Social Activist,Teacher
open thinker
BEd,MSc ( BBAU Lucknow) ,MA Philosphy, MJ(journalism)
साख से टूट जाए वो पत्ते नहीं है हम
आंधियों से कह दो कि औकात में रहें
1. वैसे तो बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब विधानसभा आमचुनाव आदि में भी सर्वसमाज के कर्मठ व युवा प्रतिभाओं को पार्टी उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश पर भी अमल जारी है, ताकि नई पीड़ी के ज़रिये देश में आपेक्षित अम्बेडकरवादी राजनीति एवं संवैधानिक मूल्यों का तेज़ी से विकास हो सके।
---और भारतीय संविधान का मानवतावादी, समतामूलक व सेक्युलर उद्देश्य ज़मीन पर लागू हो सके और सभी लोग सही से फल-फूल सकें, जैसाकि यूपी में बी.एस.पी. की चार बार रही सरकारों में क़ानून द्वारा क़ानून के आयरन लेडी राज के साथ ही जनहित, जनकल्याण एवं विकास आदि के मामलों में बेहतरीन सरकार होना साबित रहा है।
2. इस क्रम में, सड़क, बिजली पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बंधी लोगों की अहम ज़रूरतों के साथ ही सरकारी नौकरी, रोज़गार, स्कूल, अस्पताल, शहरी व ग्रामीण विकास आदि के साथ ही ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ की भी बुनियादी ज़रूरतों पर मज़बूत इच्छाशक्ति के साथ कार्य किया गया और जिस क्रम में अनेकों स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, छात्रावास, ट्रेनिंग सेन्टर व पार्क आदि की स्थापना की गयी और इन प्रयासों के कारण लोगों का मजबूरी का पलायन होना भी काफी रूका हैै, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता है,
---किन्तु विरोधी पार्टियों के घोर जातिवादी रवैयों के कारण बी.एस.पी. की सरकार सन 2012 में पाँचवी बार यहाँ सत्ता में नहीं आ सकी, जिसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को अभी तक भी है, क्योंकि बी.एस.पी. सरकार के जाने के बाद से यहाँ पूरे प्रदेश में क़ानून द्वारा क़ानून का राज कायम नहीं होने से लोगों का जीवन दुखी ही नहीं बल्कि काफी त्रस्त भी बना हुआ है तथा विकास का सरकारी ढिंढोरा लोगों का पेट भी सही से नहीं भर पा रहा है।
3. ऐसे में पार्टी के लोगों को फिर से यह कहना है कि वे बी.एस.पी. का उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों को ही चुनें तथा युवा वर्ग को भी प्राथमिकता दें जिसमें महिला व पुरुष दोनों होने चाहिये, तो यह उचित होगा।
4. इसके साथ ही, यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी. द्वारा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के जिस कारवाँ को लगातार मज़बूत करने व आगे बढ़ाकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके ’अपना उद्धार स्वंय करने योग्य’ बनाने के मिशन की बात है तो इसकी सफलता हेतु किसी का भी रोड़ा बनना मुझे कतई भी स्वीकार नहीं है अर्थात मुझे केवल अपने ’बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण व उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की ही रात-दिन चिन्ता रहती है, अपने किसी भी सगे भाई-बहन व उनके परिवार के युवा सदस्यों, तथा नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को भी मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह मैंने भी, उन्हें पार्टी के कार्यों तक सीमित करके उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद व अन्य किसी भी राजनैतिक लाभ आदि के पदों से हमेशा दूर रखा है।
5. इतना ही नहीं बल्कि मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को और अन्ततः सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को अपने साथ रखने की भी ज़रूरत पड़ी है जो यह मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियों को भी काफी लम्बे समय से निभा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठायें तो यह पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सही नहीं होगा।
