मानसिक बेचैनी बिल्कुल चरम पर है। नौबत ऐसी है की अभी मृत्यु भी आ जाये तो बहुत राहत होगी। खुद में ही गुम रहना, भीड़ से डर लगना।इनसब का जिम्मेदार मैं खुद को मानता हूँ। मैं ही कमजोर हूँ। मैं अवसादी दलदल का एक भुक्तभोगी हूँ...!!
रात से सुबह और शाम पुनः रात; यही चक्र चल रहा है। क्या बदलते हुए पहर को देखना ही ज़िन्दगी है?मैं पीड़ा के अंतिम छोर पर हूँ।अब दर्द निष्ठुर हो चुका है।शायद अब या तो एकान्त होने का समय है या मृत्यु नजदीक है। खुद को समय के साथ न ढालना आज जीवन मे पछतावे और आँसू के सिवा कुछ नही दे रहा।
विश्व में फैली रंगबिरंगी भारत की विदेश नीति के अनुरूप देश और सभी भाइयों को मित्रता, सौहार्द एवं भाईचारे का प्रतीक होली की हार्दिक शुभकामनाएँ॥
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रेवड़ी संस्कृति की ही तरह NPS बनाम OPS पर भी बहस छिड़नी चाहिए। बड़ी मुश्किल से लाए गए पेंशन सुधारों को चंद वोटों की ख़ातिर वापस लेना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय है। जो सरकारें OPS पर जा रही हैं वे जानती हैं कि इसकी कीमत वे नहीं बल्कि भविष्य की सरकारें चुकाएँगी।
Deeply anguished to hear about the sad demise of the Brand Investor Shri Rakesh Jhunjhunwala Ji. His contribution in inspiring millions of young Investors will always be remembered.
Heartfelt condolences to his family.
आजतक केवल भागता ही रहा हूँ। कभी अपनों के लिए, कभी खुद के लिए, कभी सपनों के लिए और कभी सुकून के लिए... यार अब थकान सी महसूस होती है। एक आवाज़ है जो मुझे अब ठहर जाने को कहता है। मुझे मौन होकर शांत होने को कहता है। दुनिया छोड़ कहीं दूर चले जाने को कहता है, हमेशा के लिए...!!!