��स प्रजा तस राजा ___ यह एक सच्ची कहावत है।
राजा के पास अथाह कला धन था उसने नोट बंदी करके और 2000/ का नोट चला कर सब सफेद कर लिया और देश की जनता को हसीन सपने बेचता रहा मूर्ख जनता प्रसन्न होती रही , क्रोना काल में PM केयर फंड बना कर धन अर्जित किया जनता खामोश रही।
अब देश भुखमरी की कगार पर खड़ा है , और राजा को देश की नहीं सत्ता की चिंता सता रही है, और वह MP, MLA खरीद रहा है उसे यह पता ही नहीं है कि देश में क्या हो रहा है __उसे यदि चिंता है तो सिर्फ़ अपनी और अपने कुछ मित्रों की।
हर हर मोदी घर घर मोदी 🔐
मोदी जी ने एक बार बड़े भावुक होकर कहा था कि जब एक गरीब माँ लकड़ी के चूल्हे पर खान��� पकाती है,
तो वैज्ञानिकों के अनुसार एक ही दिन में उसके शरीर में 400 सिगरेट के बराबर धुआँ चला जाता है।
बात तो बहुत रुला देने वाली थी, लेकिन आज इसकी ज़मीनी हकीकत क्या है?
आज मेरी माँ पिछले कई महीनों से गैस बचाने के लिए उसी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर है।
गैस सिलेंडर घर का शोपीस बनकर रह गया है, जिस पर सिर्फ चाय बनती है, दूध गर्म होता है या हल्का-फुल्का नाश्ता बनता है।
पता नहीं अब तक कितने हज़ार सिगरेट के बराबर धुआँ मेरी माँ और गाँवों की करोड़ों माताओं के फेफड़ों में जा चुका होगा।
यह सिर्फ मेरे घर की कहानी नहीं है, गाँव के लगभग हर घर का यही हाल है।
जब पांच करोड़ परिवारों को रसोई गैस सब्सिडी देने का ऐलान किया गया था तो बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे।
असलियत में भोली-भाली जनता को सिर्फ सपने ही बेचे गए। आज आम और गरीब जनता की ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो गई है
इस भयंकर गर्मी में लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है, आय आधी हो गई है और महंगाई आसमान छू रही है।
बाज़ार में सुई से लेकर राशन तक, कोई एक चीज़ ऐसी नहीं है जो महंगी न हुई हो लेकिन हमारी इस झालमुड़ी मीडिया को देखिए,
AC स्टूडियो में बैठे इन एंकरों के मुताबिक तो ऊपर-ऊपर से देश में अब कोई गरीबी बची ही नहीं है, तो फिर सब्सिडी की क्या ज़रूरत?
ज़रा इस सब्सिडी का गणित समझिए। पहले यह सब्सिडी 9 सिलेंडर पर मिलती थी, फिर इसे घटाकर 6 पर कर दिया गया, और अब यह 4 पर आ गिरी है।
लेकिन विडंबना देखिए, न्यूज़ चैनल इसे टीवी पर राहत बताकर पेश कर रहे हैं।
अब अगर इस पर कोई कुछ बोल दे, सच्चाई दिखा दे, तो ये सीधे कोर्ट पहुँच जाएंगे मानहानि का केस करने।
इसे राहत का नाम देना आम जनता के ज़ख्मों पर नमक छिड़कना है। यह राहत नहीं है, यह आम लोगों को आहत कर रहा है।
लेकिन चाटुकार मीडिया को इससे क्या? वो तो बस सरकार के जूतों पर पॉलिश करने में लगी हुई है।
सच कह��ँ तो थू है ऐसे बिके हुए, गिरे हुए सरकारी तंत्र और भारत की इस मीडिया पर!
हमारे प्रधानमंत्री जी तो वैसे भी अद्वितीय, अद्भुत, अजन्मे, अवतरित और अतुलनीय हैं।
उनके क्या कहने, हो सकता है कि आने वाले दिनों में वो लकड़ी के चूल्हे से निकलने वाले धुएं के भी फायदे गिना दें।
कड़वा सच तो यह है कि जो सरकार कल तक धुएं पर भावुक हो रही थी, आज वही अपनी नीतियों से गरीब माँ को 400 सिगरेट का धुआं पीने के लिए बढ़ावा दे र���ी है।
LPG सिलेंडर के दाम इतने आसमान पर पहुँचा दिए गए हैं कि गरीब उसे दोबारा भराने की हिम्मत ही न जुटा पाए।
ऊपर से गाँवों में 45 दिनों के बाद गैस भराने का बेतुका नियम थोप दिया गया है, गैस पर मिलने वाली सब्सिडी में लगातार कैंची चलाई जा रही है,
गैस की किल्लत के नाम पर आम आदमी को चिलचिलाती धूप में तीन से पांच दिन तक लाइन में लगने और दौड़-धूप करने पर मजबूर किया जा रहा है।
यही है हमारी आज की हकीकत। कैम��े के सामने रोने से फेफड़ों का धुआं साफ नहीं होता, उसके लिए नीयत साफ होनी चाहिए।
मेरे मन में बहुत बड़े प्लान हैं, देश के लिए बहुत कुछ करना बाक़ी है..अब और क्या करोगे प्रभु 🙏 😭
एक अंधभक्त की कलम से ✍️
ममता बनर्जी अगर कांग्रेस में मर्ज करती हैं तो सांसद और विधायकों के साथ ही नहीं आएंगी बल्कि
एक मोटे दहेज के साथ कांग्रेस में आएंगी यानि घर वापसी करेंगी।
TMC के पास खरबों रुपए की संपत्ति है, हजार करोड़ से ज्यादा का कैश है ,डिपॉजिट्स हैं..
मोदी जी तो कांग्रेस मुक्त भारत का प्लान बना रहे थे,
लेकिन यहां तो कांग्रेस और ज्यादा मजबूत होती जा रही है,
कई दूसरी क्षेत्रीय पार्टियां स्पेशली जो कांग्रेस से टूट कर अलग हुई थी,घर वापसी कर रही है।
जिससे कांग्रेस और ताकतवर बन रही है...
Rahul Gandhi का दावा कि मोदी सरकार एक साल के भीतर गिर जाएगी, सच होने जा रहा है शायद ?