TGT Result -आयोग को रिजल्ट के साथ- साथ cut off बताना चाहिए। जिससे चयन पर सवाल न उठें। और पारदर्शिता बनी रहें। जो छात्र असफल होते उन्हें अगली भर्ती के लिए कितना तैयारी करना होगा अनुमान लग सकता।
@myogiadityanath@UPGovt@AnandAkash_BSP
आप सभी को ईद-उल-अज़हा की दिली मुबारकबाद।
कुर्बानी का ये पाक त्योहार हमें त्याग, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है।
आदरणीय बहन कु. मायावती जी के चार बार के शासनकाल में हर खास ओ आम के घर में बरकत, हर दिल में अमन और हर बस्ती में खुशहाली थी। हमें एक बार फिर वैसा ही प्रदेश बनाना है।
बीएसपी, अपनी सर्वसमाज-हितैषी सरकार के लिए आज भी प्रतिबद्ध है।
आज जब देश में नफरत की राजनीति हो रही है, भाई को भाई से लड़ाया जा रहा है ईद का यह पैगाम और भी ज़रूरी हो जाता है।
परमपूज्य बाबा साहब का संविधान हमें सिखाता है कि इस देश में हर नागरिक बराबर है, चाहे उसका मज़हब कोई भी हो, जाति कोई भी हो।
हम उस राजनीति के खिलाफ हैं जो मंदिर-मस्जिद में बाँटकर वोट माँगती है।
हम उस भारत के साथ हैं जहाँ ईद, दिवाली और होली, सब मिलकर मनाए जाते हैं।
भारत एक रहे, मज़बूत रहे।
ईद मुबारक।
एक तरफ योगी सरकार 18-24 घंटे बिजली का दावा कर रही है दूसरी तरफ मरदह गाजीपुर क्षेत्र में बिजली का बुरा हाल है। 4-6 घंटे बिजली मिल रही है वह भी लो बोल्टेज।जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है। सरकार ध्यान दें
सरकार अपने ही दावे खोखले साबित न करें
@AKSharmaOffice@myogiadityanath@UPGovt
समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा अभी हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गयी अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी व बयानबाज़ी आदि को लेकर हर तरफ उपजा भारी आक्रोश व उसकी तीव्र निन्दा स्वाभाविक ही है तथा इस विवाद के फलस्वरूप पुलिस द्वारा मुक़दमा दर्ज किये जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किन्तु संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले को लेकर ख़ामोशी से भी मामला और अधिक गंभीर होकर काफी तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है।
वैसे भी सपा प्रवक्ता के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान व स्वाभिमान को जो ठेस पहुँची है तो उसको गंभीरता से लेते हुये सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से छमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिये तो यह संभवतः उचित होगा।
इसके अलावा, इस ताज़ा प्रकरण से लोगों की नज़र में यह भी साबित है कि सपा का ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि की तरह ब्राह्मण समाज-विरोधी भी इनका जातिवादी चाल व चरित्र बदला नहीं है बल्कि और ज़्यादा गहरा ही हुआ है तथा इसके साथ ही, ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैयों को लेकर भी जो ज़बरदस्त नाराज़गी इस समाज में देखने को मिल रही है वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है,
जबकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. द्वारा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी व सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान देने के साथ-साथ हर स्तर पर उन्हें उचित भागीदारी भी दी गयी है अर्थात् बी.एस.पी. में यूज़ एण्ड थ्रो नहीं है बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
लक्ष्मण यादव के एजेंडे का पोस्टमॉर्टम।
एक पॉडकास्ट में बहन मायावती पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज का दौर स्मृतियों का नहीं, संघर्ष का है।
लक्ष्मण जी, आप Dominant Caste से आते हैं। अतः आपको स्मृतियों की कद्र नहीं है लेकिन हम दलितों के जेहन में सपा सरकार के एक-एक पाप की स्मृति अमिट छाप की तरह बसी हुई है। क्या आपके सामाजिक न्याय की समझ यही कहती है कि समाजवादी पार्टी के गुंडों ने गेस्ट हाउस कांड में बहन जी पर जो जानलेवा एवं बर्बर हमला किया था, हम उन स्मृतियों को भूल जाएं क्योंकि हमें BJP को हराना है?
क्या हम उन स्मृतियों को भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने जातीय द्वेष में 20 लाख से अधिक कर्मचारियों का डिमोशन किया था? या फिर उन स्मृतियों को भूल जाएं कि समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भरी संसद में SC-ST समुदाय के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फाड़ दिया था?
क्या आप यह नहीं जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव ने 2012 के अपने मैनिफेस्टो में कैसे SC-ST Act के तहत दर्ज मामलों का रिव्यू करने का वादा किया था, और अखिलेश की सरकार बनते ही उन्होंने सत्ता एवं प्रशासन के दम पर रिव्यू के नाम पर अनगिनत पीड़ित दलितों पर उल्टा कार्रवाई कराई थी?
