ना जाने हमारे शायरियों को कैसा हुनर आता है ,
रात होती ही आँखों में उतर जाता है
उसके ख्याल से निकल कर कहां जाउं
वो मेरी सोच के हर रास्ते पर नज़र आता है ।।
हमारी
सुबहा तुमसे है
हमारी शाम तुमसे है
हमें
महबूब लगती है
वो हर इक बात
तुमसे है
जहां में जो भी दिलकश है
वो सौगात तुमसे है
बड़ा तुमसे कोई तोहफा
हमें नहीं लगता
हम क्या करें
शुभ संध्या __✨🧡✨
#Bk#सरस#पहल
मेरे लिए इतिहास
केवल हमारे पूर्वजन्म रहे
और भूगोल
तुम्हारे घर से मेरी दूरीयाँ
मैंने प्रेम की कक्षा में
गणित के सवालों के हल कभी नहीं खोजे
मेरे मन के कम्पास का नॉर्थ
आज भी
तुम हो...
#बज़्म#शुभ_संध्या 💐☕
आँखों में कई ख्वाब,
दिल में कई हसरतें बाकी हैं,
मैं कैसे थक जाऊं...
अभी कई मंजिले बाकी हैं,
कहाँ कुछ आसान है
राह में कई मुश्किलें बाकी हैं,
कैसे छोड़ दूँ अधूरा ये सफ़र मेरी कहानी के अभी कई पन्ने बाकी है।।
कभी लफ्ज़ भूल जाऊं..!!
कभी बात भूल जाऊं..!!
तुझे इस कदर चाहूं कि..!!
अपनी ज़ात भूल जाऊं..!!
कैसे कहे तुम्हे कि कितना चाहा है तुम्हे ..!! अगर कहने पे आऊं तो अल्फाज़ भूल जाऊं..!!