बनारस में राजेंद्र प्रसाद सिंह अपने बेटे के लिए दवा लेने जा रहे थे। महानगर बस से सुंदरपुर के लिए बैठे। सीट के लिए एक यात्री से विवाद हो गया। मामला सुंदरपुर चौकी पहुंचा। दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह ने यात्री की जेब से 100 रुपए चुराने का आरोप लगाकर राजेंद्र को जेल में डाल दिया। जेल में पुलिस ने राजेंद्र को इतना प्रताड़ित किया कि उनकी मौत हो गई। मामले जी जांच दरोगा राधेश्याम को सौंपी गई। राधेश्याम ने कहा कि राजेंद्र ने अपने शॉल को फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। अगले दिन बीएचयू में पोस्टमार्टम हुआ। मंडलीय अस्पताल के डॉक्टर केके जैन ने पोस्टमार्टम किया और अपनी रिपोर्ट में बताया कि मौत फंदे की वजह से हुई है। पुलिस ने परिजनों को बिना बताये अंतिम संस्कार कर दिया।
राजेंद्र की पत्नी ने मानवाधिकार आयोग से इसकी शिकायत की। मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। तत्कालीन दरोग नरेंद्र प्रताप सिंह को 10 साल और राधेश्याम सिंह को 6 महीने की सजा हुई है। जानेमाने बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केके जैन को 5 साल की सजा और 40 रुपए का जुर्माना लगाया है। मामला 29 साल पुराना 1997 की है। अब जाकर फैसला आया है। सोचिए हमारा सिस्टम कितना भ्रष्ट और घुना हुआ है।