@mufaddal_vohra@bcci bhai sahab ba...di ki bhi sima hoti hai , kon isko captain banaya, videshi pitch par 10 bol thik se indian player nahi khel paa raha hai, is lo...e ko pata bhi hai irlend se 2 match haar gaya, koch videshi laao
काश! बिहार के लोग पढ़े लिखे होते तो वहां लौंडा नाच जैसी चीजें नहीं होती,
अब कुछ फैक्टचेकर आयेंगे और कहेंगे कि ये वीडियो तमिलनाडु का है और मैं बिहार के बारे में अफवाह उड़ा रहा
@thebiharoffice बिहार में भागलपुर की स्थिति सबसे खराब है, कहलगांव घाट पर गंगा पार करने के लिए नाव चलती है, एक छोटी सी नाव में 300 के करीब लोग बैठे रहते हैं, नाव की स्थिति भी काफी खराब है मगर कोई देखने वाला नहीं है! @dmbhagalpur@samrat4bjp
@samrat4bjp महानुभाव, पंचायती राज व्यवस्था ख़त्म कर दे यह भ्रष्टाचार का मुख्य अड्डा बन चुका है, जिस हिसाब से इसमें भ्रष्टाचार हो रहा है एक दिन यह भी अपराध का अड्डा बनेगा!!!
हर व्यक्ति को इसे पढ़कर चिंतन अवश्य करना चाहिए।
एक कटु सत्य:-
1. पुरुष बूढ़ा होता है, जबकि स्त्री परिपक्व होती है।
2. जैसे ही पुरुष अपने बच्चों की शादी कर देता है और परिवार की आर्थिक नींव मजबूत कर देता है, परिवार में उसका वरिष्ठ और सम्मानित स्थान धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।
3. इसके बाद उसे बोझ समझा जाने लगता है — चिड़चिड़ा, गुस्सैल और अनिश्चित स्वभाव वाला बूढ़ा व्यक्ति।
4. जिन कठोर निर्णयों से उसने कभी पत्नी और बच्चों के लिए व्यवस्था बनाई थी, आज उन्हीं निर्णयों की चीर-फाड़ होकर आलोचना होती है; एक न एक कारण से उसे दोषी ठहरा दिया जाता है। और यदि वास्तव में उससे कोई गलती हुई हो — तो भगवान ही रक्षा करे।
5. वृद्ध स्त्री को, इसके विपरीत, बच्चों और बहुओं से सहानुभूति मिलती है — क्योंकि उसके माध्यम से अभी भी कई काम करवाने होते हैं।
6. सही समय आने पर वह समझदारी से पति के पक्ष से बच्चों के पक्ष में चली जाती है।
7. जब पति उम्र में बड़ा हो, तो पत्नी बहू के साथ तालमेल बना लेती है, ताकि बेटा उससे दूर न हो और उसकी देखभाल करता रहे।
8. पुरुष ने जीवन में चाहे कितनी ही महान उपलब्धियाँ हासिल की हों — बुढ़ापे में वे किसी काम नहीं आतीं।
9. जबकि वृद्ध स्त्री अपने पुराने पुण्यों का ब्याज जीवन भर पाती रहती है।
10. जिन लोगों के पास पैतृक संपत्ति या खेती होती है (जिसकी बच्चों को अब भी इच्छा रहती है) उनकी स्थिति थोड़ी बेहतर होती है। लेकिन जिन्होंने भविष्य के झगड़ों से बचने के लिए समय से पहले संपत्ति बाँट दी — वे अक्सर उपरोक्त ही दुःखद स्थिति का सामना करते हैं। इसलिए संपत्ति समय से पहले न बाँटना ही बेहतर है।
11. किसी भी अस्पताल में चले जाएँ , रिश्तेदारों की आँख देखकर ही पता चल जाता है कि भर्ती वृद्ध पुरुष है या वृद्ध स्त्री। यदि वृद्ध पुरुष हो, तो उसकी बेटी को छोड़कर शायद ही किसी की आँख नम होती है।
12. निष्कर्ष: जैसे ही पुरुष वृद्ध होता है, उसे सीख लेना चाहिए कि दूसरों से किसी भी प्रकार की अपेक्षा न रखे। याद रखें , मनुष्य जीवन भर विद्यार्थी है। समझ लें कि इस संसार में कोई किसी का नहीं है। विरक्ति, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के साथ जीना सीखें।
13. सुझाव:
आपने दूसरों के लिए क्या-क्या किया , यह सोचना भी छोड़ दें, और इस बारे में बात करना भी बंद कर दें।
14. प्राचीन शास्त्रों में कहीं भी ऐसा उदाहरण नहीं मिलता कि किसी स्त्री ने वानप्रस्थ या संन्यास ग्रहण किया हो।
15. ये आश्रम केवल पुरुषों के लिए निर्धारित थे। इनके महत्व को समझें, तब ज्ञात होगा कि हमारे पूर्वज कितने दूरदर्शी थे।
मैं कौन हूँ?
