अरुण जेटली को गए सात साल हो गये. कोई दिन ऐसा नहीं गया जब किसी ना किसी वजह से उनका ज़िक्र ना हुआ हो. मैंने अरुण जो को छात्र नेता के रूप में देखा, वकालत करते देखा, राजनीति में देखा. जहाँ भी रहे शिखर पर पहुँचे. देश के लिए अलग अलग क्षेत्रों में उनका योगदान अतुलनीय है. अरुण जी अपने पीछे ऐसी खाली जगह छोड़ गये जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा.
#RememberingArunJaitley
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आज पूज्य संतों-महात्माओं की उपस्थिति में झूला उत्सव
Jhula Utsav celebrated today at the Shri Ram Janmabhoomi Mandir in the presence of revered saints.
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र निर्माण और अंत्योदय के लिए समर्पित कर दिया। आज राजस्थान के निम्बाहेड़ा में अटल जी की पुण्यतिथि पर उनकी 21 फीट ऊँची भव्य प्रतिमा का अनावरण किया।
अटल जी ने सुशासन, विकास और राष्ट्रप्रथम की राजनीति की जो नींव रखी, उनकी यह प्रतिमा युवाओं को उन्हीं आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करेगी।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्रीरामलला सरकार सहित चारों भाईयों के उत्सव विग्रहों की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। उत्सव विग्रहों ने पालकी में विराजमान होकर मंदिर परिसर स्थित सभी देवालयों की परिक्रमा की। भक्तिमय वातावरण में संपूर्ण परिसर श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान रहा।
The Utsav Vigrahas of Bhagwan Shri Ram and His four brothers were taken out in a grand Palki Yatra at Shri Ram Janmabhoomi Mandir. Seated in the Palki, the deities performed a parikrama of all the temples within the Mandir complex amid an atmosphere filled with devotion.
“स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए गौरव का और उत्सव का विषय़ है। 1857 से गिनेंगे तो लगातार 90 वर्ष अनेक प्रकार का त्याग बलिदान देकर हमारे पूर्वजों ने स्वातंत्र्य की प्राप्ति की। उस त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है। लेकिन इसके साथ एक भान मन में चाहिए, कि इतना त्याग-परिश्रम करके स्वतंत्रता हमको मिली है, उस स्वतंत्रता को कायम रखना और जैसा सावरकर जी ने कहा है - "जे जे उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर ते ते। स्वतंत्रते भगवती, सर्व तव सहचारी होते" -- तो स्वतंत्रता का परिणाम जो-जो उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर है, वह सब कुछ हमारे देश में अवतीर्ण हो। इसकी आवश्यकता पूर्ण करने का दायित्व भी हमारा बनता है।” - डा. मोहन भागवत जी
श्रावण शुक्ल तृतीया (तीज पर्व) के पावन अवसर पर प्रकृति की अनुपम हरितिमा से अलंकृत श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर परिसर की मनोहारी छटा तथा गर्भगृह में विराजमान प्रभु श्रीरामलला सरकार के मंगलमय, अलौकिक एवं दिव्य दर्शन
On the sacred occasion of Shravana Shukla Tritiya (Teej Parva), the enchanting Shri Ram Janmabhoomi Mandir complex, adorned with the verdant splendour of nature, and the auspicious, sublime and divine darshan of Prabhu Shri Ramlalla Sarkar, enshrined in the sanctum sanctorum.
कल दारेसलाम-टांझानिया पूर्व अफ्रिका में नवीनीकृत सनातन मंदिर के विभिन्न प्रकल्पों का उद्घाटन किया । महादेव जी का अभिषेक पूजन एवम् बाल संस्कार केन्द्र की प्रवृत्ति का निरीक्षण किया। यहाँ पिछले तीन वर्षों से सांदीपनि के ३ ऋत्विजों के द्वारा पूजन अर्चन और धार्मिक मार्गदर्शन हो रहा है। सत्संग बालसंस्कार सभी प्रवृत्तियों में वृद्धि हुई है। जनता की उपस्थिति बढ़ी है। उसका आनंद है।
भारत का विभाजन इतिहास की ऐसी त्रासदी थी, जिसने लाखों लोगों को विस्थापन, हिंसा और अपनों से बिछड़ने का दर्द दिया।
परिवार टूटे, घर उजड़े और अनगिनत लोगों ने अपनी जमीन-जायदाद और जीवन भर की जमा-पूंजी छोड़कर सीमा पार की।
“विभाजन की विभीषिका” इसी दर्दनाक दौर को सामने लाने का प्रयास है, इसमें विभाजन के समय की घटनाओं, उसके पीछे की राजनीतिक पृष्ठभूमि और उन सवालों को सामने रखा गया है, जो आज भी इतिहास को लेकर चर्चा का विषय हैं।
विभाजन आखिर क्यों हुआ? भारत के टुकड़े होने की परिस्थितियां कैसे बनीं? लाखों लोगों को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा? और क्या इस त्रासदी को आने वाली पीढ़ियों तक सही रूप में पहुंचाया गया? देखिए “विभाजन की विभीषिका” में।
1947 में हुआ विभाजन अचानक हुई घटना नहीं थी।
1905 के बंगाल विभाजन में उसकी मूल पृष्ठभूमि हमें दिखाई देती है।
लियाकत अली, मोहम्मद अली और सर सैयद अहमद ख़ान जैसे तथाकथित विद्वानों द्वारा ‘टू-नेशन थ्योरी’ का प्रतिपादन 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी के आरंभ के बीच किया गया।”
: श्री मुकुल कानिटकर, वरिष्ठ प्रचारक, RSS
#SushasanSamvadRajasthan
श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में स्थायी रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था का शुभारंभ हो चुका है।
स्वर्णिम प्रभा से आलोकित मंदिर का उत्तुंग शिखर और दूर-दूर तक विस्तृत भव्य परिसर मानो दिव्यता का साकार रूप धारण कर श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभूति से अभिभूत कर देता है। रात्रि की नीरवता में ज्योतिर्मय श्रीराम मंदिर की अनुपम छटा श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक वैभव का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करती है।
The permanent architectural night illumination of the Shri Ram Janmabhoomi Mandir has now been inaugurated.
Bathed in a radiant golden glow, the Mandir’s soaring shikhara and its expansive, majestic precincts seem to embody divinity itself, leaving devotees immersed in a profound spiritual experience. In the stillness of the night, the resplendent Shri Ram Mandir presents a breathtaking spectacle, a harmonious confluence of faith, devotion, and timeless spiritual grandeur.
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ज्ञान, संस्कार, विवेक और मानवता की प्रेरणा देने वाले सभी गुरुजनों को शत्-शत् नमन एवं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।