ये कन्नड़-कन्नड़ क्या है? ये कन्नड़-कन्नड़ क्या है? बेंगलुरु भारत से बाहर का इलाका है? भाषा को लेकर इसी कट्टरता का परिणाम है कि आजकल इनके राज्य से बाहर एक कुत्ता भी न इनकी भाषा न जानता है न सीखता है। अगर अपनी भाषा को फैलाना है तो उदार बनो। नौकरी तुम नहीं देते, कंपनियाँ देती हैं। उन कंपनियों से तुम्हारी कमाई होती है��� तुम्हारे बस-ऑटो ठसाठस भरे होते हैं और ओला-उबेर वाले दिन-रात ट्रिप करते हैं - ये कमाई किसके कारण होती है? फ़्लैट रेंट पर दे-दे कर जो कमाई करते हो, वो कमाई किसकी जेब में जाता है? देश में आने वाले वर्षों में कई IT हब होंगे। नोएडा-गुरुग्राम छोड़ भी दें तो पुणे और चंडीगढ़ जैसे शहर भी उसी दिशा में बढ़ रहे हैं।
कभी ऑटो पर लगा लेते हो कि हमारी भाषा सीखो, कभी हिंदीभाषियों के साथ बदतमीजी करते हो तो कभी झूठ का ���हसान झाड़ते हो कि 'हमने तुम्हें नौकरी दी।' तुमने नहीं दी बे। तुम्हारे यहाँ उस लायक नहीं था कोई, तभी बाहर से लोग गए। हालाँकि, उनकी भी कुछ मजबूरियाँ होती हैं, मसलन बिहार जैसे राज्य जिन्हें नेताओं ने बर्बाद कर दिया। लेकिन, उस मज़बूरी का फायदा ��ठाने वाले तुम कौन होते हो? कन्नड़ कुछ दिनों बाद खुद कर्नाटक में ठीक से नहीं बोला जाएगा। इनकी हिंदी फिल्मों को देखिए। 90% कन्नड़ फिल्मों में हिंदी गाने होते हैं (बिना डब)। ये हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं अपनी फिल्मों में।
और हाँ, एक बात बताना भूल ही गया मैं। कन्नड़ फिल्म 'KGF 2' का हिंदी डब वाले वर्जन ने दुनिया भर में ₹584 करोड़ की कमाई की थी अकेले, यानी आधा से भी ज़्यादा। इसी तरह एक अन्य कन्नड़ फिल्म 'कांतारा' ने भी हिंदी में तगड़ी कमाई की। अगर ये 'हमारी भाषा-तुम्हारी भाषा' का भेद हमारे भीतर होता न, तो इन फिल्मों पर थूकने भी नहीं जाते। तुम्हें विदेशी अंग्रेजी पसंद है, लेकिन भारत की हिंदी नहीं। इस अलगाववादी सोच से बाहर निकलो। गुजरात के सूरत में भी 50 लाख दूसरे राज्यों के प्रवासी रहते हैं। क्या कभी सुना कि उन्हें गुजरती बोलने को मजबूर किया जा रहा हो या भगाया जा रहा हो? गुजरात से सीखो। हम हिन्दीभाषी तो वैसे भी अपने क्षेत्र में सबका स्वागत करते हैं। यहाँ तक कि पंजाब में भी कभी यूपी-बिहार के लोगों को ये नहीं कहा गया कि पंजाबी सीखो वरना जाओ।
यही कारण है कि पंजाबी भाषा राज्य से बाहर निकली और इनके गाने हर क्षेत्र में करोड़ों व्यूज पाते हैं। तुम्हारी फ़िल्में बिना हिंदी डब के शायद ही कमाई कर पाएँ। कभी महाराष्ट्र में ऐसा ही माहौल ��ना दिया गया था, आखिर इसे बदलना पड़ा या नहीं? भाषाई कट्टरता तुम्हारे भाषा के अवसान का कारण बनेगी, याद रखो। उदार बनोगे तो जम्मू कश्मीर में भी कोई कन्नड़ बोलता मिल जाएगा। जबरदस्ती करोगे तो ऐसे ही सिमटती चली जाएगी तुम्हारी भाषा। खुद कर्नाटक में 150 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं, कन्नड़ के अलावा टुलु-कोंकणी वगैरह भी हैं।
डियर मिलार्ड !!
गैंगरेप, फिर गोली, फिर एसिड, फिर कुआं में फेंकने की घटना “राजस्थान” की है ,, आप मौन रहें?
राजस्थान करौली में लड़की को घर से अगवा कर गैंगरेप के बाद गोली मारी फिर एसिड से जलाकर कुएं में फेंक दिया?
