संस्था को कुछ दे, इतनी औकाद नहीं है हमारी। यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से संस्था हमें लगातार मुफ़्त में दे रही होती है।
संस्था से सालों तक पहले हम लेते हैं और फिर जब लाभ हुआ दिखता है तो कुछ मुट्ठीभर लोग भुगतान करने का प्रयास करते हैं ताकि जो मिला है औरों तक भी पहुंचे।
जो कि कुछ मुट्ठीभर लोगों के अलावा आप से अधिकतर लोग करते नहीं हैं।
राहुल,
>> इसका क्या अर्थ है: "गलती से मेरा नंबर चला गया"?
अपने आप फ़ोन नंबर चलकर हमारे पास आया था? संस्था आपको स्वयं कभी सामने से कॉल नहीं करती - पहले आपने ख़ुद वेबसाइट पर जाकर फ़ॉर्म भरा था और उस फ़ॉर्म में अनुरोध/स्वीकार किया था कि संस्था आपको कॉल करे।
और अगर आप चाहते थे कि संस्था कॉल न करे, तो वेबसाइट पर यह भी साफ़ बताया गया है कि अकाउंट कैसे डिलीट करते हैं। WhatsApp के हर संदेश पर लिखा आता है - "इन संदेशों को रोकें" (STOP Messages)। आप अपना नंबर हटा सकते थे। आप पढ़े लिखे तो होंगे? पाँच साल में ये नहीं पता चला कि अकाउंट कैसे डिलीट करना है? रोज़ सैकड़ों लोग करते हैं, बस आप ही अनूठे निकले.
>> “रोज़ कॉल और व्हाट्सएप आते हैं कि पैसे दो और कोर्स लो। ये अध्यात्म के नाम पर शुद्ध धंधा चला रहे हैं।”
भाई, तुम्हें मुफ़्त में कुछ दिया जा रहा है, और अगर तुम कुछ दो भी दोगे तो भी 50 रुपए दोगे। यही वो न्यूनतम योगदान राशि है जिस पर दो लाख छात्रों को संस्था आज गीता पढ़ा रही है। आज तक तुमने 50 रुपए के लिए किसी को बार-बार कॉल करते हुए सुना है? बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भी पैसे बचाने के लिए ऐसा नहीं करतीं। जितना तुम दोगे, उससे कहीं ज़्यादा संस्था सिर्फ़ कॉल और WhatsApp पर तुम पर खर्च कर देती है। तुम्हें गीता से जोड़ने से पहले ही संस्था तुम पर ज़्यादा खर्च कर चुकी होती है - और इसमें हम ये तो गिनाना भी नहीं चाहते कि गीता समझने का मूल्य क्या होता है। तो फ़ोन तुमसे कुछ लेने के लिए नहीं, तुम्हें कुछ देने के लिए किया जाता है।
जो भी व्यक्ति आचार्य जी की गीता से जुड़ता है, उसे
🔸महीने के तीसों दिन या तो सत्र या तो परीक्षा उपलब्ध करवाई जाती है। प्रतिदिन।
🔸गीता के हर श्लोक को दो-दो घंटे समझाया जाता है, और हर श्लोक की रिकॉर्डिंग्स पिछले कई सालों की आपके लिए उपलब्ध हैं।
🔸सिर्फ़ गीता ही नहीं, कबीर साहेब के भजन, बौद्ध दर्शन, अष्टावक्र गीता, ऋभु गीता, लाओ त्ज़ू पर भी सत्र होते हैं।
🔸एक पूरी सोशल मीडिया ऐप आपके लिए बनाई गई है जहाँ गॉसिप नहीं, गहरी चर्चा होती है। एक सोशल मीडिया के IT system पर कितना खर्चा होता है, कुछ अंदाज़ा है? और वो आपको बिना किसी शुल्क के मिलता है।
🔸Ask AP AI आपको मुफ़्त में, हाँ मुफ़्त में, ऐसे जवाब देता है जो पिछले 25 सालों की आचार्य जी की मेहनत से निकले हैं।
🔸महीने में 15 गीता परीक्षापत्र बनाए जाते हैं, आपकी समझ को धार देने के लिए।
थोड़ा बुद्धि को ज़ोर दो, ये सब ₹50 में देना मुमकिन है? जिन्हें तुम धर्मगुरु वगैरह कहते हो, वे तुम्हें ₹50 में मिलने भी न दें, सिखाना तो दूर की बात है। इतने में तो Zomato पर एक समोसे की डिलीवरी भी नहीं आती।
और तुम कहते हो हम धंधा चला रहे हैं? अरे, ये धंधा नहीं, अहंकार के लिए बहुत बड़ा फंदा है, जो गीता से भागना चाहता है। तुम्हारा यह ट्वीट बता रहा है कि हमारा तरीका सच में कारगर है।
>> “इतनी शिद्दत से तो कोई भगवान का नाम नहीं जपता, जितनी शिद्दत से ये लोग मार्केटिंग करते हैं।”
