कम से कम दो लाख ट्रैक्टर थे। लोग भी काफ़ी थे। क्या दिल्ली में एक भी दुकान लूटी गई? क्या पब्लिक की कोई कार टूटी? क्या किसी के घर का एक फूल भी किसी ने तोड़ा? किसी लड़की से छेड़खानी हुई? कोई एंबुलेंस रोकी गई? वे हिंसक लोग तो नहीं रहे होंगे। सरकार से उनका पंगा ज़रूर चल रहा है।