6. इसीलिए आज मेरा अन्तिम यही फैसला व प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में, अब इनके ख़ासकर किसी भी बेटे को बी.एस.पी. में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा। यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुये श्री आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी ज़रूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनैतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनन्द को, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है, उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे ज़रूरतानुसार अपनी ख़ुद की ज़िम्मेवारी भी सौंप सकते हैं।
---लेकिन वे अपने दोनों बेटों को व आगे चलकर उनके युवा बच्चो में से किसी को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौपेंगे। साथ ही, यह भी कहना है कि अपनी बेटी के तैयार नहीं होने पर फिर वे पार्टी की आम सहमति से केवल पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी सौंप सकते हैं अर्थात् अपने किसी भी बेटे को व उनके बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौंपेंगे। यही वर्तमान में समय की जरुरत है व पार्टी के हित में भी है।
---ताकि मान्यवर श्री कांशीराम जी जिस प्रकार से ’परिवारवाद’ आदि के विरुद्ध कायम रहे, उनकी शिष्या होने के नाते मैं भी उसी प्रकार से पूरी तरह डटी हूँ , और जैसाकि मैंने काफी कुछ इस पर अमल करके भी दिखाया है और यदि मैं लड़की नहीं होती, तो मैं फिर मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही अपने भाई-बहिनों आदि में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखती। लेकिन मैं लड़की होने की वजह से अपनी सुरक्षा सम्बन्धी, हर परेशानी से मुक्त होकर व पूरे मान-सम्मान के साथ पार्टी में आगे बढ़ती रहूँ तभी मुझे अपने सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को मजबूरी में अपने साथ रखना पड़ा है। और अब इनके बच्चों के बड़े व शादीशुदा होने पर काफी कुछ मुझे भी झेलना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी मैं किसी के भी मोह आदि के चक्कर में ना पड़कर पार्टी को कोई भी नुकसान नहीं पहुचने दूँगी।
7. इसी प्रकार पार्टी संगठन में व आगे सरकार बनने पर भी, चाहे वह कोई भी हो, केवल सम्बन्धित उसी एक व्यक्ति को ही मौक़ा दिया जायेगा, लेकिन उसकी आड़ में उसके परिवार के अन्य किसी भी सदस्य को कोई भी लाभ आदि नहीं दिया जायेगा, ताकि बी.एस.पी. अब आगे परिवारवाद से मुक्त रहे तथा सर्वसमाज में से ज़्यादा से ज़्यादा लोग ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ आन्दोलन के सहभागी बन सकें, जो कि अम्बेडकरवादी राजनीति के लिये बहुत ज़रूरी है।
8. इसके साथ ही बी.एस.पी. के लोगों से यह भी कहना है कि वे बी.एस.पी. विरोधी पार्टियों/संगठनों तथा जातिवादी मीडिया व सोशल मीडिया आदि के भी विषैले एवं साज़िशी तथा प्रायोजित व पेड paid प्रोपेगण्डा आदि से ज़रूर सावधान रहें क्योंकि इनका मक़सद केवल साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के घिनौने हथकण्डे अपनाकर बी.एस.पी. को यूपी में सरकार बनाने से रोकना है, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने देना है और इन्हें पूरे तन, मन, धन से लगातार अपने अम्बेडकरवादी मिशन में लगे रहना है, इसी में ही सबकी भलाई है यानी कि व्यापक देश व जनहित निहित है।
9. अन्त में यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया आदि में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने आदि के कारण बी.एस.पी से निष्कासित लोगों को वापस लिया जायेगा, यह पूरी तरह से ग़लत एवं मिथ्या प्रचार है यानी कि यह फेक न्यूज़ है अर्थात ऐसे लोगों को बी.एस.पी में कतई भी वापस नहीं लियाा जायेगा।
"बहन मायावती जी अपने वायदे से मुकर गईं।"
अभी कल बहन जी ने कहा था कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लेते हैं तो आकाश आनंद को BSP में पुनः पद के साथ काम करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
