सरकार इनकी सुविधा के लिए रास्ता बनाती है, गुलाब के फूल बरसाती है फिर भी इनकी हिंसा को रोकने का इक़बाल नहीं रखती। समाजसेवी संगठन भी इंतज़ाम करते हैं। कैंप लगाते हैं। तब भी ये लोग हिंसा करने से बाज़ नहीं आते। कहने का मतलब है कि ये लोग राज्य और समाज दोनों से शिकायत नहीं कर सकते कि किसी ने परवाह नहीं की, फिर इनके भीतर इतनी हिंसा क्यों भरी है।
हर साल का यही हाल है। इन लोगों का फेस रिकॉग्निशन से रिकॉर्ड नहीं निकाला जाता है? पुलिस क्यों नहीं इनके घर चली जाती है? कम से कम इन सभी को एक गाइड लाइन पकड़ा देती कि कोई दिक्कत हो तो रास्ते भर पुलिस खड़ी है। आप पुलिस को बुलाइये। ख़ुद से मारपीट और तोड़ फोड़ मत कीजिए। कुछ तो काउंसलिंग करनी चाहिए और फिर कार्रवाई भी। कब तक स्टेट एक्शन नहीं लेगा और ये लोग हिंसा करते रहेंगे। इन्हें ये सब करने के लिए आप जेन ज़ी को दोष नहीं दे सकते। कई जेनरेशन से हो रहा है।
PM को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस बयान ने लोगों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। आखिर ऐसा क्या कहा गया जिसने इतनी सुर्खियां बटोर लीं?
आपकी इस बयान पर क्या राय है?
पीडित छात्रा:- एक पुलिस वाले ने मेरे पिछले हिस्से मे लाठी घुसेडी...💔
ठीक ऐसी ही घटना प्रोटेस्टर के दौरान जंतर-मंतर पर और भी छात्राओ के साथ भी हुई
हमें ₹@डी बोला गया है, हमे मारते वक्त ये बोल रहे थे कि और मारो इन बहन की लौ@डी को 💔
एक लडकी को ये तक बोला गया कि घर चली जा वर्ना थाने ले जा कर नं&गा करके मारूंगा
औरतो की छाती पर पैर रखे गए है और ये सब पुरूष पुलिस के द्वारा किया गया था और जो इनमे से तमाम बिना वर्दी के भी थे !!
इस पीडिता की आवाज प्रधानमंत्री के कानो तक जरूर पहुचनी चाहिए, उनको अपने ऊपर पडी गालियां तो सुनाई दे गई...
पर प्रधानमंत्री की पुलिस ने इन छात्राओ के साथ जो सुलूक किया उसके बारे मे प्रधानमंत्री के क्या विचार है ?
विशेष चेतावनी: बहरूपिये भाजपाई बहेलियों से दूर रहें !
सत्ताधारियों के साथ सिर्फ़ अंधेरे में रहने वाले भूमिगत, अनरजिस्टर्ड संगी-साथी ही नहीं हैं, बल्कि इस बहु-भुजाओं वाले _‘ऑक्टोपस गिरोह’_ के और भी कई हाथ हैं, जो चमचमाती लाइट में बैठकर और अपने ‘कुविचार-वंशियों’को आसपास बैठाकर ‘खुली साज़िश’ करते हैं, लोगों को किसी और बहाने से बुलाकर फँसाते हैं और दिनदहाड़े घेरकर शिकार करने की कोशिश करते हैं। ये ‘बहरूपिये बहेलिये’ हैं, जिनका भंडाफोड़ अब सरेआम हो गया है।
मूल रूप से ये वो ‘सुरंगजीवी गिरोह’ है जो अकेले को देखकर भीड़ बनाकर घेरकर शिकार करता है, लेकिन भीड़ को देखकर अलग-अलग होकर अंडरग्राउंड हो जाता है।
अपने आस-पास के घरों में गहराई से तलाशें! ये बिना KYC वाले लोग कहीं आपके आस-पड़ोस के किसी घर में प्रवास-वास न कर रहे हों। इनकी पहचान ये है कि ये थोड़े संदिग्ध टाइप का व्यवहार करते हैं। मन के मैले ये लोग साफ़-सुथरे, साधारण कपड़ों में रहते हैं। निकलते अकेले हैं लेकिन किसी ख़ुफ़िया जगह पर एक-दूसरे से अंजान बनकर अख़बार के पीछे मुँह छिपाकर फुसफुसाते हैं। बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं, बड़ों पर झूठे इल्ज़ाम लगाते हैं, चरित्रहीनों को माला पहनाते हैं, अपने पुरुषवादी तंग नज़रिये के कारण नारी का अपमान करते-करवाते हैं, बहन-बेटियों और दुखी माँ तक को सरेआम धमकाते हैं, नारी की आज़ादी पर नैतिकता के नाम पर पाबंदियाँ लगाते हैं। धन-लोलुपता, बदज़ुबानी, दग़ाबाज़ी, धोखे और षड्यंत्र के साथ-साथ बेशर्मी और बेरहमी इन स्वार्थियों की सबसे बड़ी पहचान है, जिसके लिए ये इंसान क्या, भगवान तक को ठग लेते हैं।
अपने तन-मन का रखें विशेष ध्यान : ख़तरे से रहें सावधान!
#CC_to_CC
#जो_भाजपा_का_साथी_वो_रामघाती_महापापी
हिंदुओं से अनुशासन सीख लीजिए, मुजफ्फरनगर के मीनाक्षी चौक पर कांवड़ियों द्वारा रोड ब्लॉक करके डांस किया जा रहा है, योगी जी कहते हैं "मुसलमानों को हिंदुओं से अनुशासन सीखने की आवश्यकता है, सड़कें चलने के लिए होती न कि चौराहे ब्लॉक करके तमाशा करने के लिए।"
ख़ुद दूसरों की माँ को जर्सी गाय और पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कह रहे थे तब माँ का सम्मान हो रहा था? क्या वो गाली नहीं थी? मणिपुर में दूसरों की माताओं-बहनों को नंsगा करके घुमाया गया तब क्यों चुप थे?
अगर सचमुच पेपर लीक से "फ़ायदा" होता है, तो फिर सरकार हर परीक्षा से पहले ही पेपर लीक करवा दे। सबको "और अच्छी तैयारी" का मौका मिलेगा!
वाह मंत्री जी! बेरोज़गारी को "अनुभव", महंगाई को "अवसर" और अब पेपर लीक को "तैयारी का बोनस" बता दिया गया।
धन्य है वह सत्ता, जो युवाओं के ज़ख्मों पर मरहम रखने के बजाय उन पर कुतर्कों की परत चढ़ाती है। शायद अगला भाषण यही होगा - "समस्या नहीं, नज़रिया बदलिए।"
सावधान रहे!
IT सेल, जेन जी को टक्कर नहीं दे पा रहा तो नारंगी आ रहे मैदान में।
सांसद चंद्रशेखर जी को खुलेआम धमकी दे रहा है।
पिछवाड़ा लाल करने का टाइम दिया है 26 तारीख को 12 बजे रविवार।
पिस्तौल निकालनेवाले ये भूल गये कि अगर उनकी पढ़ाई बीच में रुक जाती, तो ये पुलिस की नौकरी इनके हाथ न आती।
विश्वविद्यालय हमेशा आक्रांताओं ने तोड़े हैं, और कुछ नहीं कहना है।
#जौहर_यूनिवर्सिटी_रामपुर_उप्र