@DefenceMinIndia जिनके पास ज्ञान है उनकी इस देश में कोई जरूरत नहीं है वह तो केवल टैक्स देने के लिए है। आरक्षण शिक्षा तक तो सही था, लेकिन जब आरक्षण नौकरियों में होगा तो नुकसान सिर्फ देश को होगा। क्या उम्मीद करते हैं -40 नंबर लाने वाले आपको जेट इंजन बना कर देंगे।
जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करना है, ये ज़िद क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि संस्थानों को क्रिपल करने के लिए इतने नज़दीक प्रदर्शन नहीं कर सकते, रामलीला मैदान जाइए, वहाँ प्रदर्शन कीजिए।
किसी की डेमोक्रेटिक वॉइस स्टिफल नहीं हुई है, सबका राइट है, जाकर प्रोटेस्ट करिए।
समाज को जातिवाद की आग में झोंकना किस पुस्तक में राष्ट्रवाद या हिन्दुत्ववाद माना गया है? ‘जब आएगा, तब देखा जाएगा’ का क्या अर्थ है? आकाश से उतरेगा क्या विकल्प? विकल्प वही बनाएँगे जो प्रताड़ित हैं।
आपको अपने ही पोस्ट के कमेंट पढ़ने चाहिए। आपको भाजपा ही विकल्प दिखता है, बहुत अच्छी बात है, पर आपको कम से कम राष्ट्रवाद के चूरन का ब्रांड एंबेस्डर नहीं बनना चाहिए। वो एक्सपायर हो चुका है।
ये वो महाजन कमिशन रिपोर्ट है, जिसको भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में दाखिल किया, आरक्षण 73% करने के लिए!
और लिखित दिया कि रिपोर्ट को ज़रूर संज्ञान में लिया जाए!
इसी रिपोर्ट में श्रीराम को जातिवादी बताया गया है!
ये है इनका हिन्दुत्व?
#BJPAgainstGC
UGC में जो रिफॉर्म आप ले कर आए उसका आभार। आरक्षण रिफॉर्म पर आपके विचार देख चुके हैं हम। पैंतरे पुराने हैं, नहीं चलेंगे। देश को कॉन्ग्रेस के चूतियापों से कोई मतलब नहीं। सत्ता में तुम हो, तुम बताओ कि तुम क्या कर रहे हो जनता के विषयों पर। समाज में जाति का विष घोलना बंद करो।
𝗡𝗖𝗘𝗥𝗧’𝘀 𝗦𝗵𝗮𝗺𝗲𝗳𝘂𝗹 𝗗𝗼𝘂𝗯𝗹𝗲 𝗦𝘁𝗮𝗻𝗱𝗮𝗿𝗱:
𝗕𝗵𝗮𝗸𝘁𝗶 𝗜𝘀 𝗜𝗻𝗰𝗹𝘂𝘀𝗶𝘃𝗲 𝗶𝗻 𝗖𝗹𝗮𝘀𝘀 7, 𝗯𝘂𝘁 “𝗔𝗻𝘁𝗶-𝗕𝗿𝗮𝗵𝗺𝗶𝗻” 𝗶𝗻 𝗖𝗹𝗮𝘀𝘀 12
NCERT has produced a shocking and intellectually embarrassing contradiction in its treatment of the Alvars and Nayanars.
In Class 7, children are told that Bhakti spread "among all layers of society," emerged from "diverse social backgrounds," and was "open to everyone-cutting across gender and social divisions." (page 87-88, NCERT Social Science Text Book for Class 7)
Five years later, the same NCERT presents the very same Alvar–Nayanar tradition as a "movement of protest against the caste system and the dominance of Brahmanas." (page 144, NCERT History Text Book for class 12, Themes in Indian History Part 2)
The absurdity becomes even greater because NCERT’s own Class 12 textbook admits that these Bhaktas came from Brahmanas, artisans, cultivators and communities regarded as "untouchable."
So even its own evidence demolishes the crude Brahmin-versus-non-Brahmin narrative.
If this is the standard of historical scholarship expected from NCERT, the problem is not with the Alvars and Nayanars.
The problem is with the textbook writers who apparently cannot describe a Hindu tradition without first forcing it into an ideological template.
