🚨 "लोगों के दिमाग में बैठा दिया गया है कि ताजमहल को शाहजहाँ ने बनवाया था और यह प्रेम का प्रतीक है। मेरा दावा है कि यह मूल रूप से 'तेजोमहालय' नाम का एक हिंदू मंदिर था, जिसे 1156 ई. में "राजा परमार देव" ने बनवाया था। मेरे पास इस बात के सबूत मौजूद हैं।"
~वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जी जैन
#TajMahal
पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में मॉरीशस गया था। जहां भारतीय मूल के हिंदुओं से मित्रता हो गई। एक दिन एक परिवार मुझे अपनी कार से घुमाने ले गए।
रास्ते में डिक्टेट करने लगा, इधर ले चलो! उधर ले चलो! ड्राइव कर रहे युवा ने विचित्र नजरों से मुझे देखा। उसकी दृष्टि मात्र से पानी-पानी हो गया। क्योंकि समझ आ गया, मेरे तेवर भारत के पत्रकारों वाले हो गए है। जहां, पत्रकारिता का अर्थ है #मुफ्तखोरी!
एक तो युवा भारत का, अपने मूल धरती का हिन्दू समझ निशुल्क घुमा रहा है। भोजन भी कराया। परिवार से बुजुर्ग माता-पिता भी साथ आए। मेरे सम्मान में। और इन्हें अपना गुलाम समझ कर हुक्म दे रहा हूं। तत्काल क्षमा मांगी। सन्धा को घर में बैठ भारतीय पत्रकारिता की #बीमारी साझा की। पुनः क्षमा याचना की।
दरअसल यह कीमत #सलाद की नहीं है। इसी सलाद की कीमत दस ₹ भी होती, तो भी भारतीय पत्रकार पर भारी है। राजीव भी संभवतः मेरे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हैं, पत्रकार भी हैं। तो गढ़न से लेकर पत्रकार की मानसिक बीमारी खूब समझ रहा हूं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से थोक के भाव ब्यूरोक्रेट्स निकले हैं। इधर खड़ा है पत्रकार। तो सरकारी इंतजाम पर #मुफ्तखोरी की फसल लहलहाती है।
कीमत वस्तु की नहीं होती। कीमत वस्तु को प्राप्त करने के पीछे छिपी मानसिक कुंठा की होती है। सो सलाद की कीमत को लेकर तिलमिलाहट जायज है।
कांग्रेस या @yadavakhilesh की सरकार होती तो मन अशांत ना होता। @Mayawati जी के दौर में भी सस्ता सलाद मिलना असंभव था। फिर @myogiadityanath महाराज जी के समय मुफ्त की सलाद? वह भी #राम_नाम पर प्याज वाली सलाद? भूल ही जाइए, आपके भविष्य के लिए सुखद रहेगा।
@rajeevranjanMKH जो कुछ भी यहां लिखा, इसमे सिर्फ आप अकेले नहीं। भारतीय पत्रकारों में पाई जाने वाली आम #कुंठा है। जहां हरामखोरी, मुफ्तखोरी को पत्रकार अपना #विशेषाधिकार समझता है। अघोषित संवैधानिक अधिकार।
मैं कोई मनीष कश्यप का मुरीद नहीं। वो एक मौकापरस्त भाजपाई ही है।
पर एक कैबिनेट मिनिस्टर नितिन गडकरी उसे सार्वजनिक मंच पर बिना नाम लिए गदहा यूट्यूबर बोल रहा तो थोड़ा अजीब लगा।। फिर ध्यान आया भाजपाइयों से आप इसी जुबान की उम्मीद कर सकते हैं।
ट्रेन में सुहागरात का आइडिया सीरियसली कोई बुरा नहीं।
कमर्शियल तौर पर इसे प्रमोट किया जा सकता है।
कई बारातें ट्रेन से आती जाती हैं तो इसमें बुराई क्या है?
जब आप महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजन में लक्जरी सूट सरकारी तौर पर उपलब्ध कराते आए हो, गंगा में क्रूज़ पिकनिक करवा रहे हो तो ट्रेन में सुहागरात के कॉन्सेप्ट पर इतने नाराज क्यों हो?
इसमें कुछ भी बुरा नहीं है।
मुस्लिम यात्री:
"भाई, ज़रा म्यूज़िक बंद कर दीजिए।"
टैक्सी ड्राइवर:
"क्यों?"
मुस्लिम यात्री:
"म्यूज़िक इस्लाम मे हराम है।"
टैक्सी ड्राइवर:
"म्यूजिक क्यों हराम है?"
मुस्लिम यात्री:
"क्योंकि पैगंबर मुहम्मद के ज़माने में म्यूज़िक नहीं था।"
टैक्सी ड्राइवर:
"तो फिर आप भी उतर जाइए। उस ज़माने में कार भी नहीं थी... अभी ऊँट आकर आपको ले जाएगा!" 😂🤭😂
हमीरपुर पुलिस जब बेकसूर आदमी के टॉर्चर को खुद की मारी चोट बताती है तो दरअसल ये सिर्फ एक वक्तव्य नहीं, बल्कि एक शक्ति है जो ये कहती है कि हम मालिक जो बोलें गुलामों को वही मानना पड़ेगा. और इस शक्ति का केंद्र वही आदमी है जो नोटबंदी से लेकर एथनॉल तक जबरदस्ती आपके पिछवाड़े डाल रहा है.