ये भगवान का नाम भी बिना मार्केटिंग के तुम तक नहीं पहुँचा होता - पर खैर, इतना तुम नहीं समझ पाओगे। शुक्र करो कि संस्था मार्केटिंग पर खर्चा कर रही है, वरना 2 लाख से भी ज़्यादा लोग कभी गीता सुनने और परीक्षा देने नहीं आते, वो परीक्षा इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के मुताबिक़ अध्यात्म क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर पहली attempt में पास कर लोगे न राहुल, तो जीवन भर के लिए गीता तुम्हें मुफ़्त में सिखाई जाएगी।
>> “अगर आपके ज्ञान में वाकई दम होता, तो आपको फोन कर-करके लोगों से भीख नहीं मांगनी पड़ती।”
उपनिषदों में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? सार्त्र, हैडेगर, विटगेंस्टीन में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? शून्यता सप्तति में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़ी है?
जिस भी चीज़ में दम है, वो तुमने ख़ुद कभी नहीं पढ़ी, तुम्हें ज़बरदस्ती ही पढ़वाई गई - स्कूल से लेकर कालेज तक। अपनेआप तो सड़ा कोकशास्त्र और व्हाट्सएप साहित्य ही पढ़ा है तुमने। अपनी ज़िंदगी देखो - तुम हो किस गुमान में? तुम्हें सचमुच लगता है तुम सच और गहराई की ओर अपनेआप ही चले जाओगे? नहीं, कभी नहीं। अपनेआप तो झूठ और गंदगी ही फैलते हैं। सफाई अपने आप कभी नहीं हो जाती - उसके लिए किसी को जान लगानी पड़ती है। सच स्वयं नहीं फैलता, दार्शनिकों और ज्ञानियों को सच फैलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है।
फ़ोन कर कर के भीख नहीं माँगी जा रही। फ़ोन कर कर के इस दुनिया को कुछ ऐसा दिया जा रहा है जो माँगने की भी इसकी औक़ात नहीं है। एहसान समझो कि तुम्हें कॉल किया जा रहा है। वरना आज कोई नहीं है जो तुम्हें गीता का अतिशुद्धतम अर्थ समझा रहा हो, जो अपना IIT और IIM का करियर छोड़कर तीसों दिन आपको समर्पित कर रहा हो और ऊपर से इस काम के लिए खुद खर्चा कर रहा हो ताकि तुम्हें कुछ सिखा सके।
जो काम आज कोई नहीं कर रहा, वो प्रशांतअद्वैत संस्था कर रही है, चाहे वो अंधविश्वास को तोड़ने की बात हो, चाहे पशु प्रेम सिखाने की बात हो, चाहे स्त्री सशक्तिकरण की बात हो। हमारी संस्था आज इन सब में सबसे अग्रणी है।
अगर ये बात समझ नहीं आ रही तो गीता कम्युनिटी पर आइए और कुछ दिन बिताइए। आपको खुद समझ आ जाएगा, जहाँ हर कुछ मिनटों में नए-नए testimonials आते हैं, जिनमें दुनियाभर के लोग बताते हैं कि गीता मिशन से जुड़ने के बाद उनकी ज़िंदगी में क्या परिवर्तन आया और क्या लाभ हुआ।
और हाँ, हमारे पास तुम्हें किए गए सारे कॉल्स, उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, तारीख़ और समय सहित उपलब्ध हैं। ऐसी झूठी अफ़वाहें फैलाने के कारण तुम्हारा Twitter account रिपोर्ट भी कर सकते है।
———
आपके होने न होने से आचार्य प्रशांत गीता मिशन को कुछ नहीं होगा पर आपका नुकसान जरूर होगा। सच को समझें और अभी जुड़ें:
वेबसाइट: https://t.co/CbUvSIqVnu
गीता मिशन 🔥: https://t.co/31HNg3prBK
आचार्य जी का जीवन और काम: https://t.co/o49cDNzt6N
10,000+ आर्टिकल्स (Open to all): https://t.co/fZl6PuDHR8
160 बुक्स: https://t.co/XSD6HbSRFL
500+ वीडियो कोर्स: https://t.co/Qmboc7Hwn9
1000+ Testimonials: https://t.co/pi1LqP1TJC
Largest online examination on the Bhagavad Gita conducted by a spiritual organisation:
https://t.co/EzikPkHm88
@Advait_Prashant
Greater Noida, Uttar Pradesh: On Mahashivratri, Philosopher and author Acharya Prashant combined knowledge, art, and spirituality through a special theatrical performance and exhibition, educating 2,000 selected participants, sharing Vedantic insights, answering questions, and demonstrating the true essence of Shivtatva while signing over 10,000 books
Book Launch of Acharya Prashant's New Book, Truth Without Apology, at India International Center, New Delhi—covered by The Pioneer.