कक्षा 7 की पुस्तक में आंबेडकर के कदमों में एक ब्राह्मण को दिखाकर सामाजिक असमानता दूर करने वाली शिक्षा नीति का श्रेय कांग्रेस को नहीं, BJP को जाता है।
#ModiHaiToMumkinHai
जो सरकार आरक्षितों के लिए कई जिलों में फ्री हॉस्टल, फ्री कोचिंग, फ्री फ़ूड, कम मूल्य पर फॉर्म और पास होने पर फ्री कोर्स फी, फ्री हॉस्टल फी आदि देती हो, उनके चटुए हमें SC/ST/OBC/minority छात्रवृत्ति पर प्रश्न पूछने पर, 'सामान्य वर्ग को भी छात्रवृत्ति दी' का चूरन ना दें।
91% आरक्षण पर हाई कोर्ट की दो बार अवमानना करने के बाद सुप्रीम कोर्ट तक जाने के बाद, हमें यह मत बताओ कि सामान्य वर्ग की भी चिंता है। हमें पता है कि ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में क्या नाटक चल रहा है। भाजपा की ही सरकार है।
जब गड्ढे में हो, तो खोदना बंद करो। नीचे से पानी निकल आएगा और डूब जाओगे।
मोदी ब्रो! ये सब वर्डप्ले %# नहीं चलेगा अब। सीधे दलितों की संस्थाओं से कहो कि वो अपने अपने गाँव से कलक्टर रिकमेंड कर दें। रिक्रूटमेंट में जब इन्फीरियर ज्ञान वाले जाति देख कर आगे बढ़ाए आएँ, तो यह सब जुमला मात्र रह जाता है।
You guys are the collective abusers of Constitution and constitutional processes.
जब हार जाते हो, तब याद आता है कि ज्ञानेश कुमार गद्दार है। क्या गद्दार है? काहे कि ज्ञानेश कुमार ने आपको नहीं जिताया।
मतलब चाह रहे थे कि ज्ञानेश कुमार आएं और लोगों की उंगली पकड़कर बोलें कि नहीं नहीं, कमल पे नहीं, हाथ छाप दबाओ।
अगर आरक्षण गरीबी हटाओ योजना नहीं है, तो आर्थिक लाभ क्यों?
IIT में GC की फीस 8 लाख औऱ SC/ST की 0 क्यों?
कौन किस जाति का है, इसपर ये decide होता है कि उसको कौन सा कॉलेज मिलेगा-तो आज जातिवाद तो सरकार ही कर रही है!
हर योजना में जाति के आधार पर आरक्षण डालकर जातिवाद कैसे खत्म करोगे?
2.65 लाख डॉक्टरों में से आधे न्यूनतम अंक (36%) नहीं ला सके। GC/EWS का कटऑफ 262 रहा। 256 को शून्य, अंतिम रैंक में इम्प्रूवमेंट रही। अब अंतिम रैंक पाने वाला -40 की जगह -19 पर आ चुका है। @narendramodi को नमन कीजिए क्योंकि उन्हीं की कृपा से यह सब संभव हो पा रहा है। दलीत-पीड़ीत डॉक्टर बन रहा है।
आरक्षण का ईंधन और हिंदुत्व की सीटी - भाजपा की माल-गाड़ी के आगे बढ़ने का फार्मूला🖋️
चलिए इनका भांडा फोड़ा जाए। इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ियेगा।
मार्च 2019 में एक आर्डिनेंस आया, सेंट्रल एजुकेशनल इंस्टिट्यूट (रिजर्वेशन इन टीचर्स कैडर) आर्डिनेंस।
आप बस क्रोनोलॉजी समझियेगा।
2017 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी/कॉलेज में फैकल्टी (टीचर्स) की भर्ती में आरक्षण की सुविधा रहे परंतु आरक्षण देने का जो तरीका है वो 13-पॉइंट रोस्टर होगा न कि 200-पॉइंट रोस्टर क्यूंकि कोर्ट ने इंस्टिट्यूट लेवल पे आरक्षण को हटाकर डिपार्टमेंट लेवल पर आरक्षण को कैलकुलेट करने की इजाज़त दे दी, जो प्रशासनिक रूप से पहले से किया जा रहा था और जिससे एससी, एसटी, ओबीसी में नाराज़गी थी। और इस आदेश के बाद नाराज़गी और बढ़ गई।
मोदी मिनिस्ट्री ने (MHRD) सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के इस आदेश के ख़िलाफ़ एक SLP फाइल किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2019 में ख़ारिज कर देती है।
ये मामला 2017 से गरमा रहा था और सरकार बहादुर को भी पता था कि एससी एसटी ओबीसी सरकार से नाराज हो जायेंगे यदि कोई रास्ता नहीं निकाला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट से भी इसे खारिज करवाना संभव नहीं था पहले टर्म में। लेकिन यदि एससी एसटी ओबीसी के पक्ष में कोई बिल लाया तो जनरल या तथाकथित सवर्ण नाराज हो जायेंगे।
