हम एक ऐसे विश्व गुरु बन गये हैं।
जहाँ रेप करने वाले बाहर, और शिक्षा देने वाले जेल में जा रहे,
जहां एक पेड़ मां के नाम लगाकर, सैकड़ों जंगल काटे जा रहे,
जहां सवाल पूछना, देश द्रोह, और चुपचाप देश बर्बाद होता देखना देश भक्ति हो गया।
मेरा मानना है कि पत्रकारिता में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार मीडिया उतनी ही आवश्यक है जितनी मजबूत न्यायपालिका और जागरूक नागरिक।
जो काम समाचार चैनलों और पत्रकारों को करना चाहिए था, वह आज शिक्षक, विद्यार्थी और आम नागरिक कर रहे हैं। यदि मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी निष्पक्षता और ईमानदारी से निभाई होती, तो देश में इतना भ्रष्टाचार और इतने विरोध-प्रदर्शन देखने को नहीं मिलते।
मीडिया को जनता की आवाज़ के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन कई चैनल जनता के मुद्दों को उठाने के बजाय सत्ता का बचाव करने में अधिक व्यस्त दिखाई देते हैं। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका सत्ता से सवाल पूछने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की होती है।
गुजर रही हैं जिंदगी एक ऐसे मुकाम से,
अपने ही दूर हो रहे हैं, इस जरा सी जुखाम से
सारी कायनात में एक कातिल बीमारी की हवा हो गई
वक्त ने एक ऐसा सितम ढाया, कि मानो दुरिया ही एक दवा हो गई।
आप सभी से निवेदन है आप सभी अपने और अपने परिवार को इस सेकंड कोविड19 वेव से बचा के रखे
🙏🙏🙏🙏🙏
मासूमों के खून से रंगते दीवारे अपनी,
बेईमानी और भ्रष्टाचार कि लिखी किताब हो तुम
नजरो मे बसती, बस सत्ता और कुर्सी,
देश को बर्बाद करने वाली सरकार हो तुम
@aajtak@ravishndtv@RahulGandhi