Hosted by HarperCollins and covered extensively by national media including PTI, ANI, IANS and The Pioneer, the evening included the launch ceremony followed by an intense interactive session with Acharya Prashant.
@sachinsgaur श्रीमान, आप पत्रकार हैं न...
Nubia Magazine एक ग्लोबल डिजिटल पब्लिकेशन है जो आधुनिक दुनिया को प्रभावित करने वाले लोगों, विचारों, उद्योगों और सांस्कृतिक आंदोलनों पर कंटेंट प्रकाशित करता है।
@Advait_Prashant जी नंबर 1 🔥🔥🔥
Osho बाबा अपने लातों के स्पर्श मात्र से मुक्ति दिलाया करते थे।
वहीं आचार्य प्रशांत जी हमारे जीवन से जुड़े हर प्रश्न का तार्किक, वैज्ञानिक और स्पष्ट उत्तर देते हैं। लोगों से जमीनी स्तर पर बात करते हैं, उन्हें गले लगा लेते हैं।
सचिन तूने सोच भी कैसे लिया कि कोई ओशो (जादू वाले बाबा) की बराबरी कर सकता है।
काश तू होता तो तुझे भी अपनी लात के स्पर्श से दिव्य अनुभूतियां करवा देते ओशो बाबा।
Glimpses of Acharya Prashant’s Dialogue at the Delhi Literature Festival ✨
On 6 February, the 14th edition of the Delhi Literature Festival was inaugurated. On this occasion, a special dialogue between Acharya Prashant and Senior editor Rana Yashwant delivered a sharp and unsettling reflection on the directionlessness of the modern human being. After the literature festivals in Pune and Bhubaneswar, this marked Acharya Prashant’s third Lit Fest address in recent months. Despite Delhi’s biting cold, hundreds of people had gathered in the amphitheatre right from the beginning of the festival.
Rana Yashwant framed the questions in a way that made every listener feel they arose directly from their own lives. Each question stood before the audience like their own personal dilemma.
Acharya Prashant emphasized that today it is more important to speak about the ‘exploited’ than the ‘exploiter’: the individual who has unknowingly grown attached to his own chains. Referring to the Doomsday Clock, he warned how humanity seems determined to destroy, within just a few decades, a legacy shaped over billions of years of evolution.
The most intense and poignant moment of the dialogue came when the reference to Ibn Battuta and the human being’s eternal urge to explore was raised. Acharya Prashant remarked: the journey is not even worth beginning, because the traveller himself is not honest.
The audience remained deeply attentive throughout the session. The prolonged applause at the end reflected the profound impact of the dialogue.
The scene after the discussion was equally remarkable. While leaving, Acharya Prashant stopped at a bookstall where a large number of young readers gathered, eager for a conversation, an autograph, and a selfie. This evening at the IGNCA premises has become a distinct and memorable chapter in the history of the festival.
The videos of the dialogue will be shared soon.
@sachinsgaur सचिन, या तो तुम एकदम बुद्धिहीन हो, या चतुर बनने की नाकाम कोशिश में हो!
