तमसो मा ज्योतिर्गमय। मेरी जाति'मेरा भारत'
मेरा प्रश्न- संविधान में जब अपनी इच्छानुसार धर्म बदलने की आजादी है तो जाति बदलने की आजादी या विकल्प क्यों नहीं?
🚨 SHOCKING DEBT CRISIS IN HIMACHAL!
Sukhu Government is set to BORROW another ₹700 crore this month to meet its committed liabilities 😳
Just a month ago in May, it had already taken ₹500 crore.
With this fresh borrowing, Himachal’s total debt has now crossed ₹1,11,200 crore.
The state needs ₹2,800 crore every single month just to pay salaries, pensions and other fixed expenses.
People voted for Old Pension Scheme and freebies, but now even basic governance is suffocating.
This is the real cost of reckless populism.
Himachal is staring at a financial emergency. 🔥🇮🇳
एक बड़ा वर्ग अब थककर पूछ रहा है 'आखिर कितने मंदिरों पर कोर्ट-कचहरी करते रहेंगे?
भोजशाला, काशी, मथुरा... इन मामलों का अंत कहाँ है? कब तक चलेगा यह सब?'
हाँ! यही तो हम दशकों से समझाने की कोशिश कर रहे थे...
अब तक वामपंथी इतिहासकारों का गिरोह इस सांस्कृतिक संहार को 'उंगलियों पर गिनने लायक' इक्का-दुक्का घटनाएं बताकर रफा-दफा करता रहा।
लेकिन आज की पीढ़ी को पहली बार बोध हो रहा है कि यह संख्या उंगलियों पर गिनने लायक नहीं, बल्कि असंख्य है।
आज जाकर इस देश को होश आ रहा है कि उस दौर में हुए सांस्कृतिक संहार (Cultural Genocide) का वास्तविक 'साइज़' और वीभत्सता क्या थी।
इन इस्लामिक आक्रांताओं ने सिर्फ इमारतों को नहीं तोड़ा था; उन्होंने हमारी हर परंपरा, हर विचार, हर आस्था और सनातन की रीढ़ पर हमला किया था।
दुनिया के कई सभ्य देशों में Historical Negationism (इतिहास को झुठलाना या मिटाना) एक दंडनीय अपराध है। लेकिन हमारे देश की विडंबना देखिए… यहाँ इतिहास को झुठलाना, सच को दबाना और अपराधियों को नायक बताना, एक विशेष समुदाय को मिला हुआ 'Privilege' (विशेषाधिकार) है।
यह लड़ाई सिर्फ जमीन के टुकड़े की नहीं है, यह अपनी खोई हुई चेतना और आत्मसम्मान को वापस पाने का महायज्ञ है।
इस वैचारिक महायज्ञ की समिधा बनने का कार्य दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) करता आ रहा है।
जब इस देश की चेतना को गहरी नींद सुलाने का प्रयास चरम पर था, तब संघ ने इस राष्ट्र जागरण की अलख जगाए रखी।
इतिहास के पन्नों में दफन किए गए राष्ट्र पर हुए उन बर्बर अत्याचारों और सत्य की चीख को जन-जन तक पहुँचाने का भगीरथ प्रयास संघ ने ही किया है।
इसी अनवरत तपस्या का परिणाम है कि आज समाज अपनी विस्मृति से बाहर आ रहा है।
तो थकिए मत, जागिए और उठ खड़े होइए! अपने अतीत के हर भग्नावशेष को पुनर्जीवित कर अपने गौरव को पुनर्स्थापित कीजिए।
जीवन पुष्प चढ़ा चरणों में,
माँगें मातृभूमि से यह वर।
तेरा वैभव अमर रहे माँ,
हम दिन चार रहें न रहें ॥
अमृतसर और जालंधर में हुए दो धमाकों के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान दिया कि इसमें भारतीय जनता पार्टी का हाथ है। बिना किसी जाँच रिपोर्ट के, अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया यह बयान निंदनीय है।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने कहा, “मैं आपको सूचित करना चाहता हूँ कि इसमें ISI की साजिश का प्रयास है। ISI एक झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है और यह दिखाना चाहती है कि पंजाब अशांत है।”
ऐसी परिस्थितियाँ पाकिस्तान और ISI द्वारा आतंकवादियों के माध्यम से पंजाब और जम्मू एंड कश्मीर में समय-समय पर पैदा की जाती रही हैं।
आम आदमी पार्टी का यह बयान INDI Alliance की हताशा की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
भारत की धरती में खजाना था, लेकिन फायदा दूसरे उठाते रहे। दशकों तक हम Rare Earth minerals निकालकर बाहर भेजते रहे। चीन उनसे मैग्नेट बनाता रहा, और हम वही मैग्नेट महंगे दामों पर खरीदते रहे।
लेकिन 2025 में मोदी सरकार ने खेल बदल दिया। ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट प्रोडक्शन योजना को मंजूरी मिली।
अब सिर्फ खनन नहीं, पूरी वैल्यू चेन भारत में बनेगी:
* खनन
* प्रोसेसिंग
* धातु और मिश्र धातु
* तैयार मैग्नेट
यानी कच्चा माल नहीं, अब तैयार उत्पाद दुनिया तक जाएगा।
इन्हीं मैग्नेट से चलेंगे इलेक्ट्रिक वाहन, घूमेंगी पवन चक्कियां, मजबूत होंगे रक्षा सिस्टम और आगे बढ़ेगा भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर। ⚡
यही है असली आत्मनिर्भर भारत, जहां अपनी धरती का खजाना, अपने ही हाथों की ताकत बनता है। 🇮🇳
Nashik Corporate Jihad Case: Even More Shocking Revelations as per reports
There were a total of -300 employees at TCS BPO Nashik.