आज सुबह अशोक सिद्धार्थ जी ने राजनीति से संन्यास ले लिया। उन्होंने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और पद तक का त्याग कर दिया, लेकिन उनके संन्यास के बाद बहन जी अपने ही कहे हुए वादे से पीछे हटती दिखाई दे रही हैं। अब उनका तर्क है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद की नीयत में अभी भी खोट है।
इसके लिए आपने दो तर्क दिए हैं;
पहला, अशोक सिद्धार्थ ने कल के पोस्ट के तुरंत बाद राजनीति से संन्यास क्यों नहीं लिया? चूंकि उन्होंने आज सुबह संन्यास लिया, इसलिए कुछ घंटों की देरी को उनकी नीयत में खोट और राजनीतिक अभिलाषा बरकरार रहने का प्रमाण माना गया।
लेकिन क्या किसी व्यक्ति को अपनी जिंदगी के इतने बड़े फैसले पर कुछ घंटे सोचने और शांत होकर परिस्थितियों को समझने का भी अधिकार नहीं है? राजनीति से संन्यास लेना कोई सामान्य घोषणा नहीं है। वर्षों की राजनीतिक यात्रा को एक झटके में समाप्त करने का फैसला है। इसके बावजूद उन्होंने कुछ ही घंटों में संन्यास ले लिया और कहा कि संन्यास तो बहुत छोटी चीज है, बहन जी के लिए तो जान भी हाजिर है।
दूसरा, आकाश आनंद ने बहन जी के कल के पोस्ट को रीट्वीट नहीं किया। इसलिए यह निष्कर्ष निकाल लिया गया कि उन्हें पार्टी और मूवमेंट से अधिक अपने रिश्तों की चिंता है।
बहन जी, आप देश की इतनी बड़ी नेता हैं। फिर भी इतना हल्का और बचकाना तर्क? क्या किसी व्यक्ति की पार्टी के प्रति निष्ठा अब किसी पोस्ट को रीट्वीट करने से तय होगी? सिर्फ आपका पोस्ट रीट्वीट न करने के कारण आपने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। हद होती है। कोई व्यक्ति दुख में हो सकता है, आहत हो सकता है, चुप रह सकता है। हर चुप्पी विद्रोह अथवा साजिश नहीं होती है।
बहन जी, शायद आपको अंदाजा भी नहीं है कि आप जिस तरह बार-बार आकाश आनंद को सार्वजनिक रूप से जलील कर रही हैं, वह Human Dignity के खिलाफ है। कोई भी व्यक्ति लगातार ऐसी परिस्थितियों में मानसिक रूप से टूट सकता है। आप स्वयं कल्पना कीजिए कि आकाश आनंद कितनी वेदना, पीड़ा और घुटन में जी रहे होंगे। ऐसे समय में उनसे ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहने की उम्मीद करना ही अपने आप में असंवेदनशील है।
मुझे दुख इस बात का है कि करोड़ों बहुजनों की आदर्श नेता होने के बावजूद इतनी गंभीर परिस्थिति में इतनी छोटी-छोटी बातों पर आकाश आनंद को जलील कर रही हैं।
असली खेल धूर्त पदाधिकारियों का है, जो वर्षों से बहन जी को गुमराह करके पार्टी को खोखला करने में लगे हुए हैं। बहन जी को यह समझना ही होगा कि जो पदाधिकारी हर बात को अपने हिसाब से छानकर नेतृत्व तक पहुंचाते हैं, जो अपने हित के मुताबिक दूसरों को अच्छा-बुरा साबित करते हैं, दरअसल वही लोग पार्टी और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दीवार बने हुए हैं। और संगठन को सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं लोगों से है।
अपने आसपास के उन धूर्त पदाधिकारियों को पहचानिए, जो अपनी कुर्सी, प्रभाव और अकूत धन की लूट को बचाए रखने के लिए जानबूझकर पार्टी को पारिवारिक कलह में धकेल दिए हैं। अगर कोई व्यक्ति पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत करने के बजाय आंतरिक कलह से अपना प्रभाव मजबूत कर रहा है, तो वह पार्टी का हितैषी नहीं हो सकता।
करोड़ों बहुजनों की पहुंच बहन जी तक डायरेक्ट होनी चाहिए, लेकिन अफसोस कि आज वह धूर्त पदाधिकारियों के चंगुल में फंस चुकी हैं। ये वही लोग हैं, जो हर उस मिशनरी की बात को तोड़-मरोड़कर बहन जी तक पहुंचाते हैं, जो पार्टी में कुछ अच्छा करने और मूवमेंट को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है। जब ये लोग भूखे गिद्धों की तरह आकाश आनंद का राजनीतिक करियर नोचने पर आमादा हैं, तो सोचिए हम जैसे सामान्य कार्यकर्ताओं की बिसात ही क्या है।
इन मक्कार पदाधिकारियों की कुर्सी बचाना आसान है, लेकिन एक पूरी पीढ़ी के राजनीतिक भविष्य को नुकसान पहुंचने के बाद उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
