आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
उप्र में भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के कारण ईमानदार अधिकारी निम्नलिखित कई तरह के दबाव में हैं :
- कमीशनख़ोरी से भ्रष्टाचार करने
- भाजपाइयों को टेंडर दिलवाने में हेराफेरी करने
- ट्रांसफ़र-पोस्टिंग को धंधा बनाते हुए पैसे लेने
- चंदा-पर्ची कटवाकर वसूली करवाने
- विपक्ष पर झूठे मुक़दमे लगाने
- हिरासत में किसी को मरवाने
- विरोधियों के फ़ेक एनकाउंटर करवाने
- एनकाउंटर का डर दिखाकर पैसे ऐंठने
- पीडीए के अत्याचार को दबाने-छिपाने
- कारोबारियों से धन उगाहने
- बलात्कार-अपहरण के केस दबाने
- भाजपाइयों के क़ब्ज़े के मामले छुपाने
- प्रदेश की सीमाओं पर माल इधर-से-उधर करवाने
- मिलावट के मामलों को शुद्ध बताने
- किसान, मज़दूर, महिलाओं, युवाओं के उत्पीड़न पर मुँह फेर लेने
- छूआछूत के मामले दबवाने
- मंदिर चोरी के केस में एफ़आइआर न करवाने
- किसी माननीय की छवि को हर हाल में लीपापोती करके बचाने…
… ऐसे और भी अनगिनत कारण हैं जहाँ भाजपा सरकार अधिकारियों पर अनैतिक-अवैध काम करने का दबाव बनाती है, जिसकी वजह से उन्हें त्यागपत्र तक देना पड़ जाता है।
ईमानदार अधिकारियों के बिना कोई शासन-प्रशासन नहीं चल सकता है।
भाजपाई JPNIC जैसी अद्भुत सिग्नेचर बिल्डिंग को सिर्फ़ बेच सकते हैं, उतना बड़ा कभी सोच नहीं सकते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार ने उनकी सोच को संकीर्ण, कुंठित और संकुचित कर दिया है।
भाजपा जाएगी, बड़ी सोच आएगी!
क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप?
- सदन में अखिलेश यादव को युवाओं के मुद्दे पर बोलने से रोका गया,
आखिर सरकार चाहती क्या है कि जो कोई भी युवा के साथ है उसका इस तरीके से विरोध करती है।
कितनी भयावह दृश्य कर दिया था सरकार ने,
फिर भी युवाओं ने संघर्ष किया,
सरकार ने शर्मसार कर दिया 🥺
ये स्वतंत्रत भारत की तस्वीर है जिसमें शिक्षा के लिए लाठियां खानी पड़ रही है।
मैंने भी डिम्पल यादल को इतने गुस्से में नहीं देखा। डिम्पल जो बात कह रही हैं किसी का भी सब्र जवाब दे सकता है मगर वे आपे से बाहर नहीं हैं। अपनी बात मज़बूती से रख रही हैं। एक युवा लड़की जिस भरोसे के साथ महिला सांसद से शिकायत करती है, महिला सांसद उस भरोसे को बनाए रखती हैं।
सत्य और अहिंसा के पुजारी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन।
बापू के आदर्श हमें न्याय और शांति की राह का अनुसरण करने के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे।🙏
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम श्री अजीत पवार जी का विमान दुर्घटना में निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।
शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
भावभीनी श्रद्धांजलि !