A COCKROACH from Bihar
हम नहीं डरते है, आप कोई भी हो। आप दारोगा हो , एसपी हो , डीसीपी हो - विद्यालय में भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे। FIR कीजिए 3 महीने 6 महीने 1 साल 10 साल 21 साल के हुए है 41 साल में जेल से निकलेंगे लेकिन जाएंगे बच्चों के खातिर जेल।
Full Version of Anthem...
"COCKROACH JANTA PARTY"
We Come Together Fight Together Rise Together DIE Together we are Cockroach we will hunt down Corruption together...
देश को लूटना बन्द करो अम्बानी... 😡
हर महीने मेरे घर से टेलीकॉम कंपनियों को हजारों रुपये जाते हैं।
5 मोबाइल का रिचार्ज – ₹352 प्रति मोबाइल
यानी लगभग ₹1760 हर महीने।
ऊपर से Jio AirFiber – ₹706 प्रति माह।
कुल मिलाकर लगभग ₹2500 हर महीने देने के बाद भी हाल यह है कि नेटवर्क इतना घटिया कि ठीक से कॉल भी नहीं होती और इंटरनेट बार-बार गायब हो जाता है।
आखिर ये कैसी डिजिटल क्रांति है?
जब पैसे पूरे लिए जाते हैं तो सर्विस आधी क्यों दी जाती है?
टेलीकॉम कंपनियाँ करोड़ों का मुनाफा कमाती हैं, बड़े-बड़े विज्ञापन करती हैं, लेकिन ग्राउंड पर नेटवर्क की हालत बदतर है।
अगर उपभोक्ता पूरा पैसा दे रहा है तो उसे पूरी सेवा भी मिलनी चाहिए।
अब समय आ गया है कि
टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय हो।
आपको भी समस्या है नेटवर्क कि तो साथियों मज़बूती से आवाज उठाओ और कमेंट्स में विरोध दर्ज करें।
@JioCare@reliancejio@airtelindia@Airtel_Presence
#NetworkProblem #TelecomCompanies #ConsumerRights
सवाल सीधा है जब सिम लाइफटाइम थी तो हर महीने रिचार्ज अनिवार्य क्यों?
महंगे प्लान कमजोर नेटवर्क और जबरदस्ती डेटा पैक क्या ग्राहक सिर्फ कमाई का जरिया है?
जवाब तो बनता है।
टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर बड़े सवाल ❗👇 जरूर पढ़ें
एक समय था जब ग्राहकों को लाइफटाइम वैलिडिटी का सपना दिखाकर सिम बेची गई कहा गया कि एक बार सिम ले लो नंबर आपका जीवनभर चलेगा। लाखों-करोड़ों लोगों ने भरोसा किया कनेक्शन लिए और कंपनियों ने इसी भरोसे के दम पर बाजार खड़ा कर लिया।
लेकिन आज वही ग्राहक पूछ रहा है
अगर सिम लाइफटाइम थी तो हर महीने रिचार्ज अनिवार्य क्यों कर दिया गया?
नंबर एक्टिव रखने के लिए अलग से वैलिडिटी प्लान क्यों लेना पड़ रहा है?
क्या लाइफटाइम सिर्फ एक मार्केटिंग प्लान का हिस्सा था?
अब स्थिति यह है कि रिचार्ज लगातार महंगे होते जा रहे हैं। 5G का नाम लेकर प्रीमियम प्लान बेचे जा रहे हैं लेकिन ज्यादातर इलाकों खासकर गांव और छोटे शहरों में नेटवर्क की हालत बेहद कमजोर है।
कॉल ड्रॉप आम बात है इंटरनेट स्पीड अस्थिर है और ग्राहक शिकायत करे तो समाधान में कई दिन लग जाते हैं ग्राहक बढ रहे हे तो व्यवस्थाओं में सुधार क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो ग्राहक केवल कॉलिंग के लिए सिम रखना चाहता है उससे डेटा के पैसे क्यों वसूले जा रहे हैं?
