@vkjatav84 कुछ लोग बेवजह ही इसे महत्व दे रहे थे जबकि यह RSS बीजेपी के लिए ही काम कर रही है. भड़काऊ बातें करके जाटव समाज को नीचा दिखाने का प्रयास करती रहती है.
लद गए वो जमाने जब बाबा, सन्त और फकीर 'सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग' के सिद्धांत पर चलते थे. आज ये लोग मंहगे चश्मे पहनते हैं, विलासमय जीवन व्यतीत करते हैं और धर्म की राजनीति करते हैं. भगवान की कृपा के नाम पर इनका धंधा शुरू होता है, फिर खुद ही ये भगवान बन जाते हैं जबकि भगत सिंह ने कहा था कि मैं एक मनुष्य हूँ और इससे अधिक कुछ नहीं. कोई भी व्यक्ति इससे अधिक होने का दावा नहीं कर सकता.
@BhainsdehiWale मेरे प्यारे सुनील भाई, ये नहीं है सही लॉजिक, बाकी वो हैं ऐतिहासिक दंगाई. लेकिन मातंग समाज पर जब भी संकट आएगा, हम लोग मनुवादियों की नकेल कस देंगे.
फिर इतना सारे सुरक्षा उपकरणों की क्या जरूरत है? हर बिजली वाले, मैं तो बोलूंगा कि हर व्यक्ति को जिसे करेंट से बचना है, उसे जनेऊ पहन लेना चाहिए. ज्यादा दूर नहीं जाऊंगा, अभी 1 दिन पहले ही बरेली में ट्रांसफॉर्मर का फॉल्ट ठीक करते हुए लाईनमैन पंकज मिश्रा (40 वर्ष) दिवंगत हो गए थे, जिन्होंने जनेऊ पहन रखा था.
यह सत्य है कि विभाजनकारी मनुवादी मूर्खों की पूरी गैंग पर एक सुशिक्षित आंबेडकरवादी भारी पड़ता है. अब इन महाशय को ही देख लीजिए जो सामान्य वर्ग के गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप दिए जाने की मांग कर रहे हैं जबकि लगभग पिछले 20 सालों से सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को स्कॉलरशिप दी जा रही है जो शायद खुद इन महाशय ने भी लिया होगा. मेरे साथ पढ़ने वाले सामान्य वर्ग के स्कूल और कॉलेज के छात्रों को स्कॉलरशिप मिलती थी. केंद्र सरकार के स्तर से सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप और नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप दी जाती है एवं राज्य स्तर पर प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप प्रदान की जाती हैं. साथ ही गरीब मेधावी छात्रों के प्रोत्साहन हेतु सभी वर्गों के लिए विभिन्न स्कॉलरशिप्स और फ्री स्कूल उपलब्ध हैं. वर्ष 1986 में जवाहर नवोदय विद्यालय योजना की शुरूआत हुई जिसका लाभ सभी जातियों के लोग उठा सकते थे. राज्य स्तर पर विभिन्न राज्यों ने मुफ्त कोचिंग समेत ऐसी कई योजनाएं चलाईं जिसका लाभ सामान्य वर्ग के छात्रों को मिला. सामान्य वर्ग के लोगों को उनकी आबादी के अनुपात में सदैव ज्यादा ही मिला है, फिर भी फेक नैरेटिव गढ़कर बहुजनों के सामाजिक प्रतिनिधित्व को कुचलने की कोशिशें होती रहती हैं.
ये मेरिटधारी नमूने हैं. जाति एक मानसिक स्थिति/अवस्था है और प्रत्येक हिंदू आदतन जातिवादी होता है क्योंकि एक हिंदू की असल पहचान उसकी जातीय पहचान ही होती है. प्रमाण पत्र फाड़कर देख लिया, कहां खत्म हुई जाति? जब धर्म ही वर्ण-जाति आधारित हो और देवता ब्राह्मणों के अधीन हों, वहाँ प्रमाण पत्र फाड़कर जाति/जातिवाद को मिटाया नहीं जा सकता.
जातिवाद के घृणित स्वरूप को देखकर दुनिया भर में देश की बदनामी होती है. देश की छवि ख़राब हो, पर इन्हें क्या? सुनियोजित जातिवाद करना, जातीय श्रेष्ठता पर बल, जातीय भ्रष्टाचार, भ्रष्ट धार्मिक आचरण और समाज को जाति प्रधान बनाए रखने में ही इनका हित है.
Where are those descendants of Manu who claim that casteism and untouchability have ended in India?