पर चुनाव भी नज़दीक हैं। कुछ तो करना पड़ेगा वरना हिंदुत्व की सीटी (राष्ट्रवाद और राममंदिर) बजती रहेगी लेकिन इंजन में ईंधन (आरक्षण) नहीं होगा। तो दोतरफ़ा चाल चली गई। एक तरफ़ से जनवरी 2019 में EWS आरक्षण दिया गया ताकि सवर्ण अपना मुँह बंद रख सकें और दूसरी तरफ़ मार्च 2019 में सेंट्रल एजुकेशनल इंस्टिट्यूट (रिजर्वेशन इन टीचर्स कैडर) आर्डिनेंस लाया गया ताकि हायर एजुकेशन में फैकल्टी की भर्ती में भर-भर के आरक्षण दिया जा सके और इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटा जा सके।
इस आर्डिनेंस को 2019 का चुनाव जीतने के बाद जून में बिल और कानून का रूप दे दिया गया। इसके माध्यम से 13-पॉइंट रोस्टर हटाकर 200-पॉइंट रोस्टर ला दिया गया और विभाग/विषय आधारित फैकल्टी रिजर्वेशन को इंस्टिट्यूट के लेवल पर करके आरक्षण का दवाज़ा पूरी तरह से खोल दिया गया।
इसमें एक कैल्यूज थे “एक्ज़ेम्प्टेड इंस्टीट्यूट्स”, जिनपर ये लागू नहीं होगा। पर उसमे आईआईटी और आईआईएम नहीं थे।
आईआईटी के संबंध में बता दूँ कि 2008 में कांग्रेस ने सिर्फ़ एंट्री लेवल (असिस्टेंट प्रोफेसर) पर आरक्षण दिया था और सीनियर लेवल (एसोसिएट और प्रोफेसर) पर नहीं, ये कहते हुए कि ये पद स्पेशलिटी जॉब्स हैं जिनपर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
पर 2019 के कानून के बाद 2021 में मोदी मिनिस्ट्री (MHRD) ने आईआईटी को बताया कि उन्हें साइंस एंड टेक के सभी पदों पर आरक्षण देना है और 200-पॉइंट रोस्टर से आरक्षण देना है। सरकार ने सभी आईआईटी को निर्देशित किया कि वो अपना आरक्षण रोस्टर तैयार करें और उस संस्थान के ओबीसी एवं एससी एसटी सेल को दिखायें।
आईआईटी और आईआईएम, दोनों ने सरकार को ज्ञापन दिया कि उन्हें इस तरह से फैकल्टी पोजीशन पे आरक्षण के लिए मजबूर न करें और “एक्ज़ेम्प्टेड इंस्टीटूशन” की लिस्ट में डाल दें, पर सरकार बहादुर ने एक भी नहीं सुनी।
आपको राष्ट्रवाद और राममंदिर के शोर में उलझा दिया, जो नहीं उलझे उन्हें EWS का लॉलीपॉप पकड़ा दिया ताकि बहल सकें, और अंदरखाने में आरक्षण और जातीय गणित का खेल रचकर अपनी सत्ता बनाए हुए हैं।
पूरी शिक्षा व्यवस्था की भद्द पीट चुके हैं ये लोग सिर्फ़ और सिर्फ़ सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए। ऐसे लोगों से यदि आप सुनहरे भारत का सपना ख़रीद रहे हैं तो माल का एक्सपायरी डेट चेक कर लीजिएगा।
तो इंदिरा साहनी वाले निर्णय में यह स्पष्ट किया गया था कि पायलट से ले कर कोई भी ऐसा क्षेत्र जहाँ प्रतिभा से समझौता मृत्यु को आमंत्रण है, या देश की बर्बादी का बिगुल, वहाँ आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। शोध, मेडिकल-इंजीनियरिंग या अन्य तकनीकी विषयों के सुपर स्पेशियालिटी, प्रोफ़ेसर्स के पद के लिए, रक्षा सामग्री बनाने के लिए दिए पदों में आरक्षण ना दिया जाए।
यानी, जजों ने स्वयं माना है कि आरक्षण पाने वाले गुणवत्ता को घटाते हैं।
‼️UP Govt Approaches Supreme Court for Urgent Hearing to Allow 91% Reservation in 4 SCP Medical Colleges‼️
A week ago, Allahabad High Court stayed UP Govt's decision to give 91% reservation in 4 SCP medical colleges.
High Court came down heavily on the UP govt & said that their decision was in clear violation of govt's own 2025 undertaking in High Court (in which UP govt had promised to give only 50% SC/ST/OBC reservation in these colleges from 2026 onwards).
Now the UP govt has approached Supreme Court for an urgent hearing (SLP-Diary no. 59123/2026) & is requesting SC to allow 91% reservation in these colleges.
