तेरी इस दुनिया में ये मंजर क्यों है... कहीं अपनापन तो कहीं पीठ में खंजर क्यों है...सुना है तू हर ज़र्रे में है रहता फिर जमीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यों है...जब रहनेवाले दुनिया के हर बंदे तेरे हैं.... फिर कोई दोस्त तो कोई दुश्मन क्यों है?
महाशिवरात्रि की हार्दिक श���भ कामनायें।
भारत की आस्था और अस्मिता के रक्षक, 'हिंदवी स्वराज' के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!
धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनका त्यागमय जीवन हम सभी को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
*जब हौसले बुलन्द हो*,
*तो पहाड़ भी एक मिट्टी का ढेर लगता है*-
अनुपम भाई, आपका नया घर मुझे बहुत राश नहीं आया। मैं भी कांग्रेस पार्टी के चरित्र को अच्छी तरह से जानता हूँ। फिर भी रिश्ते का तकाजा है कि ��ैं पहले की भांति आपके साथ खड़ा रहूं। आप कांग्रेस ��ी मानसिकता को बदलने में सक्षम हों।हमास और मिथिला का नाम रौशन करें। जय जानकी..जय श्रीराम🙏