अम्बुसागर पृष्ठ 22 पर कहा है कि:-
अपने सुख को गुरू कहावैं, गुरू कह कह सब जीव भुलावैं।
गुरू शिष्य दोनों डहकावैं, बिना सार शब्द जो गुरू कहावैं।।
अथवा पाँच नाम नहीं जाना। नारियर मोरहीं करें विज्ञाना।।
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कबीर, देही नाम सब कोई जाना। नाम विदेह बिरले पहचाना।।
भावार्थ:- देहीनाम का अर्थ है शरीर धारी माता से गर्भ लेने वाले प्रभु ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश, गणेश आदि के नाम तो सब जाप करते हैं, परंतु विदेह (कबीर जी) जो माता-पिता के सम्पर्क से बने शरीर रहित (शुक्रम अकायम् अशनाविरम कविर्देव यजुर्वेद अध्याय 5 श्लोक 8 में बताया है।) के मंत्र नाम को किसी बिरले ने पहचाना है। उस विदेह शब्द यानि सार शब्द ��िन मोक्ष नहीं। मैं घर-घर जाकर समझाता हूँ। मैं विदेह शरीर से प्रकट होकर परमात्मा की महिमा यानि अपनी महिमा बताता हूँ, परंतु कोई ध्यान नहीं देता।
@duttsanjay@ramsayz आप एक hero कहलाने वाले जनता के नजरो और परमात्मा के नजरो से zero हो क्योंकि आप बुराईयां लोगों में फैला रहे हो परमात्मा के दोषी हो @SaintRampalJiM ज़ी सत्य भक्ती बता रहे है
@ameesha_patel@RockyStarWorld The film is a people's entertainment but it will not make a difference, what is our job is true devotion which destroys the disease of our birth and death. @SaintRampalJiM
@narendramodi This world is all a false world, do not believe for a moment, when it will happen, it is a fake place of time, @SaintRampalJiM Zee tells this true devotion through which we can get immortal place.