🎙️पत्रकार -: बृजभूषण शरण सिंह ने बहुत बड़ा बयान दिया.....
🗣️अविमुक्तेश्वरानंद महाराज-: जिस आदमी ने राम मंदिर आंदोलन के लिए अपनी पूरी जवानी खपा दी जब उसे इस बारे में पता चला होगा तो उसको कितनी पीड़ा हुई होगा तभी........
अमेरिका से लेकर यूरोप तक आज पूरी दुनिया भारतीय टैक्स पेयर से ईर्ष्या कर रही है। बाकी दुनिया के लोग अपनी सरकार से पूछ रहे हैं कि जब भारतीयों को टैक्स के बदले इतने शानदार सरकारी अस्पताल, सरकारी स्कूल, इतनी शानदार सड़कें मिल रही हैं तो वहां की सरकारें उन्हें ऐसी सुविधाएं क्यों नहीं दे पा रही? आप भी वीडियो देखिए और जानिए कि यूरोपीय और अमेरिकी भारत से इतना क्यों चिढ़ते हैं।
[Indian Taxpayers, Indian Highways, Indian Government School, Indian Government Hospital, Nitin Gadkari, Tax Return]
#TaxReturn #NitinGadkari #IndianHighways
एक बहुत बेसिक सवाल आप सबसे पूछना चाहूंगा।
जब पेट्रोल में एथेनाल मिलाकर बेचना शुरू किया गया था तो क्या पेट्रोल पंपों पर इसका नोटिस लगाया गया था कि अब पेट्रोल शुद्ध पेट्रोल नहीं, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल है।
क्या टीवी पर, रेडियो पर समाचार पत्रों में इसकी औपचारिक घोषणा की गई थी कि अब पेट्रोल इथेनॉल मिश्रित हो चुका?
और यहां मैं भाजपा या कांग्रेस किसी सरकार की बात नहीं कर रहा, कोई भी सरकार हो, क्या उसने आम पब्लिक को ये बताने की जहमत उठाई थी कि अब पेट्रोल शुद्ध पेट्रोल नहीं, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल है?
मेरे ख्याल से ऐसा कभी नहीं किया गया।
आम जनता को ज्यादा से ज्यादा ये बताया जाता था कि ये वाला पेट्रोल इतने का है, इधर वाला थोड़ा महंगा है पर माइलेज ज्यादा देता।
मैं शर्त लगाने को तैयार हूं कि,99 प्रतिशत भारतीय जनता को शुरू के सालों में पता ही नहीं था कि जो पेट्रोल वो शुद्ध पेट्रोल के धोखे ले रहे, वो एथेनाल मिश्रित पेट्रोल है।
अगर नितिन गडकरी पता नहीं किस लालच में इथेनॉल इथेनॉल की रट न लगाए होते तो आम आदमी का ध्यान भी इस पर न जाता कि उन्हें पहले से ही जो इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल मिल रहा, उसे और ज़्यादा इथेनॉल मिला कर पेट्रोल के दामों में ये लोग बेचने वाले हैं।
ऐसे ही नहीं हुआ कि पहले जिन बाइकों की मजबूती की दाद दी जाती थी, उनके इंजन पहले के मुकाबले जल्द खुलने लगे, अच्छी अच्छी बाइक्स का माइलेज ड्रॉप होने लगा और यहां मैं कारों की बात भी नहीं कर रहा।
मेरी 2006 में खरीदी हीरो होंडा सीडी डीलक्स का इंजन दस साल में एक बार भी नहीं खुला था और 2017 में खरीदी पैशन प्रो का इंजन नौ सालों में दो बार खुल के बंधा जबकि ये पुरानी सीडी डीलक्स से कम चली और अच्छे रास्तों पर चली।
कारों की बात कार वाले करेंगे।
पर क्या कभी सरकार ने इस बात को लोगों को खुल के बताने की ज़रूरत कभी समझी कि अब पेट्रोल में इथेनॉल मिलने लगा है।
आपको कब पता चला ये?
जब प्रदीप सिंह शंकराचार्य और विपक्ष के विरुद्ध एजेंडा चलाते थे तो संघी-भाजपाई के प्रिय थे। अब लाज-शर्म बचाने के लिए राम मंदिर मामले में चंपत राय के विरुद्ध बोलने लगे तो उसी संघी ईको सिस्टम द्वारा टारगेटेड हैं। प्रदीप सिंह को अपने कर्मों की सजा मिल रही है!
संत जी ने बताया कि प्रारब्ध (पूर्व जन्मों के कर्मों का फल) से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता, लेकिन उसकी तीव्रता को कम किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने ये मार्ग बताए