डियर शाहीन और नफीसा डरना नहीं है आपके साथ हुई इस बर्बरता के खिलाफ पू��ा देश आपके साथ खड़ा है!
एक मुख्यमंत्री से सवाल पूछने पर इतनी गंदी हरकत करने वालों से अब पूरा देश सवाल करेगा. डरो मत!
ये है हनुमान अंश मूवी के सिंगर सुनील लोधी भैया जी यह अपनी आँखों से दुनिया तो नहीं देख नहीं सकते लेकिन इन्ह���ने अपनी आवाज को दुनिया तक पहुंचा दिया.. बहुत प्यारी आवाज है भैया जी की भगवान आपको हमेशा खुश रखे।
जय श्री राम 🙏 जय श्री सीताराम 🚩
#hanumananshmovie #singar
मध्यप्रदेश के छतरपुर में एक आदिवासी गांव तक सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिला को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए 4 किलोमीटर तक चारपाई पर ले जाना पड़ा। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली का आईना है।
आरजेडी के राज्यसभा सांसद प्रो. मनोज कुमार झा ने देश के आर्थिक आंकड़ों और आम जनता की आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39 (a), (b) और (c) का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी आर्थिक विकास या ग्रोथ स्टोरी का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंच रहा है।
मनोज झा ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर दूध, प्याज और चीनी जैसी रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ रही हैं, तो आम लोगों के लिए बड़े आर्थिक आंकड़ों का क्या महत्व रह जाता है। उन्होंने सवाल किया कि आर्थिक विकास के दावे तब तक अधूरे हैं, जब तक गरीब, निम्न आय वर्ग और मध्यम वर्ग को महंगाई से ���ाहत नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों का आकलन केवल GDP ग्रोथ से नहीं, बल्कि आय में असमानता, रोजगार और आम लोगों की जीवन स्थिति के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
#ManojJha #RJD #GDPGrowth #IndianEconomy #Inflation @manojkjhadu
India’s GDP headlines mask a structural crisis. When gold loans expand 14.4x and personal loans 6.5x, while nominal GDP grows just 2.8x over the last 12 years, it isn’t an economic boom. It is leveraged consumption growth.
Growth today isn’t being supported by rising wages, job creation, or productive investment. It increasingly relies on household debt and pledged family assets. Middle class is in pain. Our household-level financial resilience is eroding. Families are increasingly forced to turn to high-interest personal loans and distress-driven gold loans to meet routine expenses. When citizens must pledge core assets to sustain basic consumption, it signals a systemic breakdown in real-income sustainability.
Moreover, rising national and state debt adds another layer of fragility, shifting the burden of today’s debt-driven growth onto future taxpayers and generations. Debt stress can ultimately lead to a financial crisis. Not today, not tomorrow. It’s just a matter of when the tipping point is reached.
We must change our economic path.
#IndianEconomy #HouseholdDebt #GoldLoan #IncomeSustainability #FinancialStress
#WATCH पटना, बिहार: BPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी ने गांधी मैदान में विरोध प्रदर्शन किया। वहां बैरिकेड लगाए गए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
भोपाल के बाद अब 24 सितंबर को दिल्ली में आरक्षण के समर्थन में उससे भी बड़�� जनसैलाब उमड़ेगा। ✊
आरक्षण आर्थिक आधार पर नहीं, सामाजिक और जातिगत असमानता के आधार पर ��ै। बहुजन एकता के साथ @BhimArmyChief जी के नेतृत्व में आवाज बुलंद होगी।
आरक्षण जिंदाबाद!
चंद्रशेखर आजाद जी जिंदाबाद!
बच्चियों से अपराध के मामलों में आरोपियों के खिलाफ बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, लेकिन उन्हें सजा दिलाने में पुलिस कहीं न कहीं नाकाम नजर आ रही है। हाल यह है कि गोरखपुर जोन में पिछले सात महीनों में बच्चियों से अपराध के मामलों में आरोपित हुए 60 प्रतिशत आरोपी सबूत और गवाहों के अभाव में छूट गए।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के खुद के जिले गोरखपुर में सात महीनों में पॉक्सो के 75 मामलों का फैसला हुआ, जिनमें 44 आरोपित दोषमुक्त हो गए, जबकि केवल 31 को सजा मिली। यानी सजा पाने वालों से अधिक संख्या उन आरोपितों की रही, जो दोषमुक्त होकर बाहर निकल गए। यह स्थिति पुलिस की ��िवेचना और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कानूनविदों के अनुसार, पॉक्सो एक्ट के मामलों में इतनी बड़ी संख्या में आरोपितों का दोषमुक्त होना बताता है कि केस दर्ज होने के बाद पुलिस की विवेचना में गंभीर कमियां रह जा रही हैं। कमजोर विवेचना, साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के मुकर जाने का सीधा फायदा आरोपितों को ट्रायल में मिल रहा है।
यही समस्या SC-ST Act से जुड़े मामलों में भी देखने क�� मिलती है, जहां पुलिस की कमजोर विवेचना, पैरवी और पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपितों को ट्रायल में फायदा मिलता है और पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते हैं।
@mygovindia से हमारी मांग है कि SC-ST Act के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाकर 30 लाख रुपये किया जाए और यह राशि दोषी साबित होने वाले आरोपित से वसूल की जाए। साथ ही पुलिस की विवेचना और अभियोजन व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जाए, ताकि अपरा��ी कानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर बच न पाएं और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
@PMOIndia
@narendramodi @MLJ_GoI
@arjunrammeghwal
जीतन राम मांझी ने SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर और और आरक्षण में सब कैटेगराइजेशन की मांग कर रहे हैं.
चिराग पासवान ने पलटवार करते हुए कहा SC-ST आरक्षण का आधार आर्थिक नही, बल्कि सामाजिक भेदभाव और छुआछूत है,
इसलिए आर्थिक आधार या क्रीमी लेयर जोड़ना उचित नही है.
चिराग पा���वान ने तंज कसते हुए कहा, जीतन राम मांझी को लगता है कि बदलाव ��ोना चाहिए तो उन्हें और उनके बेटे को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.