#JusticeForTeachers
आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
वर्षों की सेवा, अनुभव और समर्पण के बाद बार-बार TET अनिवार्य करना शिक्षकों के सम्मान के साथ अन्याय है।
शिक्षक राष्ट्र निर्माता है, उसे अस्थिरता नहीं – स्थायित्व चाहिए।
हम योग्यता के विरोध में नहीं, लेकिन अनावश्यक पुनः परीक्षा "TET" के विरोध में अवश्य हैं।
वर्षों की सेवा, अनुभव और समर्पण के बाद बार-बार TET अनिवार्य करना शिक्षकों के सम्मान के साथ अन्याय है।
शिक्षक राष्ट्र निर्माता है, उसे अस्थिरता नहीं – स्थायित्व चाहिए।
हम योग्यता के विरोध में नहीं, लेकिन अनावश्यक पुनः परीक्षा "TET" के विरोध में अवश्य हैं।
वर्षों की सेवा, अनुभव और समर्पण के बाद बार-बार TET अनिवार्य करना शिक्षकों के सम्मान के साथ अन्याय है।
शिक्षक राष्ट्र निर्माता है, उसे अस्थिरता नहीं – स्थायित्व चाहिए।
हम योग्यता के विरोध में नहीं, लेकिन अनावश्यक पुनः परीक्षा "TET" के विरोध में अवश्य हैं।
वर्षों की सेवा, अनुभव और समर्पण के बाद बार-बार TET अनिवार्य करना शिक्षकों के सम्मान के साथ अन्याय है।
शिक्षक राष्ट्र निर्माता है, उसे अस्थिरता नहीं – स्थायित्व चाहिए।
हम योग्यता के विरोध में नहीं, लेकिन अनावश्यक पुनः परीक्षा "TET" के विरोध में अवश्य हैं।
वर्षों की सेवा, अनुभव और समर्पण के बाद बार-बार TET अनिवार्य करना शिक्षकों के सम्मान के साथ अन्याय है।
शिक्षक राष्ट्र निर्माता है, उसे अस्थिरता नहीं – स्थायित्व चाहिए।
हम योग्यता के विरोध में नहीं, लेकिन अनावश्यक पुनः परीक्षा "TET" के विरोध में अवश्य हैं।