ज्ञानेश कुमार एक नंबर का फ्रॉड है
26 सितंबर को ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें कहा: फॉर्म-6 में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर किया गया।
लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है 👇
“किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को हमने मंजूरी नहीं दी है।”
ज्ञानेश पूरे देश में वोट चोरी को अंजाम दे रहा है और अब पकड़े जाने पर ऐसे फ्रॉड कर देश को गुमराह कर रहा है।
ज्ञानेश को तत्काल गिरफ्तार करो, जेल में डालो।
It is now established beyond doubt that Gyanesh Kumar changed Form 6 illegally and unilaterally.
This is just one more proof of him abusing his position to help the BJP.
He and everyone else involved in this criminal assault on our democracy will be held accountable.
पुणे में 'छात्रों की गूँज' के दौरान महाराष्ट्र के छात्रों ने अपनी पूरी समस्या मेरे सामने रखी थी - पेपर लीक, रुकी भर्तियाँ, महँगी पढ़ाई, बदहाल हॉस्टल, ज़हर जैसा खाना, और DBT में धोखाधड़ी।
मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा था - MPSC में सुधार कीजिए, परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी बनाइए, इन बच्चों की सुनिए।
कुछ नहीं हुआ। इसीलिए आज वही छात्र पुणे में सत्याग्रह पर बैठे हैं।
उनकी मांगे साफ़ हैं:
→ MPSC अध्यक्ष इस्तीफ़ा दें, और उनकी जगह एक ईमानदार, योग्य अधिकारी आए
→ 70,000+ ख़ाली सरकारी पद तुरंत भरे जाएं
ये मांगे नाजायज़ नहीं हैं। इन पर कार्रवाई चाहिए - आश्वासन नहीं।
महाराष्ट्र स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिति ने अपना आंदोलन 'सत्याग्रह' पर दर्ज किया।
युवा कांग्रेस और NSUI इस आंदोलन के साथ लगातार खड़े थे - उनसे कहा है कि छात्रों की मांगे पूरी होने तक उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर लड़ते रहना। मैं ये मुद्दा महाराष्ट्र सरकार के सामने फिर से उठाकर इसके स्थायी समाधान की मांग करूंगा।
जो संस्था छात्रों का भविष्य तय करती है, उस पर क़ब्ज़ा कर लिया गया है। हम इसे ऐसे ही नहीं चलने देंगे।
#Satyagraha
आज गांधी जयंती है।
और आज ही, हज़ारों नौजवान वोट चोरी के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं - शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए।
उनकी माँग साफ़ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। लोकतंत्र बचाओ।
और Modi-Shah सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ़ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा।
बापू ने यही सिखाया था - सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज़्यादा डराता है।
क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।
ज्ञानेश कुमार जाएँगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।
देशभर में लोग अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं - और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं।
Gen Z, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएँ - हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज़ अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है।
'सत्याग्रह' इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने की पहल है।
बापू ने यही सिखाया था - सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना।
अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं - अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे।
आपकी कहानी नक्शे पर आएगी। आप देखेंगे कि आपकी तरह और कौन-कौन लड़ रहा है। और मैं जो कर सकता हूँ, करूँगा - संसद में, सड़क पर, खत लिखकर, जहां भी मेरी ज़रूरत हो वहां आपके साथ खड़े होकर - नेता विपक्ष के रूप में ये मेरी ज़िम्मेदारी है।
अपने सत्याग्रह को कहानी मुझे यहां बताएं
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
I have one genuine piece of advice for you, @RavneetBittu: you are messing with the wrong guy.
Rahul Gandhi, is not just my leader - he is the leader of this country and the only man who ignites hope.
I am not an opportunist, but a loyalist. I have stood with @RahulGandhi Ji in good times and bad - and will continue to do so.
Don’t forget Rahul Ji did not just stand by me, but also by you, he trusted us and has given us all far more than we can ever acknowledge.
