@grafidon बात तो सही है लेकिन इस आतंकवाद का इलाज कुछ भी नहीं है,
छोटे आतंकवादी को इसलिए मारा जा सकता है क्योंकि उससे बड़ी शक्तियां मौजूद होती है,
लेकिन अमेरिकन आतंकवाद को खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि उससे बड़ा शक्तिशाली कोई भी नहीं है।
@khurpenchh चूतिये ये आंसू घड़ियाली हो सकते हैं,
क्या वो खून भी घड़ियाली था, जो उन आतंकियों का विरोध करते बहा था, और मारा गया।
चाहता तो कलमा पढ़कर चुपचाप निकल जाता वहां से।
@GaneshLalGanes3@epanchjanya जहाँ हर जीव में दिखे
स्वयं का अंश,
और हर अंश में
दिखे ईश्वर, अल्लाह, गॉड—
या जो भी नाम तुम देना चाहो।
एक ऐसा पाठ्यक्रम
जो अनिवार्य हो—
हर उम्र, हर जाति, हर धर्म के लिए।
क्योंकि प्रेम ही धर्म है।
बाक़ी सब विषय, विषयान्तर है।
@GaneshLalGanes3@epanchjanya "धर्म पूछा जाति नहीं"
सब को बता रहे हैं क्या पूछा, क्या नहीं,
बिना जानने देना, कि पूछा क्यों?
क्या पूछना सिखाया जाता है?
और यदि हां, तो ये शिक्षालय चल क्यों रहे हैं?
कुछ को सिखाया जाता है—
धर्म पूछो,
कुछ को—जाति।
जैसे जन्म से पहले ही
खांचे तय हो जाते हों।
@GaneshLalGanes3@epanchjanya क्या इन पाठ्यक्रमों को
बंद किया जा सकता है?
और लागू हो
एक नई शिक्षा,
हर स्कूल, हर घर, हर मन में—
प्रेम की शिक्षा।
प्रेम सबसे,
मतलब सबसे—
पेड़ से लेकर पशु तक,
मानव से लेकर उस नीरव आकाश तक।
कुछ को धर्म पूछने की शिक्षा दी जाती है,
कुछ को जाति पूछने की।
क्या ये शिक्षाएं बंद हो कर,
प्रेम करने की शिक्षा लागू की जा सकती है?
सबके लिए, अनिवार्य।
प्रेम सबसे, मतलब सबसे।
पेड़, पौधे, सब जीव,
हर किसी में स्वयं को,
और उस ईश्वर को, अल्लाह को, गॉड को,
सब में देखने की शिक्षा।
@NadeemHere_ @JangBah02098566 अल्लाह का इस्लाम किसी किताब से नहीं चलता,
वह तो सनातन है, परिवर्तन को चाहने वाला है
आपको लग रहा है कि दोनों एक है,
मुल्लाह का इस्लाम किसी किताब को मानता है,
उसे बदल नहीं सकता,
उसके लिए किसी का गला भी काट सकता है
लेकिन अल्लाह का इस्लाम बदलाव की इजाजत देता है, तर्क की इजाजत देता है
@khurpenchh ट्वीट तो तुम्हारे भी कुछ कुछ ऐसे ही होते हैं,
बागीपन वाले,
समाज की बुराइयों के खिलाफ,
ढर्रों के खिलाफ,
अब चाहे मानो या न मानो,
हो तो तुम भी ओशो टाइप के किसी दार्शनिक का ही फेस वाश वाला रूप।
😜😜😜😜
@HansrajMeena अरे भाई तुम समझते नहीं हो क्या?
अगर बच्चे पढ़ लिख गए, तो सरकार से सवाल करेंगे।
और यदि पढ़ें लिखे बच्चे अनपढ़ नेताओं से सवाल करेंगे, तो बेचारे जवाब कैसे दे पाएंगे।