सेवानिवृत्ति के बाद,
न नौकरी,
न कोई दिनचर्या,
और घर की चुप्पी...
तभी मैंने स्वयं को पहचानना शुरू किया।
मैं कौन हूँ?
कोठियाँ बनाईं,
फार्महाउस खड़े किए,
छोटे-बड़े अनेक निवेश किए,
और आज…
चार दीवारों के भीतर सीमित हो गया हूँ।साइकिल से मोपेड,
मोपेड से बाइक,
बाइक से कार , गति और शान का पीछा किया,
पर अब कमरे के भीतर
धीरे-धीरे अकेले चलता हूँ।
प्रकृति मुस्कुराकर पूछती है।
“कौन हो तुम, मेरे मित्र?”
और मैं कहता हूँ,
मैं... बस मैं।
दुनिया के कई राज्य, देश और महाद्वीप देखे,
पर आज मेरी यात्रा
ड्रॉइंग रूम से किचन तक है।
संस्कृतियाँ-परंपराएँ समझीं,
पर अब मन
बस अपने परिवार को समझना चाहता है।
प्रकृति हँसकर फिर पूछती है ,
“कौन हो तुम, मेरे मित्र?”
और मैं कहता हूँ,
“मैं... बस मैं।”
कभी जन्मदिन, सगाई, विवाह — सब धूमधाम से मनाए, आज बस अच्छी नींद और भूख लगना ही
मेरी खुशी है।
प्रकृति पूछती है,
“कौन हो तुम?”
और मैं उत्तर देता हूँ —
“मैं... बस मैं।”
सोना-चाँदी-हीरे जवाहरात
लॉकरों में सो रहे हैं।
सूट-ब्लेज़र
अलमारियों में ठहरे हैं।
और मैं ,
नर्म सूती कपड़ों में,
सरल और स्वतंत्र।अंग्रेज़ी-फ्रेंच-हिंदी सब सीखी,पर अब
माँ की बोली में बात करने में सुकून मिलता है।
काम के लिए अनगिनत यात्राएँ कीं,
और अब
उन फायदों-नुकसानों को
सिर्फ यादों में तौलता हूँ।
व्यवसाय चलाए,
परिवार सँवारा,
अनेकों संबंध बनाए,
और आज
सबसे सच्चा साथी
पास का पड़ोसी है।
कभी हर नियम का पालन किया,
शिक्षा के पीछे भागा —
पर अब जाकर समझ आया कि वास्तविक मायने क्या हैं।
जीवन के उतार-चढ़ाव के बाद, शांत क्षण में
आत्मा ने कहा,
बस अब…तैयार हो जाओ,
हे यात्री…
अंतिम यात्रा की तैयारी का समय आ गया है…
प्रकृति ने कोमलता से पूछा
“कौन हो तुम, मेरे मित्र?”
और मैंने कहा —
हे प्रकृति,
तुम ही मैं हो…
और मैं ही तुम हूँ।
कभी आकाश में उड़ता था, आज धरती को नम्रता से छूता हूँ।
क्षमादान दो…
एक और अवसर दो जीने का…
पैसे कमाने की मशीन नहीं,
बल्कि एक सच्चे इंसान के रूप में, मूल्यों के साथ,
परिवार के साथ,
प्रेम के साथ!
