@Shelby_2724@dranuj_k तू शक्ल क्या अपनी बहन के लिए देख रहा है
तो मैं बता दूं मै शादीशुदा हूं और मैं खुश हूं
वैसे एक बात और मेरी अच्छी खासी salary भी है।
@newabhivictory@dranuj_k वैसे मनु की ब्राह्मणवादी लोगों से जो जन्म से श्रेष्ठ होने का दावा करते हैं उनसे पूछिए कि दुनिया में कितने आविष्कार किए ।
और भाई मै आपको बता दूँ मैने भी इनटायर पॉलिटिकल साइंस से MA किया है 😜
मैं चाहता हूँ कि आरक्षण की आग और भड़के।
हिटलर ने प्रोपेगंडा फैलाया था कि जर्मनी के सभी रिसोर्सेज पर Jews ने कब्जा कर लिया है। Jews जर्मनी को दीमक की तरह खा गए है। उसने जर्मन्स को इस बात का पूरा यकीन दिला दिया था कि जर्मनी की हर समस्या की वजह Jews है। हालांकि यह बात सच नहीं थी।
परिणामत: जर्मन्स एक हो गए। फिर जो हुआ, बताने की जरूरत नहीं है।
लेकिन भारत की हर समस्या की जड़ में कौन लोग है? कौन लोग है जिन्होंने मीडिया, जूडिशीएरी और ब्यूरोक्रेसी तक को अपने जहरीले पंजों में जकड़ रखा है? बाकी छूट-पूट पदों संस्थानों का तो छोड़ ही दीजिए।
वो लोग हैं ब्राह्मणवाद की बीमारी से बीमार लोग। यह कोई प्रोपगंडा भी नहीं है क्योंकि समय-समय पर आने वाले आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं।
अब मुझे डर है कि भारत में कहीं कोई हिटलर जैसा पागल न उठ खड़ा हो। जो ब्राह्मणवाद से पीड़ित लोगों को ये यकीन दिला दे कि उनकी पीड़ा के पीछे की वजह कौन लोग है।
उस एक ही आदमी का उठ खड़ा होना, भारत के भाग्य को बदल कर रख देगा। उस एक क्रांति का परिणाम यह होगा कि हजारों सालों से चली आ रही भारत की व्यवस्था बदलेगी।
यह व्यवस्था बदलना इस लिए भी जरूरी हो गई है क्योंकि जिस व्यवस्था के आस-पास भारतीय समाज फंक्शन कर रहा है, उस व्यवस्था ने भारतीय समाज को जाति की साङांध से ज़्यादा कुछ नहीं दिया है। इसी साङांध में भारतीय समाज जी रहा है, जीवन यापन कर रहा है।
यह व्यवस्था अब तक बदल जानी चाहिए थी। लेकिन नहीं बदली। जबकि जीवन का नियम है बदलाव, बदल जाना। इस मौलिक नियम को भूलकर भारतीय समाज पत्थर हो गया। एकदम डबरा। जैसा था वैसा ही।
लेकिन अब परिस्थियाँ कह रही है कि उस हिटलर के उठ खड़े होने का वक़्त आ गया जो इस डबरे रूपी भारत की मूल समस्या पर वार करे और इस व्यवस्था को बदल दे।
क्या सोचते हो?
Copied.
@MediaHarshVT सरकारों से सवाल पूछने के बजाय, सरकारों के उत्तरदायित्व तय करने के बजाय पूरी जवानी दलाली में गुजारी और अब बुढ़ापे का भी लिहाज़ नहीं रहा वही दलाली, चरण चाटुकारिता ।
क्या इसका कारण भी युवाओं से जलन है।
धिक्कार है ऐसे जीवन पर।
@Sanatnimaneesh समान शिक्षा की बात क्यों नहीं करते हो, जातिविनाश की बात क्यों नहीं करते हो, संसाधनों पर समान कब्जा की बात क्यों नहीं करते हो
समान प्रतिनिधित्व की बात कब करोगे।
@nishikant_dubey@RahulGandhi@INCIndia अपने बच्चे की कितनी चिंता है और दूसरे के बच्चे के भविष्य से , जीवन से और सपने से खिलवाड़ इनकी सरकार करें।
इसे ही दोहरा चरित्र कहा जाता है।
बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने हेतु ये युवाओं की भीड़ बता रही है कि देश में मोदी सरकार के प्रति कितना गुस्सा है।लेकिन हर हर चुनाव में इनकी जीत केवल EVM के द्वारा ही संभव है। बाकी मीडिया तो चरण वंदना बहुत पहले से ही कर रही है।
जय भीम ✊
2014 के बाद अंधभक्तो की भर्ती में इन जाहिल टाइप के बूढ़ों की भर्ती बड़े पैमाने पर हुई है इनकी विशेषता इस प्रकार है
1.ये सब चड्डीधारी है।
2. Retired होते है या retirement के करीब होते है।
3. पूर्व के कांग्रेसी रहे हैं
4. इनका मुख्य ठिकाना बड़े शहरों की बड़ी कालोनियों है या अपार्टमेंट है।
5. इनमें अधिकांश ब्राह्मणवादी और पाखंडी और जातिवादी भी होते है।
इस लिए इन जाहिलों से आज के युवाओं को अपने बचाना चाहिए।