फिल्मी समाज का आईना होती है लेकिन कभी-कभी वह भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में भी बता देती है। अमृतकाल ने विश्व में भारत की छवि कैसी बना दी है जरूर देखे 👇
आज मेरे घर में चीनी खत्म हो गई थी सोचा, बाहर जाने से अच्छा है Blinkit से ऑर्डर कर दूँ।
मोबाइल उठाया, double क्लिक किए, और स्क्रीन पर दिखा....
10 मिनट में डिलीवरी।
मन में सुकून आ गया। अपने काम में लग गई।
लेकिन आज के वो 10 मिनट
हम सब अब इसी के आदी हो गए हैं। एक बटन दबाया,
और मान लिया अब सामने वाला इंसान नहीं,एक मशीन काम करेगी।
समय पर आए तो ठीक,और अगर दो-चार मिनट भी देर हो जाए
तो गुस्सा, शिकायत, या ऑर्डर कैंसल। आज भी दरवाज़े पर दस्तक हुई
लेकिन समय से थोड़ी देर बाद।
दरवाज़ा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था।
उम्र बहुत ज़्यादा नहीं,
लेकिन चेहरे पर ज़िम्मेदारियों की शिकन थीं।
उसकी साँसें तेज़ थीं, हाथ हल्के काँप रहे थे, और आँखें
जैसे बहुत कुछ कहना चाह रही हों।
मैंने सामान लिया। लेकिन जाने क्यों मुँह से बस एक ही सवाल निकला
सब कुछ ठीक है?
आप बहुत परेशान लग रहे हो
बस यहीं उसका सब्र टूट गया।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। बिना आवाज़ के।
जैसे किसी ने सालों से
रोने की इजाज़त ही नहीं दी हो। थोड़ी देर बाद बोला मैम
आज तक किसी ने ये नहीं पूछा।
लेट होने पर लोग सिर्फ गुस्सा करते हैं।
कभी सामान लौटा देते हैं,
कभी ऑर्डर कैंसल।
वो रुक गया।
साँस संभाली।
फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोला
मेरी पत्नी हॉस्पिटल में है।
अभी उसकी डिलीवरी है।
फोन आ रहा है
जल्दी आ जाओ
उस पल जैसे समय थम गया।
मेरे सामने कोई डिलीवरी बॉय नहीं खड़ा था।
मेरे सामने एक पति था
जो पिता बनने वाला था।
उसने आगे कहा
रास्ते में ही हॉस्पिटल पड़ता है। सोचा एक बार देख आऊँ।
बस एक पल लेकिन उसी पल में देर हो गई।
वो शर्मिंदा था।
जैसे उसने कोई गुनाह कर दिया हो।
लेकिन सच्चाई ये थी वो गुनहगार नहीं,
मजबूर था।
एक तरफ उसकी पत्नी दर्द से जूझ रही थी। दूसरी तरफ काम
जिससे घर चलता है।
अगर वो ड्यूटी छोड़ देता
तो शायद नौकरी चली जाती। और अगर देर करता
तो लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता।
आज वो बीच में फँसा था परिवार और पेट के बीच।
मैं पूरी तरह निशब्द थी। आँखें भर आईं।
दिल भारी हो गया।
हम जिन 10 मिनट के लिए लड़ते हैं, चिल्लाते हैं,
कभी-कभी वही किसी की ज़िंदगी के
सबसे अनमोल पलों को छीन लेते हैं।
आज मैंने एक बात समझी हर देर लापरवाही नहीं होती।
हर इंसान लापरवाह नहीं होता। कुछ लोग चुपचाप
अपनी खुशियाँ अपने आँसू और अपने सपने
दूसरों की सुविधाओं के लिए कुर्बान कर रहे होते हैं।
हम कमरे में बैठकर समय गिनते हैं। और कोई सड़क पर
अपनी ज़िंदगी समेटे भाग रहा होता है।
एक छोटी-सी अपील
अगली बार अगर कोई थोड़ा देर से आए तो गुस्सा करने से पहले
बस एक बार पूछ लीजिए
सब ठीक है?
हो सकता है सामने खड़ा इंसान किसी का पति हो,
किसी का पिता हो, या किसी का बेटा
जो अपनी ज़िम्मेदारियों के नीचे दबा
बस थोड़ी सी इंसानियत चाहता हो।
क्योंकि हम ग्राहक हैं ,लेकिन वो भी इंसान हैं।
इंसान पहले।
सुविधा बाद में।
~ credit : Surbhi Choubey
अडानी और अंबानी को बस भगवान घोषित करना बाक़ी रह गया है। किसी अदालत या सरकार को यह शुभ काम भी कर देना चाहिए।
दिल्ली की एक अदालत के आदेश के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय और यूट्यूब ने कई पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को फरमान भेजा है कि अडानी से जुड़े सारे वीडियो हटा दें।
जिन्हें नोटिस दिया गया है, उनमें द वायर, न्यूजलॉन्ड्री, रवीश कुमार, अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा, ध्रुव राठी, आकाश बनर्जी, प्रज्ञा जैसे प्रमुख चैनल और पत्रकार हैं। अगर इन्होंने खुद से वीडियो डिलीट नहीं किया तो यूट्यूब खुद डिलीट कर देगा।
क्या अब इस देश में अडानी का नाम लेना या उनपर लगे आरोपों की चर्चा करना गुनाह हो गया है? क्या जिसके लिए आदेश पारित किया जा रहा है, अदालत ने उसका पक्ष जानना जरूरी नहीं समझा? न कोई नोटिस, न किसी को तलब किया, न किसी को सुना, बस फैसला सुना दिया।
जिस अडानी पर भारत के अलावा, दुनिया भर में भ्रष्टाचार के आरोप हैं, सरकार और अदालतें उनकी आलोचना पर भी प्रतिबंध लगा रही हैं। यहां लोकतंत्र है या स्थायी आपातकाल लागू किया जा चुका है?
This will blow your mind 🚨
Bihar Govt has given 1020 acres of land in Bhagalpur to Adani for only ₹1 per year for 30 years 🤯
They will also cut 10 lakh mango trees, can you imagine that?
This is not just loot, this is CRIMINAL
Indian media defend the Modi government way better than BJP and RSS workers.
Modi has kept them in control since 2014 but now Indian media have lost their credibility and it is not benefiting the Modi govt as much as it used to do.
— Journalist Aadesh Rawal