ओशो के विचार इंटरनेट पर हैं इसीलिए आचार्य प्रशांत को सुनने की बहुत जरूरत है,— ओशो ने अध्यात्म को सेक्स, कविता और अंधविश्वास की चाशनी में लपेट दिया है और तुम चाट रहे हो और आचार्य प्रशांत तुम्हारे नशे छुड़वा रहे हैं!
सचिन, आगे सुनो -
पुनर्जन्म, कुंडलिनी साँप जैसा उठना, चक्र, पिछले जन्मों की यादें (खुद दावा: तिब्बती मॉन्क थे, तीसरी आँख से खोपड़ी फटी) — सब literal फैक्ट की तरह पेश किए थे ओशो ने
1. पुनर्जन्म = बिना प्रमाण की कहानी
अनुभव कहकर मिथक को तथ्य बना देना।
2. कुंडलिनी = काल्पनिक ऊर्जा-सर्प
प्रतीक को शारीरिक सच्चाई की तरह बेचना।
3. चक्र = शरीर में अनदेखे पावर-सेंटर
जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं।
4. आभा/वाइब्रेशन = माप से परे दावे
नाप नहीं सकते, पर मानना होगा।
5. टेलीपैथी = मन पढ़ने का संकेत
परामनोविज्ञान को आध्यात्मिक संभावना कहना।
6. सिद्धियाँ = चमत्कार को ‘संभव’ छोड़ना
साफ़ इनकार नहीं, बस नैतिक चेतावनी।
7. गुरु-ऊर्जा = व्यक्तित्व को रहस्य बनाना
मनोवैज्ञानिक प्रभाव को अलौकिक रंग देना।
8. ध्यान = गुप्त आध्यात्मिक टेक्नोलॉजी
सामान्य मानसिक अभ्यास को रहस्यवादी पैकेजिंग।
9. “तर्क सीमित है” = आलोचना से बचाव
जब सवाल आए, तो बुद्धि को ही कटघरे में खड़ा कर दो।
10. ज्योतिष= "लीजिटिमेट साइंस", एनलाइटेंड मौत का समय चुन सकते हैं — प्स्यूडोसाइंस + सुपरस्टिशन।
दुनिया ओशो की तरफ क्यों आकर्षित होती है?
गोरों की भीड़, 93 रोल्स रॉयस, अमीरों का गुरु, लग्जरी कम्यून — राल टपकती है ऐसे शो-ऑफ पर। लेकिन असल वेदांत?
अब सचिन, सद्गुरु की सुन लो-
आज के युग में प्स्यूडोसाइंस और अंधविश्वास के सबसे बड़े प्रचारकों में एक ऊंचा नाम है बस!
ये आदमी हर सनातनी के मुँह पर थूक देता है ये बोलकर कि
"गीता उपनिषद क्यों पढ़ना है?
अपनी शरीर में सारा ज्ञान है!"
गुरु माने वो जो रौशनी दे
और जो रौशनी से दूर करे वो कौन हुआ फिर?
और ये परिभाषा स्वयं उपनिषद हमें देते हैं
भारतीयों की जिंदगी पर लानत है कि ऐसे आदमी के नाम के पीछे गुरु लिखा है
1. ग्रन्थ मत पढ़ना
2. मुर्दे को जिंदा कर दूंगा
3. पानी में मेमोरी है
4. ग्रहण में खाना जहर है, (कोई गोरा मरा आजतक?)
5. चुंबकीय क्षेत्र खून दिमाग में खींचता है
6. पैर इस दिशा में करके सोना
सूची बहुत लंबी है
ये कहता है कभी स्कूल नहीं गया, प्रमाण सामने है, और अनपढ़ सब ताली बजाते हैं!
समाज अगर ज़रा भी जगे हुए लोगों का होता, तो ऐसे आदमी की तस्वीर आचार्य प्रशांत के साथ रखने पर जेल हो जाती!
