लॉजिक की बात कर लेते मास्टर जी neet के छात्रों का भविष्य खराब नहीं होता दंगे भड़कने से लेकिन झारखंड में खराब हो जाएगा नौकरी नहीं मिलेगी।
यार बड़े चूतियां आदमी हो।
कैसी पत्रकारिता है ये? पहली बात, झारखंड में जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उनमें ज़्यादातर ग्रेजुएट हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि अगर ज़रा-सी भी बात बिगड़ी, FIR हो गई, तो सरकारी नौकरी का सपना हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। इसलिए उनका संयम उनकी समझदारी भी है और उनकी मजबूरी भी।
दूसरी बात, आप लोग बार-बार जंतर-मंतर और झारखंड की तुलना में ही क्यों उलझे हुए हैं? मान लीजिए जंतर-मंतर का आंदोलन आपको बिल्कुल पसंद नहीं था, बहुत खराब था... उससे क्या बदल जाएगा? असली सवाल तो यह है कि उसका नतीजा क्या निकला- शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा हो गया। उस आंदोलन के बाद संसद में चर्चा हुई, कानून आया, सरकार को ��वाब देना पड़ा।
और अगर झारखंड का आंदोलन आपको इतना ही अच्छा लग रहा है, तो स्टूडियो में बैठकर तारीफ करने से क्या होगा? जाइए, सरकार और छात्रों के बीच संवाद कराइए। यही तो पत्रकारिता का काम है- समाधान तक पहुँचने की कोशिश करना।