भारत सरकार ने अब PSLV रॉकेट तकनीक को भी निजी कंपनियों को सौंपने का रास्ता खोल दिया है।जैसा कि अक्सर इस तरह के फैसलों का नतीजा निकलता है तो इस बार भी अडानी ग्रुप ही इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए सबसे आगे खड़ा है!
PSLV कोई साधारण रॉकेट नहीं है। इसकी तकनीक का संबंध उन प्रणालियों से भी है जिनसे भारत के अग्नि मिसाइल कार्यक्रम का विकास हुआ। इंडियन स्पेस एसोसिएशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट (सेवानिवृत्त) खुद कह चुके हैं कि रॉकेट तकनीक का उपयोग मिसाइलों में भी किया जा सकता है।
PSLV पर 33 वर्षों का सार्वजनिक निवेश लगा है। 61 सफल मिशनों का अनुभव और हजारों वैज्ञानिकों की मेहनत इसमें समाई हुई है। अब सरकार इसे निजी क्षेत्र को हस्तांतरित करने की तैयारी में है। पात्रता की शर्त? लगभग 400 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार होना चाहिए!
इससे पहले:
• एयरपोर्ट निजी हाथों में गए।
• बंदरगाह निजी हाथों में गए।
• कोयला खदानें निजी हाथों में गईं।
• रक्षा उत्पादन के अनेक क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोले गए।
• सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश किया गया।
• SSLV तकनीक HAL को 511 करोड़ रुपये में हस्तांतरित की गई।
अब बारी PSLV की है।
सवाल यह नहीं है कि निजी क्षेत्र को भागीदारी क्यों दी जाए। सवाल यह है कि 140 करोड़ भारतीयों के कर के पैसे से विकसित राष्ट्रीय संपत्तियों का मूल्यांकन कैसे हो रहा है, उनका नियंत्रण किसके हाथ में जाएगा और उनकी जवाबदेही किसके प्रति होगी?
क्या इस पर संसद में विस्तृत बहस हुई?
क्या कोई सार्वजनिक सुरक्षा ऑडिट जारी हुआ?
क्या कोई स्वतंत्र निगरानी तंत्र घोषित किया गया?
सरकार कहती है कि यह सुधार है। समर्थक कहते हैं कि इससे दक्षता बढ़ेगी। पूछा जाना चाहिये कि नहीं कि क्यों देश की सबसे मूल्यवान सार्वजनिक परिसंपत्तियाँ धीरे-धीरे एक सीमित कॉरपोरेट समूह के हाथों में केंद्रित की जा रही हैं?
सोचने में कोई मुश्किल थोड़ी है! — जब एयरपोर्ट, बंदरगाह, खदानें, बिजली परियोजनाएँ और रक्षा क्षेत्र लगातार एक खास समूह के पक्ष के लिए निजीकरण की राह पर हैं, तो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का अगला बड़ा लाभार्थी कौन होगा?
यह घटना राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के टपूकड़ा क्षेत्र की बताया जा रहा है।
राजस्थान पुलिस के नियमों के अनुसार ड्यूटी पर तैनात किसी भी पुलिसकर्मी या अधिकारी के लिए निर्धारित वर्दी (Uniform) पहनना अनिवार्य है। यदि कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान लोअर और टी-शर्ट में चालान काटता है या जनता के साथ अनुचित व्यवहार करता है, तो इसकी जांच की जानी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
यदि वीडियो में दिखाई गई घटना वास्तविक है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए। कानून का पालन करने की जिम्मेदारी आम नागरिकों के साथ-साथ कानून लागू करने वाले अधिकारियों की भी होती है।
@PMOIndia@RajCMO@PoliceRajasthan@BhajanlalBjp
असम : गुवाहाटी में बिजनेसमैन गौतम बरुआ ने पत्नी का जन्मदिन फ्लाईओवर पर सेलिब्रेट किया। फ्लाईओवर के ऊपर रेड कारपेट बिछाई। आतिशबाजी छोड़ी गई। वहीं पर जश्न हुआ। पुलिस ने गौतम बरुआ और पत्नी सहित 14 लोगों को कस्टडी में लिया। 4 गाड़ियां जब्त की गईं।
अमेरिकी विदेश विभाग की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी मॉरिसन ने कहा:
“1993 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार के तीन वर्तमान कैबिनेट मंत्री और लगभग 150 भारतीय सिविल अधिकारी अमेरिकी सरकार द्वारा प्रायोजित एक्सचेंज कार्यक्रमों का हिस्सा बने”
अब समझ में आई मोदी की अमरीकी भक्ति?