हम कैसे भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने अपनी जातीय कुंठा में बहन जी द्वारा दलित एवं पिछड़े महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदल दिए थे? या फिर यह भूल जाएं कि कैसे सपा सरकार ने अनेकों आम्बेडकर पार्कों को खाली कराया, कैसे बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने अनेकों अस्पतालों, पार्कों एवं कॉलेजों के नाम बदले थे?
सपा सरकार बनते ही आपके सजातीय लोगों ने दलितों की जमीनें कब्जानी शुरू कर दीं। विरोध करने पर उन पर बर्बर हमले हुए, लेकिन सपा सरकार और पुलिस अपराधियों को संरक्षण देकर उनका मनोबल बढ़ाने में लगी रही। दलित समुदाय की मां-बहनों का बाहर निकलना भी दुभर हो गया था। रेप, छेड़खानी एवं जातीय हिंसा आम बात हो गई थी। यह सब किसी आतंक से कम नहीं था। आप चाहते हैं कि हम इन स्मृतियों को भूल जाएं? वाह!
दलितों के मंच में जाकर उन्हें लच्छेदार भाषणों की चटनी चटाने वाले लक्ष्मण यादव को सामाजिक न्याय की इतनी सी बुनियादी समझ नहीं है कि स्मृतियां हमेशा समता के संघर्ष को सींचती हैं। ये स्मृतियां उस दौर की हैं जब दलित समुदाय के लोग मान्यवर कांशीराम एवं बहन जी के नेतृत्व में आजादी की आबोहवा में सिर उठाकर जीना शुरू कर चुके थे। समाजवादी पार्टी के गुंडों ने शुरू से ही उन्हें कुचलना शुरू किया। आलम यह था कि उन्होंने गैंग बनाकर 2 जून 1995 को बहन जी जैसी महान और शक्तिशाली नेता पर भी जानलेवा हमला किया।
वैसे तो आप मनुस्मृति की किताब उठाकर रोज स्मृतियों की दुहाई देते रहते हैं, लेकिन जब दलितों की स्मृतियों की बारी आई तो आप स्मृतियों को भूलकर संघर्षों की दुहाई देने लगे। वैसे किन संघर्षों की बात कर रहे हैं आप? अखिलेश यादव द्वारा एक हॉल में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को आप संघर्ष कहते हैं? दलितों द्वारा दिन-रात जातीय हिंसा के खिलाफ हो रहा संघर्ष आपको दिखाई नहीं देता? दिखाई भी क्यों देगा, जाति का मामला जो है। अखिलेश यादव आपके सजातीय हैं। अतः उनका नाखून कटाना भी आपको संघर्ष ही दिखाई देगा।
हम जानते हैं कि हमारा समाज बहुत भोला-भाला है, गुमराह हो जाएगा, लेकिन सनद रहे कि अभी समाज में हम जैसे लोग जिंदा हैं। हम अब उन्हें चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आने देंगे। जब आपके सजातीय लोग दलितों का दमन करते हैं, तो आपका सामाजिक न्याय वाला मुखौटा पूरा समाज देखता है। आपकी सामाजिक न्याय की समझ बस इतनी है कि आप BJP का डर दिखाकर दलितों का राजनीतिक नेतृत्व खत्म कर सकें, ताकि दलित आप Dominant Caste के रहमो-करम पर जिंदा रहे, जहां आप अपने फायदे के अनुसार उनका इस्तेमाल करें। जैसे गांवों में लोग मजदूरी एवं बेगारी हेतु दलितों का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही आप राजनीति में उनका इस्तेमाल करें।
न तो हम मान्यवर कांशीराम, बहन जी एवं बसपा की कल्याणकारी स्मृतियों को भूलेंगे और न समाजवादी पार्टी द्वारा दलितों पर किए गए पापों की स्मृतियों को भूलेंगे। संघर्षों का दौर आपके लिए नया होगा, लेकिन हम दलित समुदाय के लोग सदियों से ही संघर्ष करते आए हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हम दलितों का जीवन संघर्षों में ही बीतता है। बस अंतर इतना है कि आपका संघर्ष सिर्फ BJP से है। हमारा संघर्ष सिर्फ BJP से नहीं, बल्कि उनसे भी है जो BJP के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। दलितों का संघर्ष समता एवं संवैधानिक मूल्यों के लिए है। किसी पार्टी के विरोध अथवा समर्थन के नाम पर हमें खाई में न धकेलें। दलितों के जेहन में सपा की जातीय उत्पीड़न, विद्वेष एवं जातीय हिंसा से ओतप्रोत स्मृतियां भरी हुई हैं। न भूलेंगे, न माफ करेंगे।
