सचिन जी, इलेक्शंस में संसाधनों की उपलब्धता की वजह से सीईटी सीनियर सेकेंडरी दिसंबर के पहले हफ्ते में और सीईटी स्नातक जनवरी के दूसरे हफ्ते में जाएंगी।
जल्द ही इनकी आधिकारिक सूचना जारी करेंगे।
मुझे यह जानकारी साझा करते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि आगामी 28 फरवरी को विश्�� के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता, यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी अजमेर की धरा से प्रदेश को ₹23,500 करोड़ के विकास कार्यों की अभूतपूर्व सौगात देंगे।
शिलान्यास और लोकार्पण के साथ-साथ 'रोजगार उत्सव' में 21 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपकर उनके सपनों को नई उड़ान दी जाएगी। आदरणीय प्रधानमंत्री जी की गरिमामयी उपस्थिति 'विकसित राजस्थान' के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करेगी।
#आपणो_अग्रणी_राजस्थान
आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर ध्वजारोहण उत्सव का यह क्षण अद्वितीय और अलौकिक है। सियावर रामचंद्र की जय! https://t.co/4PPt0rEnZy
विशेष निवेदन- *अंत तक पढ़े*
*इतिहास मौन नहीं रहता* —
*वह चीखता है*…
और जो उसे नहीं सुनते,
वो एक दिन खुद इतिहास की शव-यात्रा में बदल जाते हैं।"
20वीं सदी का जर्मनी —
जहां यहूदी सिर्फ एक धर्म नहीं थे,
वो ज्ञान के निर्माता, विज्ञान के जनक, बैंकिंग के स्त��भ,
शिक्षा के मार्गदर्शक और संस्कृति के संरक्षक थे।
जैसे आज भारत में हिंदू हैं।
पर जब नाज़ी विचारधारा ने करवट ली—
तो इन्हीं यहूदियों को बताया गया:
"ये षड्यंत्रकारी हैं"
"ये राष्ट्रविरोधी हैं"
"ये हमारी गरीबी के ज़िम्मेदार हैं"
मीडिया, शिक्षा, और राजनीति को हथियार बनाया गया,
और जनता को घृणा की आग में झोंक दिया गया।
और फिर...
सिर्फ चार वर्षों में,
25 लाख नाज़ियों ने
60 लाख यहूदियों को
गैस चें���रों में झोंका,
बच्चों को माँ की गोद से छीनकर मार डाला,
लोगों को जिंदा जला दिया…
इतिहास कांप उठा, पर इंसान नहीं जागे।
और यह सब हुआ…
क्योंकि यहूदी बहुसंख्यक होते हुए भी असंगठित थे।
वो लड़ना भूल गए थे,
सोचते रहे – “हमें कुछ नहीं होगा…”
ध्यान दीजिए – ज्ञान था, पर ��ागरूकता नहीं।
धन था, पर आत्मरक्षा नहीं।
शब्द थे, पर साहस नहीं।
लेकिन जब राख से उठी एक पुकार,
तो जन्म हुआ — इज़राइल का।
जहाँ…
हर 16 वर्षीय बच्चा एक सैनिक है,
हर महिला एक कमांडो है,
स्कूल में जितना गणित सिखाया जाता है, उतना ही राइफल चलाना भी।
राष्ट्र पहले है — धर्म, दल और जाति सब बाद में।
अब आइए अपने भारत की ओर देखें…
आज हिंदू समाज वहीं गलती दोहरा रहा है।
आपसी फूट
जातिगत द्वेष
आत्ममुग्ध धर्मनिरपेक्षता
और सबसे घातक —
"हमारे साथ कुछ नहीं होगा" वाली मुग्धता
क्या आप जानते हैं?
यहूदी धर्म, जो हजारों सालों पुराना है,
आज दुनिया में सिर्फ 2 करोड़ लोग बचा पाया है।
और वहीं इस्लाम और ईसाई,
जो बाद में आए—
आज 5 अरब से अधिक लोगों की वैश्विक ताकत बन चुके हैं,
क्योंकि ��नके पास है —
धर्म आधारित एकता।
जब भारत-पाकिस्तान युद्ध होता है,
तो तुर्की, मलेशिया, ईरान, इंडोनेशिया, सीरिया, अज़रबैजान, सऊदी अरब—
सब खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े होते हैं।
क्यों?
क्योंकि मज़हब एक है।
और भारत के साथ?
सिर्फ संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी और राजनयिक पंक्तियाँ।
अब सोचिए—
अगर यह भारत नहीं रहा तो...
क्या हिंदुओं के पास कोई इज़राइल है?
नहीं!
यह धरती का अंतिम टुकड़ा है जहाँ हिंदू सुर��्षित हैं।
अमेरिका नहीं देगा,
जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया — कोई नहीं देगा।
इसलिए भारत बचाना, खुद को बचाना है।
आज—
रोहिंग्या को महंगे वकील मिल जाते हैं,
बांग्लादेशी घुसपैठियों को राशन और वोटर ID मिल जाती है,
लेकिन राम मंदिर की बात करने पर आपको "कट्टर" कहा जाता है।
गीता पढ़ने पर "हिंदुत्व" का ठप्पा लगता है।
और आप ��ुप हैं?
क्यों?
अब नहीं जागे,
तो आने वाली पीढ़ियों के इतिहास की किताबों में
"हिंदू" एक संस्कृति नहीं,
एक भूली हुई सभ्यता के रूप में दर्ज़ होगा।
इसलिए…
जाति नहीं, जननी बड़ी है।
भाषा नहीं, भारत बड़ा है।
दल नहीं, धर्म बड़ा है।
खुद नहीं, संघर्ष बड़ा है।
आज भी समय है —
संगठित हो जाइए,
जाग जाइए,
क्योंकि अगर अब नहीं जागे,
तो अगली बार राख तक नहीं बचेंगी।
कृपया याद रखें, हमारी जातियां अलग हो सकती हैं पर हम सब हिंदू हैं, सनातनी हैं।
जय हिंद,
जय भारत,
जय सनातन!
🙏🇮🇳🚩