकृत्य किया गया है।
भाजपाई और उनके संगी-साथियों की संलिप्तता पूरे अयोध्या में चर्चा का विषय है, ये घोर अधर्म अब जगजाहिर हो चुका है। जनता का भाजपा पर अब रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। अयोध्या ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश, देश व दुनिया में भाजपा की थू-थू हो रही है। संपूर्ण विश्व के सनातनियों को इस बात से गहरा आघात पहुँचा है कि उन्होंने जो दान-पुण्य का पैसा धर्म के विकास के लिए दिया था उस धन को भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने चुराकर अपना-अपना ख़जाना भर लिया है। ये अपराध भी है और पाप भी, इसीलिए सबने ये संकल्प लिया है कि अब भाजपा को सदैव के लिए हराना और हटाना है।
भाजपा के ख़िलाफ़ अगला चुनाव धर्म को बचाने की किसी जंग से कम नहीं होगा, इसीलिए धर्म-प्रधान लोग कह रहे हैं :
अब भाजपा के विरुध्द होगा धर्म युद्ध!
काशी के क्योटो में हुआ चमत्कार
पानी पर चल गयी दो पहिया नाव
जनता पूछ रही है कि पचासों हज़ार के बजट से काशी को स्मार्ट सिटी बनाने का जो दावा था उस पर किसने ये पानी फेर दिया?
कहीं दिल्लीवालों का काम लखनऊवालों ने तो चौपट नहीं कर दिया। न गंगा साफ़ हुई, न वरुणा और न ही काशी के नाले तभी तो नल को छोड़कर हर तरफ़ जल ही जल है।
अगर दूरबीन और ड्रोन काम नहीं कर रहा है तो रडार से ही दिखवा लें वैसे भी अब बादल नहीं है। अगर फिर भी न दिखाई दे तो यूपी के बुलडोज़र पर चढ़कर देख लें, कम से कम कभी तो बुलडोज़र का सकारात्मक इस्तेमाल हो।
DM पर तो नाजायज़ काम करने पर, हाईकोर्ट के जुर्माने की फटकार पड़ गई लेकिन उनका क्या होगा, जिनके दिशा-निर्देश में ये सब प्रतिशोधात्मक काम हो रहा है?
D से पहले तो C आता है ना?
बाक़ी… जनता समझदार है।
भाजपाई JPNIC जैसी अद्भुत सिग्नेचर बिल्डिंग को सिर्फ़ बेच सकते हैं, उतना बड़ा कभी सोच नहीं सकते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार ने उनकी सोच को संकीर्ण, कुंठित और संकुचित कर दिया है।
भाजपा जाएगी, बड़ी सोच आएगी!
बे-बस बहन : रक्षाबंधन पर मुफ़्त बस का वादा करके बस ही हटवा दी!
“प्राण जाए पर वचन न जाए” कहनेवाले रघुवंशियों तक को ठग लेनेवाले ये भाजपाई क्या वचन निभाएंगे।
बढ़ती चीनी की कीमतों के खिलाफ आज चीनी को माला पहनाकर प्रतीकात्मक आरती उतारते हुए सरकार का ध्यान आम जनता की परेशानी की ओर आकर्षित किया।
महंगाई पर लगाम लगाइए, आम आदमी की रसोई को राहत दीजिए।
जनता की रसोई में मिठास चाहिए, महंगाई नहीं। ✊
@yadavakhilesh@dimpleyadav
अब शिखर पर है पीडीए!
सभी समर्पित पर्वतारोहियों को इस सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ… आप सबके प्रयास से पीडीए यूँ ही नई ऊँचाइयों की ओर सदैव अग्रसर रहेगा। ये संकल्प भी है और वचन भी।
#माउंट_यूनम
"आने वाले समय में जब समाजवादी सरकार होगी तो 16 अगस्त की छुट्टी महारानी अवंतीबाई लोधी जी के सम्मान में हम लोग करेंगे।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
बनाने चले Brand, बज गया Band!
अब 7000 करोड़ एक साल में भी खर्च कर दें तो भी कुछ बदलनेवाला नहीं।
डबल इंजन के आपसी कम्पटीशन में गुरु गुड़ रह गया, चेला शक्कर हो गया… ये बात अलग है कि ज़्यादा मीठे के चक्कर में सब कड़वा हो गया।
अच्छे व्यवहार, अच्छे करम और जन हित के काम से बड़ा कोई और प्रचार नहीं होता है।
इनके अत्याचार, अन्याय, महिलाओं-अधिकारियों-पत्रकारों-प्रोफ़ेसरों से दुर्व्यवहार, दुर्वचन, सजातीय पक्षपात, पीडीए पर प्रहार, ‘हाता नहीं भाता’ के फ़ार्मूल के विस्तार, महा-भ्रष्टाचार के द्रव्य के स्वर्ण-ठोसीकरण, मंदिर चोरी के आरोपियों को दोषपूर्ण SIT से बचाने व प्रतिशोध की राजनीति के कारण घर-मकान-दुकान से लेकर यूनिवर्सिटी तक गिराने जैसी नकारात्मक-संकीर्ण राजनीति के कारणवश इनकी इमेज का एनकाउंटर हो गया है और उसके ऊपर से बुलडोज़र भी गुज़र गया है। इनकी छवि तो बनी नहीं, अधिकारियों के घर-महल ज़रूर बन गये।
जनता पूछ रही है लखनऊ से गोरखपुर कोई डाइरेक्ट ट्रेन है क्या क्योंकि अपने बनाए भाजपाई एक्सप्रेसवे से जाने का जोखिम तो वो उठाएंगे नहीं। ‘एक-दो’ आइटम छोड़कर बाक़ी सब वैध सामान ले जाने के लिए मूवर्स एंड पैकर्स भी तैयार बैठे हैं।