अब असली बात सुनो:
जिसे "सस्ती कॉपी" बोल रहे हो, वो घर-घर गीता पहुंचा रहा है आचार्य प्रशांत: सिंपल, सीधा, साफ वेदांत — बिना किसी मिलावट के।
कोई रोल्स रॉयस नहीं, कोई शो-ऑफ नहीं — सिर्फ तर्क, स्पष्टता और स्क्रिप्चर।
▪️आज 2 लाख+ लोग उनकी लाइव गीता सेशंस में रोज/रेगुलर जुड़ते हैं।
▪️कुल रीच: 10 करोड़+ लोगों के दिलों में — सोशल मीडिया पर 100M+ फॉलोअर्स, ऐप पर मिलियंस डाउनलोड्स।
▪️दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन गीता एग्जाम (वर्ल्ड रिकॉर्ड), 17 रूपों की गीता + 60+ उपनिषद पढ़ाते हैं। अंधविश्वास (पुनर्जन्म, कुंडलिनी, ज्योतिष) को सीधा काटते हैं।
ओशो/सद्गुरु की तरह कहानियाँ नहीं — "अभी, यहीं समझो, बदलो।" करोड़ों घरों तक शुद्ध वेदांत पहुंचा रहे हैं।
भाई, तुम जैसे लोग ओशो की लग्जरी और सद्गुरु की "मिस्टिक" स्टोरी पर राल टपकाते हो, लेकिन आचार्य प्रशांत जैसे सिंपल टीचर से चिढ़ते हो क्योंकि वो तुम्हारे अंदर के अहंकार और अंधभक्ति को बेनकाब करते हैं। सस्ती कॉपी नहीं, असली सुधार है।अगर हिम्मत है, तो खुद गीता पढ़ो, लाइव सेशन जॉइन करो। वरना बस ट्वीट करके लोगों को भ्रमित करो अपने echo chamber झूठ फैलाते रहो।
सुधर जाओ!
चच्चा, उठो! मूह धोलो। यह क्या बकवास कर रहे हो? अजीब बात है बिलकुल।
थोड़ा भी कोई पढ़ा-लिखा हो, समझता हो, सुनता हो तो साफ़ साफ़ बात समझ में आ ही जाएगी।
https://t.co/yqyPib2R4d
आचार्य जी क्या सिखाते है, उनकी केंद्रीय शिक्षा क्या है, इसमें मौजूद है। कोई यहाँ-वहाँ की, उलजुलूल बाते नहीं, न विधियां। सब कुछ बिलकुल साफ़ और सटीक।
और थोड़ी तमीज़ रखो यार ये कौनसे जोकर के साथ लगा दी उनकी फोटो?
तुझे समझ भी नहीं आयेगा, क्योंकि व्यक्ति जब लालच और स्वार्थ से दुनिया को देखता है तो उसे सच नज़र नहीं आता है
जिन रजनीश ने इतने अंधविश्वास फैलाएं उनको दार्शनिक कैसे कहूँ? वो एक प्रभावी वक्ता हो सकते हैं
पहले यह देख कि ओशो की बातों और विज्ञान में कितना मतभेद है:
पुनर्जन्म
ओशो:
तुम पहले भी कई बार जन्म ले चुके हो। ध्यान में पिछले जन्म याद आ सकते हैं।
विज्ञान:
पिछले जन्म का कोई सबूत नहीं है।
“पिछले जन्म की याद” ज़्यादातर दिमाग की कल्पना और स्मृति है।
2️⃣ कर्म का नियम
ओशो:
जो करोगे वही लौटेगा। ब्रह्मांड हर कर्म का हिसाब रखता है।
विज्ञान:
ऐसा कोई “कॉस्मिक अकाउंट सिस्टम” नहीं है।
हाँ, गलत काम करोगे तो समाज, कानून और मनोवैज्ञानिक असर से परिणाम मिल सकते हैं — पर कोई अदृश्य शक्ति हिसाब नहीं रखती है।
3️⃣ कुंडलिनी
ओशो:
रीढ़ में एक ऊर्जा सोई है। ध्यान से वह ऊपर उठती है और इंसान बदल जाता है।
विज्ञान:
रीढ़ में ऐसी कोई ऊर्जा नहीं है।
जो अनुभव लोग बताते हैं, उन्हें नर्वस सिस्टम की प्रतिक्रिया या भावनात्मक उत्तेजना है।
4️⃣ सात चक्र
ओशो:
शरीर में सात ऊर्जा केंद्र हैं। इनके खुलने से चेतना बढ़ती है।
विज्ञान:
ऐसे कोई ऊर्जा केंद्र शरीर में नहीं है।
5️⃣ ऑरा / वाइब्रेशन
ओशो:
हर इंसान की एक ऊर्जा-आभा होती है। कुछ लोगों की ऊर्जा अलग महसूस होती है।
विज्ञान:
ऐसी कोई “आभा” मापी नहीं है।
जो महसूस होता है, वह मनोवैज्ञानिक असर, व्यक्तित्व या माहौल का प्रभाव हो सकता है।
6️⃣ टेलीपैथी
ओशो:
गहरे ध्यान में बिना बोले भी समझ हो सकती है।
विज्ञान:
दिमाग से दिमाग सीधे बात करने का कोई सबूत नहीं।
लोग चेहरे, हावभाव और अंदाज़ से समझ लेते हैं — उसे टेलीपैथी नहीं कहते।
7️⃣ सिद्धियाँ
ओशो:
अलौकिक शक्तियाँ होती हैं
विज्ञान:
ऐसी शक्तियों का कोई प्रमाण नहीं।
8️⃣ गुरु की ऊर्जा
ओशो:
गुरु की मौजूदगी से अंदर बदलाव आ सकता है।
विज्ञान:
“ऊर्जा ट्रांसफर” का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं।
1984 Bioterror Attack
Members of Osho’s inner circle carried out the largest bioterror attack in U.S. history, contaminating salad bars with salmonella in The Dalles, Oregon.
