#परमात्मा_की_पहचान
कबीर परमात्मा सतलोक से चलकर आते हैं। जैसे यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 में कहा है कि ‘अग्नेः तनुः असि = परमेश्वर सशरीर है। विष्णवे त्वा सोमस्य तनुः असि = उस अमर प्रभु का पालन पोषण करने के लिए अन्य शरीर है जो कुछ दिन संसार में आता है।
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▪️कबीर साहेब जी सतलोक से चलकर आते हैं। और #परमात्मा_की_पहचान उनकी बाल्यकाल की लीलाओं से की जाती हैं। जैसे यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 में कहा है कि ‘अग्नेः तनुः असि = परमेश्वर सशरीर है। विष्णवे त्वा सोमस्य तनुः असि = उस अमर प्रभु का पालन पोषण करने के लिए अन्य शरीर है !(1/2)
#परमात्मा_की_पहचान ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
“अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।
परमेश्वर जब भी शिशुरूप में पृथ्वी पर आते हैं तो उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है।
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#परमात्मा_की_पहचान ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
“अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।
परमेश्वर जब भी शिशुरूप में पृथ्वी पर आते हैं तो उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है।
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कबीर #परमात्मा_की_पहचान वेदों मे बताई गई है
600 वर्ष पूर्व जब परमात्मा कबीरजी (कविर्देव जी)
स्वयं प्रकट हुए थे उस समय सर्व सद्ग्रन्थों का वास्तविक ज्ञान लोकोक्तियों (दोहों, चोपाईयों, शब्दों अर्थात् कविताओं) के माध्यम से साधारण भाषा मे है
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#INDvsAFG
#परमात्मा_की_पहचान ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
“अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।
परमेश्वर जब भी शिशुरूप में पृथ्वी पर आते हैं तो उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है।
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#परमात्मा_की_पहचान
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि, पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर)
जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है, उस समय कुंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।
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#परमात्मा_की_पहचान
शिशु रूप कबीर परमेश्वर का नामकरण करने आए काजियों ने जब कुरान शरीफ को खोला तो कुरान शरीफ में सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर हो गए। तब कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले हे काशी के काजियों। मैं कबीर अल्लाह हू, मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
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जब कबीर परमेश्वर सतलोक से आये थे। उस समय शिशु रूप कबीर साहेब की परवरिश कुंवारी गाय के दूध से हुई थी। इसी बात का प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में भी है कि जब पूर्ण परमात्मा शिशु रूप धारण करके पृथ्वी पर आता है तो उसका पालन पोषण कुंवारी गाय से होता है।
#परमात्मा_की_पहचान 🙏
#परमात्मा_की_पहचान
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
“अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।
परमेश्वर जब भी शिशुरूप में पृथ्वी पर आते हैं तो उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है।
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▪️कबीर साहेब जी सतलोक से चलकर आते हैं। और #परमात्मा_की_पहचान उनकी बाल्यकाल की लीलाओं से की जाती हैं। जैसे यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 में कहा है कि ‘अग्नेः तनुः असि = परमेश्वर सशरीर है। विष्णवे त्वा सोमस्य तनुः असि = उस अमर प्रभु का पालन पोषण करने के लिए अन्य शरीर है !(1/2)
#परमात्मा_की_पहचान
कबीर परमात्मा सतलोक से चलकर आते हैं। जैसे यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 में कहा है कि ‘अग्नेः तनुः असि = परमेश्वर सशरीर है। विष्णवे त्वा सोमस्य तनुः असि = उस अमर प्रभु का पालन पोषण करने के लिए अन्य शरीर है जो अतिथि रूप में कुछ दिन संसार में आता है ।
#परमात्मा_की_पहचान
कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। उनका जन्म मां से नहीं हुआ।
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#परमात्मा_की_पहचान यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 मे कहा है कि
अग्नेः तनुः असि = परमेश्वर सशरीर है।
विष्णवे त्वा सोमस्य तनुः असि = उस अमर प्रभु का पालन पोषण करने के लिए अन्य शरीर है जो कुछ दिन संसार मे आता है। वह परमात्मा कबीर जी हे
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#BiharKaBetaNityanand
#परमात्मा_की_पहचान
शिशु रूप कबीर परमेश्वर का नामकरण करने आए काजियों ने जब कुरान शरीफ को खोला तो कुरान शरीफ में सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर हो गए। तब कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले हे काशी के काजियों। मैं कबीर अल्लाह हू, मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
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#परमात्मा_की_पहचान
कबीर, "ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया। काशीपुरी जल कमल पे डेरा तहां जुलाहे ने पाया।।
मात पिता मेरे कछु नाही, ना मेरे घर दासी। जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरे हासी।।"
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#परमात्मा_की_पहचान
कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। उनका जन्म मां से नहीं हुआ।
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#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन कबीर साहेब जी कलयुग मे भारत के काशी शहर के लहरतारा तालाब मे ज्येष्ठ मास शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत 1455 (सन् 1398) सुबह ब्रह्म्ह्ममुहूर्त मे कमल के फूल पर शिशु रुप में प्रकट हुए थे।🙏
#परमात्मा_का_पृथ्वी_पर_आगमन
⚡️कबीर परमेश्वर सशरीर प्रकट हुए
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में परमेश्वर कबीर जी तेजोमय रूप में आकर काशी के लहरतारा तालाब में बालक रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए, इसके प्रत्यक्ष दृष्टा ऋषि