FYI, last year Allahabad High Court had cancelled the 91% reservation matrix.
But UP govt filed a special appeal saying counselling is over & it will cause depression in SC students. Court had allowed it on condition that UP govt will correct the reservation matrix from 2026. Govt even gave an undertaking in Court regarding this.
However, this year, not only UP govt breached it's own undertaking in Court & gave 91% reservation again, but also they are using same tactic as last year (filing a special appeal asking for counseling to continue as it's too late).
And then we have people who still say BJP is GC-friendly??
परफ़ॉर्मेटिव हिन्दुत्वा बनाम हिन्दुत्व
भाजपा वालों को अब बहुत परिश्रम करना पड़ रहा है 'हिंदू' दिखने के लिए। 'चक्षु दान' से झुनझुने वाली डफली तक, जो पहले सामान्य लगता था, अपेक्षित लगता था, अब एक परफॉरमेंस लगता है। आप ब्रह्मा को गाली देने वाले फुले और 22 प्रतिज्ञाओं वाले अम्बेडकर को, भगवान राम और शिव के साथ कैसे प्रमोट कर सकते हैं!
अब त्रिपुंड, त्रिशूल और भगवा केवल तब दिखता है जब आलोचना हो, जब आपकी विभाजनकारी नीतियों को समाज पकड़ कर, आपसे उत्तर माँगने लगा हो। अब, न तो आप ‘पाइड पाइपर ऑफ हैमलिन’ हैं, न ही हिन्दू समाज चूहों की तरह तुम्हारी ‘पेन्ही नीली सरिया ए मेहरिया, जै भीम बोला’ धुन सुन कर पीछे चलने लगेगा।
इनकी धृष्टता देखो कि एक घोषित जातिवादी, विभाजनकारी, हिन्दू समाज भंजक नेता के जन्मदिन पर ये लोग ‘दीप जलाओ’ का कार्यक्रम ऐसे कर रहे थे, जैसे भगवान राम का अयोध्या आगमन हो रहा हो! पूर्ण निर्लज्जता के साथ!
और यह जीव इस बकलोली को ‘न’ भी नहीं बोल पा रहा। दिखास, छपास और आत्ममुग्धता के चरम पर बैठे इस व्यक्ति की टीम को इनके छवि प्रबंधन में अब भगवान बना कर, अगले कुछ वर्षों में भगवान से भी ऊपर बताने की योजना है कि राम-नाम तो कुछ नहीं हैं। अब बनारस में देव दीपावली से बड़ा आयोजन ‘नमो दीपावली’ होनी चाहिए। इन फैक्ट, इनका वश चले तो बनारस का नाम ‘नमोरस’ करवा दें!
अब ये गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में समाहित होना चाहते हैं कि ब्रो इतने दीये जल गए सर के नाम से! पहले यह रिकॉर्ड अयोध्या के राम जी के नाम था। इनका हिन्दुत्व केवल और केवल मार्केटिंग तकनीक बन कर बच गया है, जहाँ काम खत्म होते ही हिन्दू प्रतीक केवल एक प्रॉप बन कर रह जाता है।
इनका हर कार्य एक आयोजन है। इनका हर आयोजन एक स्पेक्टेकल है। हर स्पेक्टेकल एक स्टेज है इनकी विजिबिलिटी के लिए। हर विजिबिलिटी एक्सरसाइज एक वेल-क्राफ्टेड स्ट्रेटेजी है किसी ऐसे लक्ष्य को पाने के लिए, जो ये अनिच्छा से करते हैं, पर राजनीति के लिए आवश्यक है।
सवर्ण समाज अब इसे एक नौटंकी के रूप में देखता है। पहले आह्लादित हो कर हम पोस्ट लिखते थे, रील बनाते थे, बताते थे कि देखो हिन्दुओं को हिन्दू होना सिखाया! हम भी उलझते थे लोगों से कि तुम्हें समझ नहीं आ रहा, ये सब जरूरी है, सोए हिन्दुओं का आत्मविश्वास वापस ला रहा है। बात को समझो।
अब हम बस अपने अधिकारों की बात करेंगे। हमारा हिन्दुत्व हम देख लेंगे, आप अपनी राजनीति खुल कर करो। अम्बेडकर को पूजो, हमें कोई समस्या नहीं। पर ये नौटंकी इसलिए मत करो कि हम मान लें कि नहीं यार, हिन्दुत्ववादी है।
IIT Mumbai में सिर्फ साहिल वाकोडे की मृत्यु नहीं हुई है।
This is the murder of the reputation of Professor Suryanarayana Doolla. उनके आत्मसम्मान, प्रतिष्ठा और अकादमिक करियर की हत्या हुई है।