इस बंदे को BJP में होना चाहिए या इसको BJP का सलाहकार बना देना चाहिए जहाँ देखो आजाता है BJP को डिफेंड करने ये टीचर है या BJP का परचार करता मुझे लगता है ये अंधभक्त है
जो लोग कह रहे हैं कि बीजेपी जानबूझकर ढीला चुनाव लड़ी और कमजोर उम्मीदवार उतारकर पीके के लिए जीत की राह आसान बनाई, ताकि तेजस्वी यादव की जगह पीके विपक्ष का स्पेस ले लें-यह सब कवि की कोरी कल्पना है।
बात इस उपचुनाव की एक सीट भर की नहीं है। सही है कि इससे सरकार के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
लेकिन पीके अब विधानसभ�� में होंगे। इस जीत के बाद उनकी विश्वसनीयता और आत्मविश्वास, दोनों बढ़ेंगे। सोचिए, नैरेटिव के स्तर पर वे सरकार को कितना न���कसान पहुंचा सकते हैं। और यह वही खेल है, जिसमें वे सबसे ज्यादा माहिर हैं।
और ऐसे समय में बीजेपी अपने गढ़ में चुनाव हारने का जोखिम क्यों लेगी, जब अभी-अभी सरकार के खिलाफ इतना बड़ा छात्र आंदोलन हुआ है? ऊपर से कहा जा रहा है कि UGC प्रकरण और बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद पार्टी का GC मतदाता भी नाराज है। ऐसे में पार्टी अपनी परंपरागत सीट गंवाकर आखिर कौन-सा राजनीतिक समीकरण साध रही होगी?