डिमरी भाई तूझे इनसे रिश्तेदारी जोड़नी हो तो बेशक जोड़ो लेकिन ये हाथ जोड़कर अपील करने वाला चुतियापा मत करो, बाहर से आए लोग तुम्हारे मुंह पे मूत के जा रहे पर्यटक के नाम पर, पुलिस प्रशाशन सब उनका साथ दे रहा ...
माना तुम डोमिनोज, स्विगी, जोमेटो, ब्लिंकिट की तरह पिज्जा-बर्गर लेके दो मिनट में नही पहुंच सकते लेकिन भेंचौदो आग बुझाने के नाम पर कम से कम दस मिनट में तो पहुंच सकते हो, तुम्हारी लापरवाही के कारण हादसों को कांड में बदलते देर नही लगती ...
अब पोलिटिकल inclination भी नहीं रहा.. सब एक जैसे है.. सिस्टम मे अयोग्य बैठे है, corrupt बैठे है.
आग लग रही है, पुल गिरते है, सड़कों पर गड्ढे की वज़ह से लोग मर रहे है.. सब भ्रष्टाचार और अक्षमता का परिणाम है
देश हिन्दू मुस्लिम से नहीं चलेगा..
धीरे धीरे सम्मोहन खत्म हो रहा है..
पदोन्नति में आरक्षण एक ऐसी व्यवस्था बन गई है जिसमें सवर्ण के हितों की लगातार उपेक्षा होती है। नौकरी में प्रवेश के समय आरक्षण का लाभ मिलने के बाद भी पदोन्नति में पुनः आरक्षण दिया जाना समान अवसर के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े करता है।
पिछले तीन चार अग्निकांडों में एक खतरनाक समानता दिखी है—आग लगने के दौरान बिजली गुल हुई, इलेक्ट्रॉनिक डोर के लॉक काम करना बंद कर गए और लोग अंदर फंस गए। लखनऊ की तरह दिल्ली में भी इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट लॉक लगे हुए थे। आग की वजह से बिजली गुल होने के कारण ये लॉक जाम हो गए और लोग मारे गए
क्या प्रशासन केवल वीआईपी कार्यक्रमों, स्वागत-सत्कार और प्रोटोकॉल निभाने के लिए बना है, या आम नागरिकों की सुरक्षा भी उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है?
हर दुर्घटना के बाद जांच, मुआवज़े और आश्वासनों का वही पुराना क्रम शुरू हो जाता है, लेकिन कमियों पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती है।
स्वयं के स्वास्थ्य, स्वयं की प्रगति और स्वयं के सुख/खुशियों पर ध्यान दो..बाकी सिस्टम तुम्हारे हितों के लिए नहीं है..
वो सिर्फ वोट बटोरने की सोच के लिए काम करता है..
इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े आक्रांता भी पहाड़ के स्वाभिमान को डिगा नहीं पाए। आज हमारे समाज पर टिप्पणी करने वालों को सबक सिखाना ज़रूरी है। @uttarakhandcops तुरंत एक्शन ले। हमारी संस्कृति और इतिहास से खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं है। सख्त कार्रवाई हो।
मोदी की तारीफ में आज भी कसीदे पढ़ने वाला हर इंसान मानसिक रूप से मोदी का गुलाम बन चुका है, वो दिमागी रूप से बीमार है, उसके साथ सहानुभूति से पेश आना चाहिये सब को। इनका अपना कोई जमीर नहीं, कोई हैसियत नहीं, ना खुद का दिमाग, बुद्धि को इस्तेमाल करना ही छोड़ चुके हैं ये लोग सब के सब। 🤧