नीदरलैंड्स के केंद्रीय बैंक ने देश का कई टन सोना उत्तरी अमेरिका से बाहर शिफ़्ट कर दिया है. इस साल की शुरुआत में फ्रांस ने भी ऐसी ही घोषणा की थी. वहीं जर्मनी के बुंडेसबैंक ने विदेशों में रखे 216 टन से अधिक सोने को शिफ़्ट किया था.
आख़िर यूरोप के देश अपना सोना क्यों शिफ़्ट कर रहे हैं? जानिए इस रिपोर्ट में.
रिपोर्ट: माइकल रेस
आवाज़: संदीप राय
वीडियो एडिटर: अल्ताफ़
नाविका:- (मोदी जी के काम पर सवाल)
स्मृति ईरानी:- ये आदमी इसकी मां मर गई 😳
वंदे-भारत को झंडा दिखाने चला गया, क्या बात कर रहे है आप, दाह संस्कार के बाद
इन्होने बडी एक सभा करके नेताओ को इकट्ठा नही किया... मेरी पित की उम्र का है
मेरे बाप के गिरेबान तक आपका हाथ पहुचा है तो ये मेरी गलती है
नाविक:- लेकिन विपक्ष का काम होता है देश मे हो रहे मुद्दे पर सरकार से सवाल करना
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हमें RSS की विचारधारा या किसी भी सड़ी फ़िल्म को समझने का शौक़ नहीं ।
सरकार असली बातों का जवाब दे,
और 3 दिन में सेना बनाने वाले अरुणाचल जाकर दिखाएँ।
इस सरकार की साख और नरेंद्र मोदी की छवि ख़त्म हो चुकी,
सिर्फ़ WhatsApp Uncle इनका Base हैं,
वो भी हट जाएंगे 😏
लोग जिस “विचारधारा” के चक्कर में जीवन भर गोल-गोल घूमते रह जाते हैं,
उसका फ़ायदा उठाकर RSS वाले विदेश घूमते हैं।
आम आदमी छोटे से क़र्ज़ के लिए यातना सहते ख़तम हो जाता है,
ये उसी से लूटकर अमेरिका में Lobbying करते हैं,
यही RSS का सच है।
देश के सभी हिंदुओं और बाक़ी सब की तरह, ये लोग अपना ब्यौरा दें,
नाटक बंद करने का समय आ गया है।
ZEE टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा में 'सुरख़ाब के पर' लगे हैं क्या भाई?
कर्ज था 22006 करोड़ का , चुकाया 6.5 करोड़ और कर्जमुक्त मुक्त हो गए ?
यानि कुल कर्ज का सिर्फ 0.03 फ़ीसदी चुकाकर फ्री हो गए ?
इसी देश में लाख - दो लाख के बकाये पर बैंक वाले रिकवरी एजेंट भेज देते हैं . कुर्की का ऑर्डर ले आते हैं और लाला जी पर ऐसी मेहरबानी?
NCLT में बैठे लोगों ने किसके कहने पर ये किया ?
मशहूर शायर और लेखक जावेद अख्तर साहब बड़ी दिलचस्प बात बता रहे हैं
@Javedakhtarjadu साहब का कहना है कि मुस्लिम लीग और आरएसएस और हिंदू महासभा इन तीनों की विचारधारा एक ही थी,
ये तीनों हमख्याल संघठन हैँ,
ये तीनों भारत छोड़ो आंदोलन के खिलाफ थे
जिन्ना और सावरकर दोनों अंग्रेजों के वफ़ादार थे,
यह तीनों गांधी जी से नफरत करते थे
पूरा सुनिए,
केजरीवाल जी तो अलग लेवल पर रोस्ट कर रहे है 😂
लगता नहीं मोदी जी ये माफ कर पाएंगे
इथेनॉल बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है
इस मुद्दे पे आंदोलन हो गया तो
1 ओर कुर्सी जाएगी
AI भी कमाल चीज है , ट्रेन यात्रा के दौरान चमत्कृत कर देने वाले इस गोल की सोशल मीडिया की क्लिपिंग को जब मैने लगातार कई बार देखा तो बगल वाली बर्थ का बच्चा बोला अंकल ये AI जेनरेटेड है .. देखिए नेमार दाहिने पैर से बॉल उछाल रहा फिर जब वो उछल रहा तो वो पैर उसका बांया हो जा रहा और फिर दाहिने से किक मार रहा.. और दर्शकों में फ्रांस का झंडा है .. हमने बेवजह दो- पांच मिनट बर्बाद किए .. आपने भी तो नहीं ??
