बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ साथी और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी की सशक्त आवाज़, आदरणीय श्री उमाशंकर सिंह जी के निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
उनका जाना केवल बसपा परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के वंचित, शोषित और जरूरतमंद लोगों के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। बीमारी से संघर्ष करते हुए भी उन्होंने जिस साहस और समर्पण के साथ अपने लोगों और पार्टी के प्रति अपना दायित्व निभाया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।
आज हमने एक जनप्रतिनिधि ही नहीं, बहुजन मिशन का एक समर्पित सिपाही खो दिया है।
इस दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों के साथ हैं। प्रकृति उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
कद आदमी का उसके जलसे की भीड़ से नहीं आंकना चाहिए
असल कद तो उसकी अन्तिम यात्रा से पहचाना जाना चाहिए
जिंदगी में तो हर कोई अपना होने का करता है दावा
देखना हो कौन अपना है, तो उसके जनाज़े में जाना चाहिए
~श्मशान सिंह
इस तरह के फैसले से न्यायलय से विश्वास खत्म होता है.जहाँ गरीबों की हत्या का भी सौदा होता है.माननीय सुप्रीम कोर्ट इस फैसले की जाँच कर दोषी लोगों को मौत की सजा दे. और बिकाऊ लोगों को भी जेल में डालने का काम करे.@arjunrammeghwal ,@narendramodi ,@rashtrapatibhvn संज्ञान लें और दोषियों को फाँसी की सजा दिलायें.
कॉलेजियम सिस्टम भंग करो,
न्यायपालिका में आरक्षण लागू करो।
भ्रष्ट Collegium System की आड़ में मी लॉर्ड लोग बस अपने सजातीय बेटे, बेटी, दामाद, भतीजे.. को ही जज नियुक्त करते हैं। यही वजह से है कि SC, ST एवं OBC समुदायों के लोग जजों की लिस्ट में नदारद होते हैं। #AbolishCollegium
1.जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त पर अमल करने वाली सर्वसमाज-हितैषी अम्बेडकरवादी पार्टी है और यूपी में चार बार रही सरकार भी इसी के आधार पर चलायी है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति व चुनावी स्वार्थ आदि की ख़ातिर जग ज़ाहिर तौर पर गिरगिट की तरह ही रंग बदलती रहती है।
2.इसी क्रम में सपा द्वारा प्रचारित इनका कथित ’पीडीए’ अर्थात् (पिछड़ा, दलित, अक्लियत) में पहले ’पी’ से ’पिछड़े’ प्रचारित करने के बाद अब, अपरकास्ट समाज में ख़ासकर ब्राह्मण समाज को बी.एस.पी. से तेज़ी से जुड़ता हुआ देख व उसी के आधार पर ही पार्टी उम्मीदवार भी बनाये जाने से विचलित होकर, सपा ने अब ’पी’ से ’पण्डित’ कर दिया है, जो इनके राजनीतिक छल व छलावे का एक और जीता-जागता प्रमाण नहीं तो और क्या है?
3.ऐसे राजनीतिक छल व छलावे कि राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष का कुछ समय के लिए वक़्ती तौर पर थोड़ा भला तो हो सकता है, किन्तु इससे उस सम्पूर्ण समाज का भला कभी नहीं हो सकता है। इसलिए सर्वसमाज के लोगों को ऐसी छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी (सपा) व उसकी ऐसी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहना चाहिये, यह समय की माँग व सर्वसमाज के हित में भी है।- बहन @Mayawati जी
कुछ तो बात थी उस उमाशंकर सिंह नाम के कोहिनूर में जिसके जाने के बाद हर कोई भावुक होने पर मजबूर हो गया।
एक महिला रिपोर्टर का उनसे मिलने का सपना, सपना ही रह गया और रोते हुए कह रही है कि उनसे मिलकर एक इंटरव्यू लेना था लेकिन मैं सिर्फ सोचती रह गई कि उनसे मिलूँगी उनका जो कैरेक्टर है उनकी जो पर्सनल्टी है वह सामने से देखना है, लेकिन मौक़ा नहीं मिला।
अंतिम प्रणाम विधायक उमाशंकर सिंह जी !