बहन जी, आपके आसपास के पदाधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन यह आंदोलन और करोड़ों बहुजनों की उम्मीदें स्थायी हैं। इसलिए किसी भी पदाधिकारी को आपके और बहुजन समाज के बीच दीवार मत बनने दीजिए। जिस दिन आम मिशनरी अपनी बात सीधे आप तक पहुंचा सकेगा और आप बिना किसी फिल्टर के जमीनी सच्चाई सुन पाएंगी, उसी दिन आपको पता चलेगा कि ये धूर्त एवं मक्कार पदाधिकारी आपको क्या बता रहे थे और जमीन पर वास्तव में क्या हो रहा है। इस चंगुल से बाहर निकलना अब सिर्फ आपकी मजबूरी ही नहीं, बल्कि बहुजन आंदोलन के भविष्य की जरूरत भी है। आपको इस चंगुल से बाहर निकलना ही होगा।
आपका शुभचिंतक: सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
@Mayawati आकाश आनंद को आप प्रोजेक्ट कर रहीं हैं या उनका राजनैतिक कैरियर बर्बाद कर रहीं हैं
यह समझ से परे है
खैर सबकी उम्मीद यही है कि बहुजन समाज का आप ने ना कभी बुरा किया है न ही करेंगी
चुनाव नैरेटिव का खेल है
जो पार्टी नैरेटिव बनाएगी लड़ाई जीतेगी
बेस वोट पर्दे के पीछे से लड़ाई लड़ता है
अन्य जातियों का समूह आगे रखा जाता है
ऐसा कांशीराम के समय में होता था जिसका नतीजा भी दिखाई दिया बसपा राष्ट्रीय पार्टी बन गई।
इसी विषय पर आज कांशीराम से अब तक वीडियो करूंगा ।
परम आदरणीय बहन जी सादर चरण स्पर्श!
माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब श्री कांशीराम जी और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं। आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है। आप मेरी राजनैतिक गुरू हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूँ । आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।
परमपूज्य आदरणीय बहन जी, मेरे आराध्य तथागत भगवान गौतम बुद्ध और मेरे राजनीतिक आदर्श मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी की क़सम खाता हूँ , कि मैंने कभी भी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आपके खिलाफ कुछ भी करने का तो मैं सपने में भी सोच नहीं सकता हूं। मेरा और मेरे परिवार का ये पूरा जीवन आपका ऋणी है। आदरणीय बहन जी, आपकी एक-एक नसीहत और आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द हैं।
आदरणीय बहन जी, माननीय आकाश जी को सलाह देना तो दूर बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में लगे जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी।
मान० बहन जी हमारी पार्टी के ही कुछ साथी मुझे आपसे मिले सम्मान के कारण मुझ पर ये आरोप लगाते हैं कि मैं पार्टी पर कब्जा करना चाहता हूं, मैं माननीय आकाश आनंद जी को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं...इसमें लेशमात्र भी सच्चायी नहीं है! आदरणीय बहन जी मैं आपसे विनम्र निवेदन के साथ कहा रहा हूं कि ये मेरे राजनैतिक विरोधियों की साजिश है ,जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिसकी सच्चाई एक न एक दिन आपके सामने ज़रूर आ जाएगी।
आदरणीय बहन जी, मेरी आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि मेरे सन्यास लेने को आप आकाश जी की वापसी से मत जोड़िए, माननीय आकाश आनंद जी मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं, और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा। उनका अच्छा-बुरा आप किसी और से ज्यादा बेहतर समझती हैं, उनको वापस जिम्मेदारी देना या ना देना ये आपका फैसला है !🙏 इसे मेरे सन्यास लेने से जोड़ कर आप मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को उसकी हैसियत से ज्यादा महत्त्व दे रही हैं।
आदरणीय बहन जी, आप खुद में त्याग और दया की मूर्ती हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्य मंत्री की कुर्सी और राज्यसभा के सदस्य पद को भी ठोकर मार दी, आदरणीय बहन जी, आप हमारी मार्गदर्शक ही नही हमारी आदर्श भी हैं, और अगर आज आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतो , गुरुओं और महापुर्षों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनैतिक और सामाजिक जीवन से सन्यास ले रहा हूं। आदरणीय बहन जी, मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में सन्यास तो बहुत छोटी चीज है आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।
ससम्मान , जय भीम!! जय भारत!!!