अगवा के बाद परिजन थाने गये, पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की, परिजन घर चले गये, और लगातार अपनी बेटी को इधर-उधर ढूंढते रहे?
ये ना तो @myogiadityanath की फ्लीट है और न ही किसी केंद्रीय मंत्री की, लेकिन सड़को पर भौकाल मचाकर चलने वाला शहर का एक कारोबारी है, घर से निकलते वक्त इसके ये प्राइवेट गुर्गे व्यस्ततम होली चाइल्ड चौराहे पर ट्रैफिक रोक देते है वह मौजूद ट्रैफिक पुलिस तमाशबीन बनी रहती है, सड़क पर किसी को आगे तक निकलने नही देते, कोई वीडियो बना ले तो डिलीट कराने को धमकाते है��� पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा बेहद सख्त है तो इस पर कार्यवाई पर दिखाए गाड़ियो को सीज कर नजीर पेश करे और सरेआम बदतमीजी करने वाले बाउंसर्स को सलाखों के पीछे पहुचाये, ताकि कानून का राज हो सके। @Uppolice @112UttarPradesh @Gzbtrafficpol @ghaziabadpolice @DCPCityGZB @UPGovt
Tweets on Manipur
Supriya Srinate : 41
Bollywood celebs : 56
Zubair & Co. : 33
YouTubers : 87
Tweets on 6 month old baby girl a& 3 elders including 2 women burnt to death in Jodhpur
Supriya : 0
Bollywood celebs : 0
Zubair & Co. :0
YouTubers : 0
Hope you Got the Point
@narendramodi प्रधानमंत्री जी अब तो चीर निंद्रा से जागिए प्रभु और मणिपुर की वीभत्स घटना पर चुपी तोड़िए और उन नर पिशाचों को सजा दीजिए साथ में वीरेन सिंह का इस्तीफा लीजिए ,देश आपकी ओर उम्मीद से देख रहा है , इंसाफ किजिए सर जी।
मणिपुर में दो कुकी आदिवासी समुदाय की महिलाओं को नंगा करके भीड़ जानवरो की तरह नोंचकर दौड़ा रही है। यह असहनीय है। अत: पीएम @narendramodi से मांग है कि 72 घंटे के अंदर बीरेन सिंह का इस्तीफा हो जाना चाहिए व���्ना देशभर के आदिवासी इस अत्याचार के खिलाफ बिगुल बजाएंगे। #TribalLivesMatter
आप लोग शायद दिल्ली से सटे गाजियाबाद का निशा शर्मा को भूल गए होंगे!
निशा शर्मा को मीडिया ने रातों-रात पूरे भारत में हीर��� बना दिया था जिसने दहेज लोभी पति को दरवाजे से वापस लौटा दिया था!
हर चैनल पर मेहंदी लगाकर चुनरी ओढ़ कर निशा शर्मा इंटरव्यू देती थी उसके दरवाजे पर मीडिया के सैकड़ों ओ बी वैन खड़े रहते थे!
इस केस में जिस लड़के से निशा शर्मा की शादी तय हुई थी उसके और उसके पूरे परिवार की जिंदगी बर्बाद हो गई, लड़के की नौकरी छूट गयी, 1 साल जेल में रहा फिर 8 साल वह कोर्ट कचहरी के धक्के खाता रहा, लड़के की माँ सरकारी नौकरी में थी वह भी जेल जाने से सस्पेंड हो गई और लड़के के पिता की हार्ट अटैक से निधन हो गया।
दरअसल निशा शर्मा ने अपने बॉयफ्रेंड से शादी करने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा था।
कोर्ट ने भी अपने आदेश में यही कहा कि, निशा शर्मा ने जान-बूझकर यह नौटंकी की थी लेकिन, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह मजबूर है कि, वह निशा शर्मा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते और उन्होंने उस लड़के के पूरे परिवार को बाइज्जत बरी कर दिया।
लेकिन, सोचिए दिल्ली से गाजियाबाद जाकर 8 साल तक मुकदमा लड़ना, अपने पिता का दाह संस्कार करना उस लड़के के लिए कितना मुश्किल रहा होगा?
खैर निशा शर्मा को कुदरत ने ही सजा दी, उसकी सगी भाभी मनीषा शर्मा ने अपने पूरे ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का केस किया और उस केस में अब निशा शर्मा और उसका पूरा परिवार जेल में है।
कुदरत ने उस लड़के को न्याय तो दिया लेकिन, 13 साल के ब���द दिया ये कानूनी आतंकवाद है।
इसलिए, यदि भारतीय मीडिया किसी को हीरो की तरह पेश करे तब आप इमोशनल मत बनिए बल्कि शांति रखिए, भारतीय मीडिया हमेशा नकारात्मक लोगों को ही हीरो बनाती है।