गाज़ीपुर के मरदह थाना के #नखतपुर गांव में #बीती रात्रि में चोरों ने घटना को #अंजाम दिया। लगातार मरदह थाना क्षेत्र में चोरी हो रही है। एक भी चोरी का पर्दाफाश नहीं हो रहा है। एक भी चोर नहीं पकड़े गए हैं । पुलिस हाथ पर हाथ धरे मुकदर्शक बन बैठी है।
@ghazipurpolice@Uppolice@dgpup
हालाँकि देश भर के पुरुष व महिला मज़दूरों व श्रमिक समाज की हालत में कोई अपेक्षित सुधार लाख कोशिशों के बावजूद अब तक देखने को नहीं मिलता है, और इसीलिये ’मज़दूर दिवस’ के महत्व को आज भी नकारा नहीं जा सकता है और इस मौके़ पर नित्य दिन जीवन संघर्षों में लगे मेहनतकश तबके़ के सभी लोगों को आज ’मई दिवस’ की बधाई तथा उन सबके थोड़े ’अच्छे दिन’ की फिर से शुभकामनायें।
वैसे तो देश निर्माण में मज़दूरों एवं सभी मेहनतकश समाज के लोगों का ज़बरदस्त योगदान रहता है और उनके इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने देश की आज़ादी से पहले और फिर आज़ादी के बाद भी इन सबके लिये ख़ुश व ख़ुशहाल जीवन की गारण्टी सुनिश्चित करने का प्रयास किया था, किन्तु अब तो आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतन भोगी तथा हायर एड फायर की प्रथा ने जीवन के हर पहलू में प्रचलित हो जाने से देश के मेहनतकश तबक़ों/समाज को नई मुसीबतों व रोज़गार अनिश्चितताओं का ज़बरदस्त सामना है, जिससे उसके परिवार को पालन-पोषण ही नहीं बल्कि उसकी शिक्षा-दीक्षा, स्वास्थ्य आदि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता हुआ साफ दिखाई पड़ता है अर्थात् विकास की चाह में मज़दूरों का भविष्य ही नहीं बल्कि उनका व उनके परिवार का जीवन दाव पर लगा हुआ दिखता है, जो उचित नहीं प्रतीत होता है।
साथ ही, महिलाओं को इसके लिये वास्तव में सुरक्षित वातावरण नहीं मिल पाना भी भारत में चिन्ता का विषय बना हुआ है।
कुल मिलाकर, देश के विकास में मज़दूर/श्रमिक वर्ग की उचित भागीदारी सुनिश्चित हो, ऐसी आज मई दिवस पर सभी सरकारों से अपील है। वैसे भी बी.एस.पी. का संघर्ष उन्हीं मेहनतकश बहुजनों के हक़ के लिये समर्पित है और रहेगा।
सत्य, अहिंसा व मानवता के आदर्श ज्योति को दुनिया में फैलाकर भारत को जगदगुरु की विश्व ख्याति व सम्मान दिलाने वाले तथागत (भगवान) गौतम बुद्ध को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व उनके अनुयाइयों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं सुख, शान्ति व सौहार्द भरे जीवन की शुभकामनाएं।
तथागत गौतम बुद्ध के बताए रास्ते पर सही से चलकर लोगों के जीवन को सुखी व सम्पन्न बनाना ही सच्चा राजधर्म है, इससे भला कौन इंकार कर सकता है। लेकिन इसकी सार्थकता तभी संभव है जब सभी सरकारें अपनी कथनी व करनी में अन्तर ना आने दें और वही करें जो कहें एवं वही कहें जो कर पायें, तभी इससे सभी को प्रेरणा मिलेगी।
साथ ही, सरकारें ख़ासकर सभी धर्मों के मानने वालों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा सुनिश्चित करें तो यह तथागत गौतम बुद्ध को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इतना ही नहीं बल्कि ’अप्प दीपो भवः’ अर्थात शिक्षित बनो, ख़ुद ऊपर उठो व अपना प्रकाश स्वयं बनो के सिद्धान्त से ही देश आत्मनिर्भर एवं महान बनेगा।
बुद्धं शरणं गच्छामि,
धम्मं शरणं गच्छामि,
संघं शरणं गच्छामि।
भगवान बुद्ध के उपदेश आपके जीवन में शांति, करुणा और ज्ञान का प्रकाश फैलाएं।
*बुद्ध पूर्णिमा की मंगलकामनाएं!* 🙏
1. देश के SC, ST व OBC समाज के संवैधानिक/क़ानूनी अधिकारों आदि के मामले में, कांग्रेस भी गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने वाली यह पार्टी भी, महिला आरक्षण में, जो अब इन वर्गों की बात कर रही है, तो यही कांग्रेस पार्टी है जिसने अपनी केन्द्र की सरकार के रहते हुये किसी भी क्षेत्र में इनके आरक्षण के कोटे को पूरा कराने की कभी पहल नहीं की है।