जय बहुजन समाज!
आपका कार्य कर्ता
अशोक सिद्धार्थ
नोट- देरी के लिए क्षमा प्रार्थी!!!
बी.एस.पी. के विधायक श्री उमाशंकर सिंह जबसे बी.एस.पी. में आये हैं उन्होंने पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपनी ज़िम्मेवारी निभाई है और आजतक इनके क्षेत्र से इनके बारे में किसी भी प्रकार की अवैध तरीके़ से सम्पत्ति अर्जित करने या अन्य कोई भी ग़लत कार्य करने की शिकायत नहीं आई है।
हालाँकि पिछले लगभग दो वर्षों से वे काफी गंभीर बीमारी से जूझ रहें हैं, ऐसी स्थिति में आयकर विभाग को अगर इनके सम्बन्ध में कोई शिकायत मिली थी तो वे इनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर इनके ठीक हो जाने के उपरान्त इनसे पूछताछ कर सकते थे। हम कोई इस विभाग के कार्य में दख़ल नहीं दे रहें, लेकिन आज जिस तरह से इन पर अति-गंभीर बीमारी के दौरान कार्रवाई की गयी है वह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है और मानवता के ख़िलाफ है।
बिहार में भावी मुख्यमंत्री @yadavtejashwi जी के अलावा जिस नेता का सबसे ज़्यादा क्रेज़ है, उसका नाम है @yadavakhilesh. बदलेगा बिहार, जीतेगा बिहार. समाजवादी क़ुनबे की एका जिंदाबाद. महागठबंधन ज़िंदाबाद.
इमरान शकील खान तथ्य, रिसर्च करके डेटा देने वाला मुस्लिम है। यह खतरा है। इसे निपटाओ : समाजवादी समर्थक
*****************************************
तेज प्रताप यादव लगातार चुनाव प्रचार कर रहे है। इंहा तक कि;
1.आरजेडी पर वार कर रहे है।
2.तेजस्वी पर कर रहे है।
3.हर वो कार्य कर रहे है जो RJD को नुकसान पहुचाये।
लेकिन तेजस्वी यादव ने;
"extremist (चरमपंथी) ओवेशी को कहा है"
और इस पर जो उर्मिलेश यादव, रवीश पांडे, से लेकर तमाम बुद्धिजीवी पत्रकार, सोशल मीडिया के पत्रकार;
"तेज प्रताप यादव पर एक कार्यक्रम तक नही बना रहे है"
और;
"मुस्लिम यह नही पूछ पा रहा कि राजनैतिक मत भिन्नता में औवेशी "चरमपंथी" कैसे हो गए?"
श्री अखिलेश यादव व लालू प्रसाद यादव व फैमिली का में इसलिए कायल हूँ कि "एक मुस्लिम नेता" उनके सामने चुनाव लड़ रहा है तो उसे आराम स चरमपंथी कह दो।
इसी प्रकार;..
