कुछ अनकही बातें चुभती है
पर सब्र करना सीखा देती हैं
और सब्र आ जाने के बाद
कोई चीज छोटी बडी नहीं लगती
सब सामान्य सा लगने लगता है
बस हम वो नहीं रह जाते
जो पहले थे..!
किसी के नाम हम अपनी जिंदगी क्यूँ करें? मोहब्बत नहीं तो उनसे दिल्लगी क्यूँ करें?
जब समझना ही नहीं हो खामोशिया इस दिल की, उस शख्स से दिल की बात भी क्यूँ करें?
जो लोग अपना कहते हैं।
वो किधर रहते हैं।।
थोडा तो सामने आइए ।
चाहे जिधर रहते हैं।।
कभी नकाब भी उतारिए ।
जो इधर भी उधर भी रहते हैं।।
तिल का ताड बनाने वाले ।
बताइए किस खबर में रहते हैं।।
सबके होने का ढोग रचने वाले ।
जाने किस किस नज़़र में रहते है।।