@priyanka2bharti तेरी भाषा निहायती घटिया है
जब तेरे पास तर्क नहीं बचते तब तू रोने लगती है (महिला कार्ड,जाति कार्ड,विक्टिम कार्ड) इसलिए तेरी औकात है नहीं कि तुझसे कोई समझदार इंसान बहस करे
@SauravDassss अबे आपिए...बहरूपिए ... तेरी औकात बहुत जल्दी जनता के सामने आ चुकी है.. देख मेरा अकाउंट, बिल्कुल आम आदमी हूँ या नहीं। जब मैं तेरी औकात समझ गया तो पूरा देश कैसे नहीं समझेगा। सवाल क्या है और तू सेलेक्टिवली बोल क्या रहा है। यह बता कि सारी महिलाएं समान हैं या नहीं? चूतीया आपिया
सुबह सुबह वरिष्ठ पत्रकार को फोन किया- सर, दिपके जी का कितना पवित्र अभियान है। कह रहे हैं कि सरकारी अधिकारियों को अपने बेटे-बेटियों को सरकारी स्कूल में भेजना चाहिए । हैंगओवर वाली आवाज में बोले -घंटा पवित्र है! खुद पढ़ो बोस्टन में और नेता/अधिकारी के बच्चे जाएँ सरकारी स्कूल । सुबह सुबह बकवास मत किया करो- कहकर फोन पटक दिया।
किसी जंगल में एक गधा रहता था।
उसने बाकी जीवों से कहना आरंभ कर दिया कि, शेर एक अच्छा राजा नहीं है। उसमें कोई दम नहीं है। संकट काल में वह तुम्हारी मदद नहीं कर पाएगा। अतः तुम सब लोग मुझे अपना राजा मान लो।
इसपर जंगल के सभी जीव हंसने लगे।
गधा अपने आप को बलशाली दिखाने के लिए सुरक्षित अंतर से शेर को गालियां बकने लगा। उस पर भिन्न-भिन्न प्रकार के आरोप लगाने लगा।
गधा शेर को आवाहन करने लगा कि, अगर आप में साहस है, तो मुझसे लड़कर दिखाओ।
कुशल कामकाजी शेर ने गधे की तरफ बिल्कुल ध्यान ही नही दिया और निष्ठापूर्वक अपना काम करता रहा।
थक-हारकर गधा वापस चला गया और फिर बाकी जीवों को बताने लगा कि, शेर तो बिल्कुल कमजोर है। मैंने उसे इतनी गालियां दीं, आवाहन दिया, परंतु वह चुपचाप सुनता रहा।
बकरी, खरगोश जैसे कुछ जीव, जो गधे के उपकार मानते थे, क्योंकि गधा उन्हें भोजन के लिए हरि घास के मैदानों का पता बताता था, वे गधे की हां में हां मिलाने लगे।
गधे के जाने के बाद शेर के महामंत्री ने उससे पूछा :- महाराज! वो गधा आपको इतनी गालियां बकता रहा, आपको लड़ने के लिए आवाहन करता रहा, फिर भी आप चुप क्यों रहे ? आप चाहते, तो पंजे के मात्र एक वार से ही उसका काम समाप्त कर सकते थे। अथवा मुझे आदेश दे देते, तो मैं क्षण भर में उसकी चटनी बना देता। इससे जंगल आपकी धाक भी कायम रहती।
शेर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया :- गजराज! इसके तीन कारण हैं।
प्रथम कारण :- अगर मैं अथवा आप गधे से लड़ते, तो अन्य जीव यह कहते कि, हमारा राजा तो तानाशाह है। भला गधे जैसे निरीह जीव से भी कोई बुद्धिमान लड़ता है ?
द्वितीय कारण :- लड़ाई में गधा मर जाता, तो उसकी माँ, परिवार वाले और चमचे उसे शहीद बता कर बाकी जीवों की सहानुभूति अर्जित करके उन्हें हमारे विरुद्ध विद्रोह के लिए उकसाते।
तृतीय कारण :- गधे के परिवार को वास्तव लाभ मिलता देख कई अन्य जीव भी शहीद बनने की जुगाड में लग जाते।
मैं उस गधे के अथवा उसके सखाओं के कारण जंगल का राजा अर्थात वनराज नहीं हूं।
न अभिषेको न संस्कार: सिंहस्य क्रियते वने।
विक्रमार्जित सत्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता।।
अर्थ :- जंगल में सिंह का राज्याभिषेक संस्कार आदि कुछ नहीं किया जाता। उसके पराक्रम के कारण उसे स्वयमेव राज-पद अर्जित हो जाता है।
टिप्पणी :- इस कथा का राजनैतिक अर्थ लगाने के लिए आप पूर्णतः स्वतंत्र हैं।
कांग्रेस IT सेल की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने जिस दिन अमित मालवीय को फेक न्यूज फैलाने वाला बता कर ट्वीट किया, उसी दिन सुप्रिया श्रीनेत ने फेक न्यूज फैलाने वाले अपने ये दो ट्वीट डिलीट कर दिए।
समाचार समाप्त हुए।