"इमरान शकील खान नाम के व्यक्ति काफी प्रसिद्ध है। बसपा के लिए लिखते है क्योंकि उनके पिताश्री भी कट्टर बसपाई रह चुके है। इससे अलग उनके पास ज्ञान है, तथ्य है और उसी के आधार पर लिख रहे थे
लेकिन
समाजवादी पार्टी व उनके समर्थको पदाधिकारीओ को लिए यह सबसे बड़ा गुनाह लगा की मुस्लिम होकर कैसे लिख रहा है और वो भी समाजवादी पार्टी के पक्ष में क्यो नही लिख रहे। क्योंकि "में भी समाजवादी" वालो का मानना है कि मुस्लिम है तो आँख, दिमाग बन्द करके सपा आरजेडी के लिए कार्य करे, वोटदे, बहस करे। इससे ज्यादा न सोचें"
इसलिए
"सरकारी सेवा से सस्पेंड करवाने की धमकी शकील को दे दी। इससे शकील कुछ दिन के लिए चले गए। फिर लिखने आए तो फिर से समाजवादियो ने धमकियां दी दी कि नौकरी से निकलवा देंगे"
जबकिं;
"हजारो भाजपाई जो सरकारी नौकरी में है, खुलकर सपा को टारगेट करते है, राजनैतिक पोस्ट करते है। उनमे से एक को भी कभी सपा वालो ने धमकी दी हो तो दिखाए। ऐसा भी नही की वो जानते नही। लिखने वाले समय समय पर बता देते है कि वो सरकारी सेवा में है"
में 2006 से सोशल मीडिया पर कट्टर समाजवादियों से बहस कर रहा हूँ, तबके दौर में "में भी समाजवादी" वाले कट्टर हिन्दू थे, शुद्र दलितो को समझते थे, गालियां अपशब्द दलितो को जितनी अच्छी तरह से यह देते है, उसका 5% भी सामान्य वर्ग नही दे सकते। में तबसे लेकर सैकड़ो यादव सरकारी अधिकारियो को जानता रहा जिनसे काफी विवाद हुआ लेकिन;
"उनकी शिकायत कभी नही करी"
लेकिन सपा वाले;
"एक मुस्लिम को सहन नही कर सके क्योंकि वो मुस्लिम इमरान शकील ज्ञान रखता है, उंसके पास तथ्य है, उसे सुना जाता है और रिसर्च में वो सपा के पक्ष में नही लिख रहा तो यह सपा वालो के लिए सबसे बड़ा गुनाह हो गया"
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP
एक लाल टोपी भैया है आजकल बहुत नामकरण कर रहे हैं,
किसी को B team बोलते हैं,
किसी को यह A team,
किसी को C team,
अब बिहार में एक नया नाम दे दिया है P team.
आज हम भी इनका एक नाम नामांकरण कर देते हैं आज से लाल टोपी वाले जितने भी हैं अगर किसी को B team बोले तो आप लोग इनको T team बोलना!
T - Tonti Chor
T - Ticket Chor
T-team
अब सभी साथी लिखिए T team.
#t_team
@BhanuNand@BHEEM_BAUDH@Ravindra_Jatav9@RameshwarDhan12
लक्ष्मण यादव धोखेबाज नहीं हैं दलितों,
तुम मूर्ख हो जो किसी से भी "जय भीम" सुनते ही नाचने लगते हो। लक्ष्मण अपनी जाति के प्रति पूरा ईमानदार हैं। इसीलिए वह सपा और RJD का साथ खड़े हैं।
लक्ष्मण यादव को तुमने ही मंच, माइक और टिकट.. देकर सेलिब्रिटी बनाया है। अब अपनी मूर्खता Enjoy करो।
क्या बहन जी के अलावा किसी ने इतना स्पष्ट बोला?
मुझे लगता है कुछ को छोड़कर ज्यादातर मुस्लिम फिर भी बहन जी का समर्थन नहीं करते
तो मुस्लिम समाज के लोगों को मेरा एक संदेश है कि भाई जिस दिन बहन जी ने मुस्लिम समाज के लिए बोलना बंद कर दिया मुस्लिम समाज भारत में अछूत हो जाएगा
यू.पी. के जिला प्रयागराज के थाना धूमनगंज अन्तर्गत मुण्डेरा चुंगी के पास दो पक्षों में मामूली बात को लेकर कहासुनी में एक दलित व्यक्ति की नृशंस हत्या की घटना तथा राजधानी लखनऊ में पेशाब आदि जैसी घटनाएं मीडिया में चर्चा में हैं।
उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों में भी होने वाली ऐसी अमानवीय घटनाएं अति-निन्दनीय व चिन्तनीय।
ऐसे बेलगाम हो रहे आपराधिक, अराजक व सामंती तत्वों के खिलाफ उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्यों की सरकारें सख़्त कार्रवाई करके अपने-अपने राज्यों में क़ानून के राज को ज़रूर स्थापित करें ताकि इस प्रकार की शर्मनाक व हिंसक घटनाओं की बढ़ती प्रवृति पर रोक लग सके अर्थात् जनहित में क़ानून का सख़्ती से अनुपालन ज़रूरी।