2. तथा ना ही OBC समाज हेतु मण्डल कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में 27 प्रतिशत आरक्षण को भी लागू किया, जिसे फिर BSP के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह की सरकार में अनततः लागू किया गया था, जो सर्वविदित है।
3. इसी प्रकार, यू.पी. में पिछड़े मुस्लिमों को OBC का लाभ देने के लिए, पिछड़ा वर्ग आयोग की जुलाई 1994 में ही आई रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने ठण्डे बस्ते में डालकर इसे लागू नहीं किया था, जिसे फिर यहाँ बी.एस.पी. की दिनांक 3 जून सन् 1995 में पहली बनी सरकार ने इसे तुरन्त लागू किया, जो कि अब यही सपा अपना रंग बदलकर अपने राजनैतिक स्वार्थ में इनकी महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है।
4. इस प्रकार, अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी सपा जब सरकार में नहीं है तो अलग रवैया अपना रही है, किन्तु जब सरकार में होती है तो अलग संकीर्ण जातिवादी व तिरस्कारी रवैया अपनाती है। अतः इन सभी वर्गों को ऐसी सभी छलावा एवं दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सावधान रहना होगा, तभी कुछ बेहतर संभव हो पायेगा।
5. जहाँ तक महिला आरक्षण के लिए पिछली (सन् 2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का सवाल है, तो इस बारे में यही कहना है कि यदि इसे जिन भी कारणों से जल्दी लागू करना है तो फिर इसी जनगणना के आधार पर करना है और यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केन्द्र की सत्ता में होती तो फिर यह पार्टी भी बीजेपी की तरह ही यही क़दम उठाती।
6. कुल मिलाकर, कहने का तात्पर्य यह है कि देश में SC, ST व OBC एवं मुस्लिम समाज के वास्तविक हित, कल्याण व उनके भविष्य संवारने आदि के किसी भी मामले में कोई भी पार्टी गम्भीर नहीं रही है।
7. इसीलिये महिला आरक्षण के मामले में इन वर्गों को अभी जो कुछ भी मिलने वाला है तो उसे इनको फिलहाल स्वीकार कर लेना चाहिये और इस मामले में आगे अच्छा वक्त आने पर इनके हितों का सही से पूरा ध्यान रखा जायेगा अर्थात् इन्हें किसी के भी बहकावे में नहीं आना है क्योंकि इनको खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपने समाज को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाना है। यही सलाह है।
भारतीय संविधान निर्माता, परमपूज्य बोधिसत्व,बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के जयंती के मंगल अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। 🌹 🙏
@आलोक सागर,युवा बसपा नेता, गाजीपुर
प्रिय
राहुल गांधी जी
आपको मेरी यही सलाह है कि अब आपको बसपा में शामिल हो जाना चाहिए।
जब सब कुछ बसपा का नकल करना है तो यही आइये।
बसपा का मात्र 50 रूपए सदस्यता शुल्क है। किसी सेक्टर अध्यक्ष से प्राप्त कर सकते हैं।
@RahulGandhi
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह महात्मा ज्योतिबा फुले जी को आज उनकी जयंती पर मैं कोटि कोटि नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।
ज्योतिबा फुले जी ने जो मशाल जलाई है उसे बाबा साहेब ने और आदरणीय बहन जी ने नई ऊंचाई दी है। लेकिन स्वार्थी राजनीतिक दलों ने हमारे महापुरुषों को अपने जातिवादी द्वेष की वजह से इनके सम्मान में बने जिलों का नाम बदल दिया। ऐसे स्वार्थी लोगों से सावधान रहना है।
जय भीम, जय भारत
मेरे ग्राम सभा टिसौरी ,मरदह, गाजीपुर में राजभर बस्ती में हौसला बुलंद चोरों ने एक साथ पांच घरों में चोरी किए हैं।
जिसमे भारी मात्रा में सोना,चांदी, रूपए की चोरी किए हैं।
@Uppolice@ghazipurpolice
72 घंटे बाद भी घटना का पर्दाफाश नहीं हुआ है।
मेरे ग्राम सभा टिसौरी ,मरदह, गाजीपुर में राजभर बस्ती में हौसला बुलंद चोरों ने एक साथ पांच घरों में चोरी किए हैं।
जिसमे भारी मात्रा में सोना,चांदी, रूपए की चोरी किए हैं।
@Uppolice तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करके चोरों को गिरफ्तार करके घटना का पर्दाफाश करें
@ghazipurpolice