A Brahmin is practicing untouchability against a teacher from the Shudra community.
Shameful!
दतिया उपचुनाव में विरोधियों द्वारा शराब और पैसे बांटने के सवाल पर ASP प्रत्याशी दामोदर यादव ने कहा कि वोटों के ख़रीदार बनकर जो लोग आज पैसे और शराब बांट रहे हैं, वो कोई इनके घर से नहीं आ रहा बल्कि जनता को बेवकूफ़ बनाकर उसके लूटे हुए पैसों का ही इस्तेमाल हो रहा है, ताकि पुनः जीतकर लूट का सिलसिला जारी रखा जाए. लेकिन दतिया की जागरूक जनता इस बार वर्तमान के दोनों सहयोगी दलों बीजेपी और कांग्रेस को कठोर सबक सिखाएगी.
@BhimArmyChief@DamodarSYadav
हमारे संघर्षों के साथी बड़े भैया रविन्द्र भाटी ने दतिया उपचुनाव में व्यापक जागरूकता और जनसंपर्क अभियान चलाकर आज़ाद समाज पार्टी के पक्ष में माहौल बना दिया है.
संगठन की मजबूती एक महत्वपूर्ण कदम है. वैचारिक तौर पर मजबूत संगठन विरोधियों को धूल चटाने में सक्षम है. व्यक्ति से लड़ना आसान है लेकिन मजबूत संगठन से लड़ना आसान नहीं है. संगठन नेताओं का निर्माण करता है और विरोधियों के दुष्प्रचार का पूरी मजबूती से खंडन करता है.
@BhimArmy_BEM
सीतापुर की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भीम आर्मी भारत एकता मिशन की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं।
आज का यह ऐतिहासिक आयोजन आप सभी साथियों के विश्वास, अनुशासन और अथक मेहनत का परिणाम है। मैं जनपद जिला संयोजक भाई Rakesh Rajvanshi सहित प्रत्येक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और मिशन के प्रति समर्पित साथी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
हमारा संकल्प स्पष्ट है—सीतापुर में संगठन को बूथ, गाँव और वार्ड स्तर तक पहले से अधिक मजबूत बनाना है।
@PrinceV93789344 भाई बड़े कायदे से आप इन लोगों की क्लास लगाते हो, इसलिए ये आपके विरोधी हैं लेकिन जिनके साथ सत्य का तेज और महापुरूषों का आशीर्वाद हो, उसे बुरी शक्तियां छू भी नहीं सकतीं. तथागत का प्रताप और अवलोकितेश्वर की करूणा आप पर बनी रहे.
मेहनत ही सफलता की कुंजी है. कार्यकर्ताओं की सतत मेहनत और दामोदर यादव की संघर्षशील किसान बहुजन नेता की छवि ने दतिया उपचुनाव में दोनों मुख्य दलों बीजेपी और कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया गया है. गोदी मीडिया कुछ भी कहे लेकिन दतिया में आज की डेट में दामोदर दोनों पर भारी हैं. शायद यही वजह है कि अब आखिरी दौर में साम-दाम-दण्ड-भेद की नीति के अंतर्गत वोटों को अपने पाले में लाने/खरीदने का प्रयास किया जा रहा है. वर्तमान में बीजेपी-कांग्रेस की अंदरूनी मिलीभगत जग जाहिर है और अब बीजेपी-कांग्रेस दोनों मिलकर दामोदर से मुकाबला करते दिखाई भी दे रहे हैं.
@AzadSamajParty मध्यप्रदेश के प्रत्याशी भाई दामोदर यादव जी के समर्थन में दतिया विधानसभा उपचुनाव में गांव गांव जाकर प्रचार करते हुए #वोट_फोर_केतली
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष @BhimArmyChief सांसद साहब जी जिन्दाबाद।
हां, मैं आरक्षण का विरोध करूंगा लेकिन हर प्रकार के. धार्मिक/सामाजिक आरक्षण, जातीय श्रेष्ठता और विशेषाधिकार बन्द होना चाहिए. अपने धंधे/आरक्षण पर चुप्पी और माल बटोरकर निकल लेते हो, वहीं देश की अधिकांश जनता ठगी जाती है. तुम्हारे समानता के ढोंग और बौद्धिक दोगलेपन से चीजें नहीं बदलतीं. तुम ब्राह्मणों के स्वघोषित आरक्षण का विरोध करो, मैं EWS समेत सभी आरक्षण का विरोध करूंगा.