प्रिय @ncert आपको अंगिका और मैथिली भाषा में अंतर समझ में आता हैं की नहीं? एक अच्छे भाषाविद को चुनिए और मजबूत से क्षेत्र का सर्वे करवा लीजिए। फिर बढ़िया से पुस्तक का प्रकाशन कर दीजिए।
ऐसा माना जाता है कि लखनऊ के नवाब फिदा हुसैन इस आम का पौधा पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित शाह फैसल मस्जिद क्षेत्र से लेकर आए थे और उसे पटना के दीघा में लगाया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास कई गायें थीं और वे पौधों की सिंचाई बचे हुए दूध से करते थे। बाद में जब पेड़ बड़ा हुआ और उसमें फल आए, तो उनमें से दूध जैसा सफेद रस (milk-like substance) निकलने लगा।
इसी विशेषता के कारण इस आम का नाम “दूधिया मालदह” पड़ गया।