महात्मा गांधी वो सूर्य हैं जिसने पूरे विश्व को अंधेरों से लड़ने की ताकत दी।
सत्य और अहिंसा के रूप में बापू ने दुनिया को ऐसा मार्ग दिखाया, जो कमज़ोर से कमज़ोर व्यक्ति को भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस देता है।
उन्हें किसी ‘शाखा शिक्षित’ के प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं है।
वीरता की जड़ में निर्भयता है, हिंसा नहीं। 🇮🇳
हिंसा से वीरता तय होती, तो गीदड़ भी वीर कहलाते। जो परिणाम जानकर भी कवच-कुंडल उतार दे, वे कर्ण हैं दानवीर; निर्भयता के शिखर पर विराजमान वर्धमान हैं महावीर और सत्यमार्ग के अथक पथिक बापू हैं सत्यवीर।
सत्यवीर की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। 🙏
सत्य, अहिंसा और निर्भयता - यही बापू की सबसे बड़ी विरासत है।
उन्होंने सिखाया कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं, सत्य और अहिंसा के साथ डटे रहना ही सच्ची ताकत है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
बालाघाट में आकर ऐसा लगा- जैसे हिंदुस्तान के बीच में ही हिंदुस्तान की सरकार नहीं है।
यहां बहुत सारे बच्चों की मृत्यु कुपोषण और अन्य बीमारियों के कारण हुई है, लेकिन सरकार की तरफ से लोगों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है।
यहां पर लोगों की जमीन से जुड़े मुद्दे हैं, वन अधिकार अधिनियम से जुड़ा मुद्दा है और मनरेगा का भी मुद्दा है। कई परिवारों ने अपने बच्चे खो दिए, लेकिन अभी तक आधे लोगों को मुआवजा नहीं दिया गया है।
मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
बालाघाट में लोगों को स्कूल, अस्पताल की सुविधा दीजिए और इन्हें इनका हक दीजिए। BJP सरकार 24 घंटा विकास की बात करती है, लेकिन जिम्मेदारी निभाने के वक़्त गायब हो जाती है।
अगर सरकार प्रदेश में दो योजनाएं चला रही है तो इन्हें दोनों का फायदा मिलना चाहिए, लेकिन इन्हें एक योजना का फायदा देकर, दूसरे से नाम इनका काट दिया जाता है।
मुझे यहां की स्थिति देखकर काफी दुख हुआ। हमने इनसे कहा है कि हम सरकार में आते ही इनकी मदद करेंगे।
हम इन्हें वनवासी नहीं, आदिवासी कहते हैं और ये हिंदुस्तान के पहले मालिक हैं, इसलिए इन्हें देश में जगह और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
मध्य प्रदेश में हर तरफ हालात खराब हैं और ये पूरी तरह से मध्य प्रदेश सरकार का Failure है।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 बालाघाट, मध्य प्रदेश
मैं आज बालाघाट आ रहा हूं।
उन आदिवासी परिवारों से मिलने, जिन्होंने बीमारी और BJP सरकार की उपेक्षा के कारण अपने मासूम बच्चों को खोया है। उनके साथ वक्त बिताकर उन्हें बताना चाहता हूं कि इस दुख में वो अकेले नहीं हैं - मैं उनके साथ हूं।
कुछ दिनों पहले केन-बेतवा आंदोलन के आदिवासी भाई-बहनों से भी मिला था। परियोजना के कारण आज उनके गांव डूब रहे हैं, मगर सरकार से उन्हें न पुनर्वास मिला न मुआवज़ा - मिला है तो प्रताड़ना, सरकारी दमन और हिंसा।
इंदौर में ‘छात्रों की गूँज’ के दौरान भी आदिवासी छात्रों ने बताया - स्कूल नहीं हैं, कॉलेज बदहाल हैं, हॉस्टल और खाना नर्क जैसा, परीक्षाओं में धांधली और उनके आरक्षण के अधिकार से खिलवाड़ हो रहा है।
मध्यप्रदेश के आदिवासियों की ये तकलीफें BJP-RSS की उस सोच का हिस्सा हैं जो उन्हें भारत के पहले मालिक नहीं, वनवासी मानती है। जल, जंगल, जमीन के साथ शिक्षा, रोजगार और सम्मान भी छीन लेना चाहती है और अहंकार में वो कुछ सुनना नहीं चाहती।
आदिवासी भाई-बहनों को आश्वस्त करता हूं कि मैं आपके साथ हर संघर्ष में खड़ा हूं - आपकी आवाज़ बुलंद करना मेरी ज़िम्मेदारी है और मैं इस बहरी सरकार को वो पूरी शक्ति के साथ सुनाऊंगा।
The online Form 6 was changed illegally - as the EC's own Commissioners have recorded.
Who at the ECI ordered Tata Consultancy Services to make that change?
Who at TCS signed off on it? And were they pressured into doing it?