क्यों हर प्लान में जबरदस्ती डेटा जोड़ा जा रहा है?
OTT Hotstar और अन्य प्लेटफॉर्म्स के सब्सक्रिप्शन के नाम पर रिचार्ज का दाम बढ़ा दिया जाता है जबकि 80–90% लोग इन सेवाओं का उपयोग ही नहीं करते।
अगर किसी को सिर्फ कॉलिंग चाहिए तो उसे सीधा और सस्ता प्लान क्यों नहीं मिलता?
ग्राहक पैसे दे रहा है
पूरा भुगतान समय पर कर रहा है
लेकिन बदले में क्या उसे स्थिर नेटवर्क साफ कॉलिंग और भरोसेमंद सर्विस मिल रही है?
आज जरूरत है पारदर्शिता की।
जरूरत है साफ जवाब की।
जरूरत है ऐसे प्लान की जो ग्राहक की जरूरत के अनुसार हों न कि सिर्फ कंपनियों के मुनाफे के अनुसार हो।
टेलीकॉम कंपनियों से सीधा सवाल है
लाइफटाइम सिम का वादा क्यों बदला गया?
महंगे रिचार्ज के बाद भी कमजोर सर्विस क्यों?
और ग्राहकों को उनकी जरूरत के मुताबिक सस्ता सरल विकल्प क्यों नहीं दिया जाता?
जब मोबाइल आज जीवन की बुनियादी जरूरत बन चुका है तो रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग बंद क्यों? क्या कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे भरोसे को बनाए रखें?
अब जवाब देने का समय कंपनियों का है।
इस पर आपकी राय क्या हे कमेंट बॉक्स में जरूर दे।
फोटो AI जनरेटेड हे सामान्य ज्ञान के लिए बनाया हे।
जब **Virat Kohli** ने कहा,
> *“At this stage of life, peace matters more than noise.”*
बस यहीं से तमाशा शुरू हो गया।
कुछ बोले—
“अब motivation खत्म हो गई है।”
कुछ ने कहा—
“Form का pressure है।”
और कुछ तो यहाँ तक लिख बैठे—
“Retirement का hint है।”
लेकिन किसी ने ये नहीं सोचा
कि शायद पहली बार
एक सुपरस्टार ने **भीड़ को खुश करने से ज़्यादा
खुद को समझने की बात की है।**
हम ऐसे दौर में जी रहे हैं
जहाँ celebrity अगर चुप हो जाए
तो लोग reason खोजते हैं,
और अगर बोले
तो hidden meaning।
असल बात ये है—
दुनिया को gossip में interest है,
सच में नहीं।
हमें ये जानना ज़्यादा पसंद है
कि *उन्होंने ऐसा क्यों कहा*
बजाय ये समझने के
कि *वो इंसान भी थक सकता है*।
आज celebrity की एक line
breaking news बन जाती है,
लेकिन उनके पीछे का इंसान
हमेशा ignore हो जाता है।
शायद problem उनके words में नहीं,
हमारी expectations में है |
This is what professionalism looks like.
When selection doesn’t go your way, you don’t sulk—you go back to the grind.
Playing Ranji, scoring runs, staying hungry.
Hats off to KL Rahul.
As Virender Sehwag said—youngsters should learn this attitude, not excuses.
🚨 MASSIVE STATEMENT BY VIRENDRA SEHWAG ON KL RAHUL 🚨
You look at KL Rahul, he is not in the T20 World Cup team, then he could have gone somewhere and spent his holidays, but he is playing Ranji Trophy and also scoring hundreds, young players should learn from KL Rahul.
Statements are easy, consistency is hard.
When politics speaks louder than planning, institutions lose credibility.
Cricket deserves professionalism, not mixed signals for headlines or leverage.
Respect the game first.