पहली बारात तो किसी की भी बड़ी हो सकती है, अंतिम बारात सबकी बड़ी नहीं होती ! जीवन भव्य रहा, मृत्यु भव्यतम रही ! सादर नमन "जननेता" ! 🙏
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी विचलित करने वाली कड़वी सच्चाई से ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों में भारी चिन्ता व्याप्त है।
2. इसको लेकर मेरी चिन्ता का विशेष कारण यह भी है कि इस काण्ड के पीड़ितों से मिलने मैं खु़द भी वहाँ गयी थी और वहाँ सच्चाई का पूरा पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने की माँग की थी, किन्तु देश भर में इसके ख़िलाफ रोष व आक्रोश आदि होने के बावजूद 40 में से 35 आरोपी के मार्च महीने में बरी हो जाने की ख़बर कुछ और नहीं बल्कि दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही व उदासीनता आदि का ही परिणाम ज़्यादा लगता है।
3. वैसे अभी भी मौक़ा है जब गुजरात सरकार अपनी इस ग़लती में सुधार करते हुये इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी करके सभी दोषियों को सख़्त सज़ा दिलवाये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और दूसरों को सबक।
4. साथ ही, राज्य सरकार पीड़ित परिवार वालों के संतोष के मुताबिक वकील सरकारी ख़र्च पर उसी तरह मुहैया कराये, जिस प्रकार बी.एस.पी. की यूपी में मेरी रही सरकार ने ग़रीबों के लिये फ्री में क़ानूनी सहायता का क़ानूनी प्रावधान किया था।
समाजवादी पार्टी को सबसे ज्यादा डर बीएसपी से लगता है। इसलिए सपा वाले पीडीए- पीडीए चिल्लाते रहते हैं। लेकिन पीडीए पर भी टिकना इनके बस की बात नहीं है।
आदरणीय बहन जी ने सही कहा है कि
"सर्वसमाज के लोगों को ऐसी छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी (सपा) व उसकी ऐसी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहना चाहिये"
सपा के पीडीए का असली मतलब 'पब्लिक डराओ अभियान' है।
#बहनजी_का_संदेश
1.जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त पर अमल करने वाली सर्वसमाज-हितैषी अम्बेडकरवादी पार्टी है और यूपी में चार बार रही सरकार भी इसी के आधार पर चलायी है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति व चुनावी स्वार्थ आदि की ख़ातिर जग ज़ाहिर तौर पर गिरगिट की तरह ही रंग बदलती रहती है।
2.इसी क्रम में सपा द्वारा प्रचारित इनका कथित ’पीडीए’ अर्थात् (पिछड़ा, दलित, अक्लियत) में पहले ’पी’ से ’पिछड़े’ प्रचारित करने के बाद अब, अपरकास्ट समाज में ख़ासकर ब्राह्मण समाज को बी.एस.पी. से तेज़ी से जुड़ता हुआ देख व उसी के आधार पर ही पार्टी उम्मीदवार भी बनाये जाने से विचलित होकर, सपा ने अब ’पी’ से ’पण्डित’ कर दिया है, जो इनके राजनीतिक छल व छलावे का एक और जीता-जागता प्रमाण नहीं तो और क्या है?
3.ऐसे राजनीतिक छल व छलावे कि राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष का कुछ समय के लिए वक़्ती तौर पर थोड़ा भला तो हो सकता है, किन्तु इससे उस सम्पूर्ण समाज का भला कभी नहीं हो सकता है। इसलिए सर्वसमाज के लोगों को ऐसी छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी (सपा) व उसकी ऐसी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहना चाहिये, यह समय की माँग व सर्वसमाज के हित में भी है।
मानव जीवन के अंतिम क्षण में लोगों का यह हुजूम, आंखें नम हो जाएं, तो समझिएगा....
लोगों के बीच से कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि दिलों का फ़रिश्ता उनके बीच से गया।
क्षेत्र की जनता के अंतिम शब्द
मा. श्री उमाशंकर सिंह जी! 🙏🕯️💐
भीड़ जनता कि
आंशू जनता का
जनता बलिया कि
बलिया में पार्थिव शरीर ठाकुर का 🔥 🙏
गरीबों के मसीहा के अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़,
यह भीड़ ही प्रमाण है,एक जननायक का 🔥
@AmitShah, CBI और ED को स्व. उमाशंकर सिंह का यह कमाई (धन) देखना चाहिए 🙏💐
देख लो मौत पर जश्न मनाने वालो गीद्धो उमाशंकर जी ने बस बहन जी और पार्टी के दिलो में जगह नहीं बनायी थी बल्कि अपनी अवाम के दिलो में भी वो जगह बना कर गए हैं जिन्हे तुम लोग लाख नरेटीव फैला लो निकाल नही पाओगो
आज बलिया ही नहीं बल्कि पूरा प्रदेश शोक में डूबा हुआ है
@Mayawati
जब लोग ED,CBI और सत्ता के डर से पार्टी बदल लेते हैं उस विपरीत परिस्थिति में भी स्व• उमाशंकर जी ने बसपा का दामन नही छोड़ा
वो एक बार बसपा में आए और सदा के लिए बसपा के होकर रहे
ये ईमानदारी की गवाही है कि आप चाहे कितना भी डर दिखा लो अगर हम सच्चे/ईमानदार हैं तो हमे कोई नही डरा सकता
आज दिनांक 07-08-2026 को जनपद बलिया की रसड़ा विधानसभा के ग्राम खनवर स्थित बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता पार्टी के समर्पित साथी एवं रसड़ा विधानसभा से माननीय विधायक स्वर्गीय श्री उमाशंकर सिंह जी के आवास पर पहुँचकर पुष्प अर्पित कर अपनी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके परिजनों से भेंट कर भरोसा दिलाया कि इस दुःख की घड़ी में पूरी बहुजन समाज पार्टी आपके साथ है
कुदरत से कामना है कि शोकाकुल परिवार एवं उनके समस्त शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
विनम्र श्रद्धांजलि। 💐
#विनम्र_श्रद्धांजलि #उमाशंकर_सिंह #बसपा #बलिया #रसड़ा #जयभीम
@MrigendraSpeaks अगले दिन सुबह उनका फोन आया .. बोले भाई साहब आपका धन्यवाद.. केवल ये बताने के लिए फोन किया कि जब तक जिंदा हूं बीएसपी और बहनजी के साथ रहूंगा .. आप भी यही है .. मैं भी यही हूं .. क्या मर्द आदमी थे ..