👉 751 people fell ill.
Osho’s personal secretary Ma Anand Sheela and others were convicted and imprisoned.
How can this be possible that Osho was not aware, not involved, what kind of disciples he had raised? In that sense, was he even a TEACHER?
@sachinsgaur मुझे आज तक नहीं समझा कि तुम जैसे लोग अनपढ़ है या बुद्धी मूँगफली के बराबर की भी नहीं है| ओशो के पुनर्जन्म और मेडिटेशन पर अंधविश्वास फैलाने वाले विचार सालों से मौजूद है, रही बात आचार्य प्रशांत की तो उनका साफ़ और सटीक दर्शन उपलब्ध है, बस पढ़ने की नीयत चाहिए|
आचार्य प्रशांत पिछले कई वर्षों से निरंतर सार्वजनिक मंचों पर बोल रहे हैं। उनके हजारों वीडियो यूट्यूब पर उपलब्ध हैं, जिनमें उपनिषद, भगवद्गीता, बुद्ध, कबीर, वेदांत और समकालीन सामाजिक विषयों पर विस्तार से चर्चा है। हर विषय को वे मूल ग्रंथों के आधार पर समझाते हैं, संदर्भ स्पष्ट रखते हैं और तर्क के साथ बात करते हैं। आज तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिसमें यह दिखाया गया हो कि उन्होंने किसी व्यक्ति की सामग्री को ज्यों-का-त्यों अपनाया हो।
सिर्फ बोलना ही नहीं, उनका कार्य ज़मीन पर भी दिखाई देता है। पशु-अधिकार और शाकाहार के समर्थन में चलाए गए अभियानों के माध्यम से लाखों लोगों तक जागरूकता पहुँचाई गई है। सार्वजनिक रूप से साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, 10 लाख से अधिक पशुओं के जीवन की रक्षा से जुड़े अभियान चलाए गए हैं। इसी सामाजिक कार्य के लिए उन्हें PETA द्वारा सम्मानित भी किया गया है।
ओशो हों या कोई और, वे भी भारतीय दर्शन और वेदांत पर बोले हैं। पर आचार्य प्रशांत जितना स्पष्ट आज तक किसी ने नहीं बोला है और अगर तेरे जैसे लोग इसको कॉपी करना बोलते है तो ऐसा मान लिया जाए न फिर की उपनिषद पर बोलने वाला हर व्यक्ति एक-दूसरे की “कॉपी” कहलाएगा। पहले तथ्य को पढ़ ले जान ले कि आचार्य प्रशांत किस स्तर की बात करते है किस स्तर की दार्शनिक है फिर आके लिख।
ओशो व आचार्य प्रशांत में किसकी शिक्षाएं ज्यादा:
१.शुद्ध व तार्किक
२. मान्यतारहित
३. दार्शनिक धारदार हैं?
Chatgpt उत्तर: https://t.co/AH78MDMpne
Claude उत्तर: https://t.co/V3afkPvzWs
आखिरी प्रश्न: ओशो व आचार्य प्रशांत में सामाजिक रूप से ज़्यादा जिम्मेदार, व पृथ्वी व पर्यावरण के प्रति ज्यादा करुण हैं?
