Telecom Companies ऐसे Recharge Plans offer करती हैं जिनमें ‘Daily Data Limits’ जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB per day होती हैं, जो हर 24 hours में reset हो जाती हैं। बचा हुआ data midnight पर expire हो जाता है, जबकि उसके पूरे पैसे पहले ही दिए जा चुके होते हैं।
आपको 2GB के लिए charge किया जाता है। आप 1.5GB use करते हैं। बचा हुआ 0.5GB दिन खत्म होते ही गायब हो जाता है। कोई refund नहीं। कोई rollover नहीं।
मैंने आज यह मुद्दा Parliament में उठाया की जिस data के लिए हमने पूरी payment की है, वो दिन समाप्त होने पर Expire नहीं होना चाहिए।
बचा हुआ data अगले दिन की data limit में carry forward होना चाहिए, ताकि users Data इस्तेमाल कर सकें जिसके लिए उन्होंने पहले ही pay किया है।
संसद में आज मेरी demands हैं -
1.सभी users के लिए Data carry-forward / Data rollover की सुविधा दी जाए। जो data दिन के अंत तक use नहीं होता, उसे अगले दिन की limit में add किया जाए, न कि validity खत्म होते ही ख़त्म कर दिया जाए।
2.अगले महीने के recharge amount में unused data का adjustment का option दिया जाए। अगर कोई user लगातार अपना data under-utilise करता है, तो अगले monthly recharge में उस value का adjustment या discount मिलना चाहिए। users को बार-बार उस लिमिट के लिए pay नहीं करना चाहिए जो वे use ही नहीं करते।
3.Unused data को relatives और friends को transfer करने का option दिया जाए। Unused data को user की digital property माना जाना चाहिए। उपभोक्ता को अपने daily data limit से unused data दूसरों को transfer करने की permission होनी चाहिए, बिल्कुल उसी तरह जैसे पैसे transfer किए जा सकते हैं।
आज मोबाइल डेटा कोई luxury नहीं, Digital oxygen बन चुका है। टेलीकॉम कंपनियों की ये लूट बंद होनी चाहिए।
🚨ایران کی جانب سے ایک درد بھرا انقلابی گیت:
پہلی بار جنگ کے ڈھول مجھے اتنا مسحور کر رہے ہیں…
نہ تو اس سے محبت کی وجہ سے، بلکہ اس لیے کہ اس بار اس کے تال میں ایک طویل انتظار شدہ انجام کے آثار نظر آ رہے ہیں۔
ایک ایسی جنگ جو ظالموں کو کمزور کرے اور مظلوموں کو طاقت دے، تاکہ وہ باقی ماندہ لوگوں پر حملہ آور ہو سکیں۔
#محمد_المعروف
ویڈیو میں گانے کے بول / کیپشنز (عارف قزوینی کا کلاسیکی ایرانی انقلابی تصنیف "از خون جوانان وطن" سے):
وطن کے جوانوں کے خون سے لالے اگے ہیں۔
ان کے سرو قد کی ماتم میں سرو جھک گیا ہے۔
گل کی چھاؤں میں بلبل اس غم سے چھپ گیا ہے۔
گل نے بھی میرے طرح ان کے غم میں اپنا دامن پھاڑ لیا ہے۔
کیا کج راہ ہے اے قسمت!
کیا برا کیا ہے اے قسمت!
تو کینہ رکھتا ہے اے قسمت!
نہ دین ہے، نہ آئین اے قسمت!
یہ ایک درد بھرا انقلابی گیت ہے جو ایران کے شہید نوجوانوں کے لیے ماتم اور ظلم کے خلاف آواز ہے۔