@Siddhantmt गांव -भासिंहपुरा, जोबनेर के पास h inka polyhouse ,aap chaye to inke polyhouse ki photos bheju ,jobner me Rajasthan ka sbse purna aur prestigiouse Agriculture University h.
Upsc launched "Pratibha Setu"platform for those whom service is not alloted .
Gujraat also came with similar platform . Rajasthan में ऐसा क्यों नहीं हो सकता ? specifically for RAS Examination candidates
देश-दुनिया में राजस्थानी गानों को एक नई पहचान दिलाने वाले, वीणा कैसेट्स के मालिक और सुर संगम के संस्थापक, मेरे पारिवारिक मित्र श्री के सी मालू का आकस्मिक निधन बेहद दुखद है।
पिछले सप्ताह ही 49, सिविल लाइंस आवास पर मेरी उनसे मुलाकात और लम्बी बातचीत हुई थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत जगत के लिए समर्पित किया। उनका निधन हम सबके लिए एक बड़ी क्षति है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें।
#India excelled at the 56th International Physics Olympiad (IPhO) 2026, held in Bucaramanga, Colombia. All five Indian students bagged Gold medals. The students were:
🥇 Kanishk Jain - Pune, Maharashtra
🥇 Riddhesh Anant Bendale - Indore, Madhya Pradesh
🥇 Rishit Garg - Dwarka, New Delhi
🥇 Shresth Suraiya - Mumbai, Maharashtra
🥇 Svarit Joshi - Ahmedabad, Gujarat
India secured the World No. 1 rank, jointly with China, Kazakhstan, Russia, South Korea and Taiwan, among 381 students from 87 countries.
#IPhO2026 #InternationalPhysicsOlympiad
@DecodeCIVILS Sir,Both El Nino Effect and Durkheim's Anomie Theory applied here which leads to Drought and Chaos in Cricket society.Selctors and Board are working on- cut the clutter so that Indian cricket fans need to memorize less Gambhir points .
“कांशीराम जिन्द जवाणी,
जिन्दबाज नी लाणी इक्को बार जमणा,
देश बड़ा है कौम बड़ी है. जिन्द अमानत उस देस दी”
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल उन नेताओं की कहानी नहीं है, जिन्होंने संसदों, सभाओं या आंदोलनों का नेतृत्व किया। यह उन अनगिनत लोगों का भी इतिहास है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों के मन में आज़ादी की लौ जलाई। हिमाचल प्रदेश के ऐसे ही एक महान जननायक थे बाबा कांशी राम, जिन्हें इतिहास ने “पहाड़ी गांधी” के नाम से अमर कर दिया।
11 जुलाई 1882 को कांगड़ा ज़िले के दादा सीबा गाँव में जन्मे बाबा कांशी राम का जीवन सामान्य परिस्थितियों में शुरू हुआ, लेकिन उनके विचार असाधारण थे। युवावस्था में रोज़गार की तलाश उन्हें लाहौर ले गई। वहीं उनका परिचय राष्ट्रीय चेतना से हुआ। उस दौर में पंजाब स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन चुका था और लाला लाजपत राय, लाला हरदयाल जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के विचारों ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया।
समय के साथ उन्होंने समझ लिया कि केवल राजनीतिक भाषणों से नहीं, बल्कि लोकभाषा और संस्कृति के माध्यम से भी क्रांति की जा सकती है। उन्होंने पहाड़ी बोली में कविताएँ और गीत लिखने शुरू किए। उनकी रचनाएँ गाँव-गाँव गाई जाने लगीं। जिन लोगों तक अख़बार या बड़े नेताओं की आवाज़ नहीं पहुँचती थी, वहाँ बाबा कांशी राम के गीत पहुँचते थे। उनकी कविताएँ लोगों में आत्मसम्मान, स्वदेश प्रेम और अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना जगाती थीं।
1919 का जलियांवाला बाग नरसंहार उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बना। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन को अपना जीवन समर्पित कर दिया। लेकिन सबसे गहरा आघात उन्हें 1931 में लगा, जब भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दी गई। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक भारत स्वतंत्र नहीं होगा, वे केवल काले वस्त्र ही पहनेंगे। यह काला रंग उनके लिए शोक का नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आजीवन प्रतिरोध का प्रतीक था। इसी कारण लोग उन्हें “सियाहपोश जनरल” कहने लगे।
ब्रिटिश सरकार उनके प्रभाव से भली-भाँति परिचित थी। उनकी सभाओं पर निगरानी रखी जाती थी, उनकी कविताओं को विद्रोह भड़काने वाला माना जाता था और उन्हें अनेक बार गिरफ्तार किया गया। उन्होंने अपने जीवन के कई वर्ष जेलों में बिताए, लेकिन न तो उनकी लेखनी रुकी और न ही जनजागरण का अभियान।
बाबा कांशी राम की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने राष्ट्रवाद को पहाड़ों की संस्कृति से जोड़ा। उन्होंने लोगों को यह एहसास कराया कि मातृभूमि के प्रति प्रेम केवल शहरों तक सीमित नहीं है; हिमालय की घाटियाँ भी उतनी ही दृढ़ता से स्वतंत्र भारत का सपना देख रही हैं। उनकी कविताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को हिमाचल के गाँवों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। सरोजिनी नायडू ने उन्हें “बुलबुल-ए-पहाड़” की उपाधि दी, जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी सादगी, जनसेवा और गांधीवादी जीवनशैली से प्रभावित होकर उन्हें “पहाड़ी गांधी” कहा। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस जनआंदोलन का था जिसे उन्होंने अपनी आवाज़ से खड़ा किया।
15 अक्टूबर 1943 को बाबा कांशी राम का निधन हो गया। वे भारत की स्वतंत्रता का सूर्योदय अपनी आँखों से नहीं देख पाए, लेकिन जिस चेतना को उन्होंने अपने शब्दों से जन्म दिया था, उसने स्वतंत्रता की राह को मज़बूत बनाया। आज भी उनकी विरासत हमें याद दिलाती है कि क्रांति केवल तलवारों से नहीं, विचारों से भी होती है; और कई बार एक कवि की कलम किसी साम्राज्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
@CSEPlanB
Ethanol Blending -Brazil have history and India want to make .
Ethics points:1.Anomie Theory by Durkheim.
2.Propaganda vs Real issues
3.Evidence based policy rather than Policy based Evidence.
@CSEPlanB
Ethanol Blending -Brazil have history and India want to make .
Ethics points:1.Anomie Theory by Durkheim.
2.Propaganda vs Real issues
3.Evidence based policy rather than Policy based Evidence.