🔋 मोबाइल कब चार्ज करें? 20% या 30%… सच्चाई जान लो
आजकल ज़्यादातर लोग फोन को या तो 0% तक चला देते हैं या फिर 100% तक चार्ज करके छोड़ देते हैं। लेकिन Lithium-ion battery के हिसाब से ये आदतें बैटरी को जल्दी खराब कर देती हैं।
यहीं आता है ‘80-20’ रूल 👇
• फोन को 20% के आसपास चार्ज लगाओ
• और 80% पर निकाल लो
क्यों जरूरी है?
जब बैटरी 0% तक जाती है, तो उस पर केमिकल स्ट्रेस बढ़ता है
और 100% तक चार्ज करने पर हाई वोल्टेज से बैटरी गर्म होती है
बैटरी साइकिल का खेल 👇
हर फोन की बैटरी में करीब 300-500 चार्ज साइकिल होते हैं
बार-बार 100% चार्ज करने से ये जल्दी खत्म हो जाते हैं
लेकिन 80% तक चार्ज करने से बैटरी लाइफ ज्यादा लंबी चलती है
बिजली और सेफ्टी 👇
80% के बाद चार्जिंग धीमी हो जाती है और एनर्जी बर्बाद होती है
चार्जर को प्लग में छोड़ना भी बिजली खपत बढ़ाता है
एक्सपर्ट टिप्स 👇
• हमेशा ओरिजिनल चार्जर इस्तेमाल करें
• फास्ट चार्जिंग कम करें
• चार्ज करते समय कवर हटा दें
सीधी बात
अगर बैटरी को लंबा चलाना है तो ‘80-20’ रूल अपनाना शुरू कर दो
आप अभी कितने % पर फोन चार्ज करते हो? 💬
डॉक्टर रॉय की इस ख़ूबसूरत तस्वीर से एक व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस होता है… जब मैं NDTV में रहते हुए सालों #MoJo में मशगूल रहा तो @PrannoyRoy7749 ने कई बार मुझे सराहा।
मैंने 2021 में अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन राजदूत का ‘two cam interview’ अकेले दो मोबाइल फ़ोन सेट से कर दिया तो उन्होंने एक ट्वीट पोस्ट में लिखा कि रिपोर्टिंग का भविष्य इसी तरह का होगा…
उनकी दूरदर्शी निगाह ने मानो भविष्य पढ़ लिया हो…
डॉक्टर रॉय की ये तस्वीर वर्तमान है 🙏
मुकेश मोहन के साथ जो हो रहा है, वह सिर्फ़ एक पत्रकार/क्रिएटर पर दबाव नहीं, बल्कि सवाल पूछने और बोलने की आज़ादी पर सीधा हमला है। तथ्यों और तर्कों के आधार पर कंटेंट बनाने पर 50 करोड़ की मानहानि नोटिस और FIR लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। हम मुकेश मोहन के साथ खड़े हैं। असहमति का जवाब दमन नहीं, जवाब और बहस होनी चाहिए।
@MukeshMohannn
#IStandWithMukeshMohan
भाई @MukeshMohannn को सिर्फ़ इसलिए FIR और इंटरस्टेट जाकर थाने के चक्कर लगवाए जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने कारवाँ मैगज़ीन को क्वोट करके एक इंस्टा रील बनाई थी। आर्टिकल क्वोट करने पर FIR हो रही हैं। मंत्री @nitin_gadkari जी ऐसा करके आप अपयश ही कमा रहे हैं। अरबों का कारोबार है एक इंडिविजुअल जर्नलिस्ट को परेशान करके आप जनहित नहीं कर रहे। आपको लड़ाई लड़नी है कारवाँ मैगज़ीन से लड़िए। अपनी ताक़त एक सामान्य इन्फ़्लुएंसर पर क्यों दिखा रहे हैं?