Chatgpt उत्तर: https://t.co/x5Yb6cjU6V
Claude उत्तर: https://t.co/4r79ABgMcf
यहाँ एक स्पष्ट, तर्कपूर्ण और तुलनात्मक जवाब है, जिससे साफ़ दिखता है कि आचार्य प्रशांत ओशो से “कॉपी” नहीं बल्कि मूलतः अलग हैं— विचार, पद्धति और उद्देश्य तीनों स्तरों पर:
आचार्य प्रशांत बनाम ओशो — वास्तविक अंतर
1️⃣ विचार की नींव
•ओशो: अनुभव-प्रधान, ध्यान, समाधि, व्यक्तिगत मुक्ति पर ज़ोर
•आचार्य प्रशांत: शास्त्र-आधारित विवेक — गीता, उपनिषद, वेदांत, बुद्ध + तर्क
👉 ओशो कहते हैं “अनुभव करो” 👉 आचार्य प्रशांत कहते हैं “पहले भ्रम समझो, फिर अनुभव बदलेगा”
2️⃣ बोलने की शैली
•ओशो: काव्यात्मक, रहस्यमयी, रूपक और कथाएँ
•आचार्य प्रशांत: सीधी, कठोर, तर्कपूर्ण, प्रश्नोत्तर शैली
👉 ओशो बहाव में ले जाते हैं 👉 आचार्य प्रशांत दिमाग़ जगाते हैं
3️⃣ अनुशासन और जीवन
•ओशो: सामाजिक नियमों से दूरी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर ज़ोर
•आचार्य प्रशांत: ज़िम्मेदारी, नैतिक स्पष्टता, कर्म और चुनाव की बात
👉 ओशो कहते हैं “समाज झूठा है” 👉 आचार्य प्रशांत कहते हैं “झूठ समझकर समाज में सही कर्म करो”
4️⃣ आधुनिक संदर्भ
•ओशो: 20वीं सदी की मानसिकता, सीमित सामाजिक विश्लेषण
•आचार्य प्रशांत: उपभोक्तावाद, रिलेशनशिप्स, करियर, जलवायु संकट, राजनीति तक पर स्पष्ट स्टैंड
👉 आचार्य प्रशांत आज के इंसान की उलझनों पर सीधे बात करते हैं
5️⃣ गुरु-शिष्य ढांचा
•ओशो: करिश्माई गुरु, शिष्य-केन्द्रित व्यवस्था
•आचार्य प्रशांत: व्यक्ति नहीं, सत्य केन्द्र में — प्रश्न पूछना अनिवार्य
👉 आचार्य प्रशांत खुद कहते हैं: “मुझे नहीं, बात को पकड़ो।”
6️⃣ मुक्ति का मार्ग
•ओशो: ध्यान और जागरूकता
•आचार्य प्रशांत: विवेक + ज्ञान + कर्म की शुद्धि
👉 आचार्य प्रशांत का फोकस स्थायी स्पष्टता पर है, क्षणिक अनुभव पर नहीं
निष्कर्ष (Perfect Closing Line)
“ओशो अनुभव का आमंत्रण हैं, आचार्य प्रशांत भ्रम का खंडन। एक बहाव है, दूसरा बोध। दोनों अलग हैं — तुलना ही गलत है।”
https://t.co/6rAGQdYbag
यह विडियो देखो और समझ आयेगा क्यों ओशो लोगों को पसंद आते हैं और आचार्य प्रशांत से नफ़रत की जाती है
ओशो कह रहे हैं:
तुम जैसे हो ऐसे ही रहो
नाली में पड़े हो तो वहीं पड़े रहो, परमात्मा ने वैसे ही बनाया है।
आचार्य जी संघर्ष करना सिखाते हैं, नाली में पड़े रहना नहीं।
अब जो नाली के कीड़े हैं उनको तो आचार्य जी कैसे अच्छे लगेंगे।
AP Framework: https://t.co/B7LETNh3Hh
ओशो: controlled commune, filtered audience, managed narrative। आज भी उनके followers controversies को downplay करते हैं wider audience के लिए। (Acharya Prashant)
AP: 69 million subscribers, YouTube पर live, IITs में debate, India के सबसे polarised cultural debates में — सब कुछ record पर, permanently। (Acharya Prashant)
ओशो ने दर्शन commune की दीवारों के अंदर किया। AP युद्धभूमि में करते हैं — बिना दीवार, बिना filter, बिना escape।