@ABTMM2527 शीर्षक: नारी – गरिमा की ज्योति, दिव्यता की धारा
नारी केवल एक अस्तित्व नहीं,
वह सृष्टि की सुंदर परिभाषा है।
उसकी मुस्कान में शांति,
और उसके हृदय में करुणा की भाषा है।
वह संस्कारों की दीपशिखा,
त्याग और प्रेम का आधार है।
उसकी गरिमा शब्दों में नहीं,
उसके आचरण में साकार है।
To be
दीयों की जगमग में मैं खोजूँ आत्मा की ज्योति,
अंतर्मन में उजियारा — यही है मेरी दिवाली की प्रेरणा स्रोत।
बाहर की रौशनी तो क्षणभर का सुख देती है,
अंतर की शुद्धता ही सच्ची ज्योति रहती है।
सच्ची मेरी दिवाली तब होगी जब अंतर्मन खिलेगा,
अहिंसा का दीप जब हर हृदय में जलेगा।
# Kavita250
@KavitaTwoFifty@ABTMM2527 #abtmm# Kavita Zaroor. Yahan Shanti aur Ahinsa par 4 lineon ka muktak (kavita ke roop mein) prastut hai:
मन में जब तक प्रेम नहीं है, बाहर कैसी शांति?
हर प्राणी में आत्मा देखो, मिटाओ सारी भ्रांति।
अहिंसा ही वह दीप है, जो राह हमें दिखाए,
जीयो और जीने दो, यही सच्चा धर्म सिखाए।