समर्पित समर्पण उनका व्यक्तित्व परिचय ऐसी महान हस्ती को बार-बार नमन! 🙏💐
वर्ष 2022 का यूपी विधानसभा चुनाव था .. वोटिंग का दिन था.. मै बलिया की विधानसभा सीटों पर किसे पड़े वोट शीर्षक से उस दिन “माहौल क्या है” कार्यक्रम कर रहा था , शाम के कोई चार से पांच बजे का वक्त था .. मैं रसड़ा विधानसभा के एक बूथ पर पहुंचा ..
वोट देकर आने वाले मतदाताओं से पूछ रहा था कौन जीत रहा, किसकी सरकार बनेगी.. मतदाता कभी योगी जी का नाम लेता कभी अखिलेश का , तब ओम प्रकाश राजभर अखिलेश यादव के साथ थे . उनका उम्मीदवार उमाशंकर सिंह को कड़ी टक्कर दे रहा था .. पांच मिनट भी न बीते उमाशंकर सिंह वहां आ धमके ..उनके समर्थकों ने उन्हें जानकारी दे दी थी .. आते ही बहुत विनम्रता से उन्होने मुझसे बात की और कहा रसड़ा तो मैं जीतूंगा..
मैने उनका नाम बहुत सुना था .. मिला पहली बार .. जब वो अकेले बीएसपी से जीते .. तो रिजल्ट वाले दिन मैने स्टूडियो की डिबेट में कहा मुझे बीएसपी एक सीट पर सिमट जाएगी, इसका अंदाजा नहीं था ..और वो भी बीएसपी ने नही जीती उमाशंकर सिंह ने जीती.. उन्होने पैसा तो बहुत कमाया लेकिन जनता पर खर्च भी दिल खोलकर किया.. गरीबों की शादियां , माँ वैष्णो देवी, शिरडी के साई बाबा, अजमेर शरीफ की यात्रा इतने लोगो को कराई कि वही वोट दे दें तो वो जीत जाएंगे..पर वो बीएसपी में कब तक रहेंगे , ये बडा सवाल है ..
अगले दिन सुबह उनका फोन आया .. बोले भाई साहब आपका धन्यवाद.. केवल ये बताने के लिए फोन किया कि जब तक जिंदा हूं बीएसपी और बहनजी के साथ रहूंगा .. आप भी यही है .. मैं भी यही हूं .. क्या मर्द आदमी थे ..
चुनाव तो अपने बल पर जीतते थे .. लेकिन मरते दम तक पार्टी न छोडी .. यहां तो राज्यसभा जाने वाले पार्टी छोडने में मिनट नहीं लगा रहे .. नेता के रहमोकरम पर सदन में जाने वाले बहुतायत हैं और पार्टी बदलने वाले तो थोक में .. ऐसे में आर्थिक साम्राज्य खडा करने वाला एक विधायक तमाम आंधियो से टकराकर अकेला खडा रहा ..
इतिहास याद रखेगा कि पैसा कमाकर भी आदमी तना रह सकता है.. सियासत में जब जब वफादारी का नाम लिया जाएगा, उमाशंकर सिंह का तब तब उदाहरण दिया जाएगा...ईश्वर उन्हे अपने चरणों में स्थान दे...
:~ Rajeev Ranjan Bhaiya (@rajeevranjanMKH) (News24, "माहौल क्या है" वाले)