@Agribih kya map-tol bibhag aapke tahat aata hai ?
Mahoday, ek baar mandiyon me janch karwaye, kam tolna ab vikreta apna adhikar samajhti hai , madhepura aur saharsa me halat bahut gambhir hai !!!
@JM_Scindia@bsnl_care@BSNLCorporate महोदय बीएसएनएल का 3 सिम खरीदने के बाद एक एक्टिव हुआ,एक्टिव हुए आज करीब 15 दिन हो गए मगर बीएसएनएल केयर के माध्यम से अभी तक वेरिफाई नहीं हुआ है,1507 काम नहीं कर रहा है,123 आधे घंटे से गाना सुना रहा है। क्या सरकार बीएसएनएल को बंद करना चाहती है?
बच्चों के नाम, उम्र और मौत की तारीख
1. सुहानी (18) 23 जनवरी 2025
2. कविशा (8) 18 फरवरी 2025
3. विनीता (18) 11 मार्च 2025
4. किरण (19) 13 अप्रैल 2025
5. हिमानी (13) 6 मई 2025
6. बबलू (7) 28 जून 2025
7. संदेश (10) 23 जुलाई 2025
8. ध्वनि पारुल (12) 6 अगस्त 2025
9. पार्वती (20) 14 सितंबर 2025
10. कार्तिक (7) 16 अक्टूबर 2025
11. कुमकुम (18) 26 अक्टूबर 2025
12. स्वर्णा (12) 11 नवंबर 2025
13. छोटू उर्फ अटल (18) 20 नवंबर 2025
14. कृष्णा साहू (19) 7 दिसंबर 2025
15. निहारिका (19) 24 दिसंबर 2025
16. पवन (16) 27 दिसंबर 2025
17. खुशी (17) 13 जनवरी 2026
ये उन बच्चों के नाम हैं जिनकी मौत पिछले एक साल में मध्य प्रदेश उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में हुई है। चौंकाने वाली बात ये है कि सबकी मौत का कारण भी एक ही बताया गया- ‘सांस लेने में तकलीफ।’ मध्य प्रदेश में ऐसे आश्रम दिव्यांग-अनाथ बच्चों और बुजुर्गों की देखरेख के लिए बनाए गये हैं। करीब एक साल पहले 10 बच्चों की मौत के बाद इंदौर के युगपुरुष आश्रम को बंद कर दिया गया था। बेहतर देखभाल का हवाला देकर वहां के 86 बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया था। जिनमें से 17 बच्चों की मौत हो चुकी है।
A discovery from Montana feels like it belongs in a science fiction script — but this one is entirely real. Scientists have confirmed that a 46-million-year-old mosquito fossil still contains traces of ancient blood inside its abdomen.
The specimen was originally unearthed in the 1980s from the Kishenehn Formation in Montana by geology student Kurt Constenius. For decades, it sat unnoticed in a basement collection. It wasn’t until retired biochemist Dale Greenwalt, working with the Smithsonian National Museum of Natural History, examined the fossil that its true significance was recognized.
Using advanced chemical techniques, researchers detected preserved heme — an iron-containing molecule found in blood. While any hope of recovering dinosaur DNA remains firmly in the realm of fiction (DNA does not survive intact for tens of millions of years), the presence of blood components is still extraordinary. It marks the oldest direct evidence that mosquitoes were already feeding on vertebrate blood during the Eocene epoch.
The fossil also highlights how unique the preservation conditions were in Montana’s Kishenehn Formation. Fine lake sediments and low-oxygen conditions allowed delicate biological structures — even chemical traces — to survive for millions of years.
Beyond the headline-grabbing “Jurassic Park” comparisons, this discovery provides valuable insight into ancient ecosystems. It confirms that complex host-parasite relationships were already established 46 million years ago, offering a rare biochemical snapshot of life in the deep past.
Source: Smithsonian National Museum of Natural History