"तुम्हारी मां का चो#@"
गाजियाबाद, यूपी में आफताब की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पीड़ित परिजनों ने सड़क जाम कर दी। जाम खुलवाने पहुंचे इंस्पेक्टर ने खूब गालियां दी।
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अब अपने उच्च अधिकारी जो की IPS एवं PPS रैंक के होते हैं उनके द्वारा किए गये घोटाले एवं उनकी पोल सिपाही लगातार खोल रहे है
योगी सरकार में IPS एवं PPS अधिकारियों पर कई घोटाले के आरोप सामने आए एवं सिपाहियों शोषण किया गया है
@umashankarsingh मुझे यह जानना है कि हमारी सरकार, न्यायपालिका आदि में जो जज लगे हुए है उनकी नागरिकता कैसे सिद्ध होगी बताया जाए कौन से ऐसे पेपर है जो उनके पास है और जनता के पास नहीं है
पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं:- विदेश मंत्रालय
आधार नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं:- गृहमंत्रालय
जन्म प्रमाणपत्र नागरिकता का प्रमाण नहीं है :- बांबे हाईकोर्ट
वोटर आईडी नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं:- केंचुआ
निवास प्रमाणपत्र नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है:- कलकत्ता हाईकोर्ट
भाई फिर नागरिकता का प्रमाणपत्र क्या है????
अपंजीकृत संघ द्वारा जारी प्रमाणपत्र?
सवाल यह है कि यदि सरकार द्वारा जारी हर प्रमाणपत्र नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है तो ?
देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और तमाम मुख्यमंत्री, मंत्री समेत देश के सभी सांसद और विधायक देश के नागरिक हैं कि नहीं?
वह अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगे?
नोएडा में 158 करोड़ रुपए लगाकर बस टर्मिनल बना. साल 2022 में CM योगी ने इसका उद्घाटन किया.
अब ये टर्मिनल बंद पड़ा हुआ है. यहां से एक भी बस नहीं चलती.
सोचिए- जनता के 158 करोड़ रुपए लगाकर इतनी बड़ी इमारत बना दी, लेकिन उसका इस्तेमाल तक नहीं किया जाता.
📍यूपी
अमरीका ईरान युद्ध शुरू हुआ तब कच्चा तेल 72 डॉलर प्रति बैरल था।
यह फिर से वापस 76 डॉलर आ गया है लेकिन हमारे यहां दूर की आपदा में नजदीकी अवसर देखकर तेल के दम बड़ा दिए गए।
अब ये बड़े हुए दाम वापस होने से रहे। गर्व कीजिए कि आपकी जेब कटती रहेगी।
आप तृणमूल और शिवसेना, और खाड़ी के तेल में उलझे रहे, इधर सरकार ने ट्रैफिक चालान के नियमों में आपका तेल निकालने की तैयारी कर दी है।
5 चालान कटते ही अब ऑटोमैटिक आपका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द हो जाएगा।
आप पहले चालान को लोक अदालत में चैलेंज कर सकते थे बिना किसी शुल्क के, लेकिन अब आपको चालान की आधी धनराशि पहले जमा करनी होगी, तभी सुनवाई होगी।
सरकार को पैसे की बहुत जरूरत है, चालान आपको बिना बताए पुलिस काटती रहेगी और आप भुगतते रहना।
#TrafficRules #BJP