Of these, 40 were Muslim.
They had a separate WhatsApp group where they decided how to target the next Hindu girl.
One girl was targeted by 3 boys together— they planned it: took her to Imagica for a picnic, took photos of her in wet clothes, got close, forced physical relations, and then blackmailed her into continuous sexual exploitation + pressure for religious conversion.
Top IT companies should now audit themselves-whether they're following all POSH Act guidelines to provide a safe environment for women or not?
The government should also immediately order audits of these companies.
Salute to the 7 undercover lady cops and thanks to Devabhaau who gave the green signal to the operation.
But there's still a lot left to do to save our daughters! This seems like mindset and belief theory not an isolated incident.
🚨 HUGE! HS Phoolka drops stunning revelation:
🗣️ "On 17 Nov 1984, Vajpayee released a list of 2,700 Sikhs butchered in Delhi (prepared by Madanlal Khurana)
https://t.co/oezPWUvyOG
Just 3 days earlier, Congress Home Minister had claimed ONLY 650 Sikhs passed away across the entire country.
When Vajpayee exposed the truth, Congress called him anti-national and accused him of supporting terrorists"
Yet, many Sikhs in Punjab continue to vote for the same Congress.
History forgotten is history repeated🎯
75 साल की मधु किश्वर की इतनी कुंठा?
((दो-तीन साल पहले का उनका ट्वीट भी पढ़ें))
2013-2014 का दौर था, मधु किश्वर जी इंडिया न्यूज के दफ़्तर आतीं और तब के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी के कसीदे पढ़ते थकती नहीं थी. “मोदीनामा” किताब का शीर्षक आपको सबकुछ बता देगा. मोदी ने जब उनकी किताब के लिये इंटरव्यू दिया तो उसे इंडिया न्यूज पर चलाया जाना था. मोदी को नुक़सान ना हो, उनकी कोई ग़लत बात नहीं जाए, उनकी छवि पर असर ना पहुँचे, मोदी नाराज़ ना हो जायें, मोदी जैसा अच्छा इंसान मैंने नहीं देखा, ये बातें संपादकों पत्रकारों से न्यूज रूम में शेयर करते मधु किश्वर नहीं थकती थीं. मैं उस समय बदलते राजनीतिक माहौल के बीच पत्रकारिता सीख रही थी.
कई बार तो न्यूज़ रूम में ये भी चर्चा हुई कि मोदीनामा, मधु किश्वर ने इसलिये लिखा है क्योंकि वो राज्यसभा जाना चाहती हैं. मधु किश्वर से कुछ लोग मजाक में ये बोल देते थे तो वो शरमा जाती. मैं उस न्यूज़रूम का हिस्सा थी.
आज उनके बेहूदे शब्द और भड़ास देखकर हैरान हूँ. राज्यसभा नहीं मिलने पर अंगूर खट्टे हैं वाली कहावत इन पर सटीक बैठती है. हमारे यहाँ बुजुर्गों के प्रति सम्मान की बात कही गई है मगर राज्यसभा नहीं मिलने पर 75 साल की मधु किश्वर का इतना फ़्रस्ट्रेशन ?
इतनी कुंठा?
इतना घिनौनापन?
ये तो ठीक नहीं है मधु किश्वर जी.
ईश्वर आपकी मनो स्थिति को ठीक करे 🙏🏻
Madhu Kishtwar is floating bizarre fantasies about PM Modi
- Even hardened anti-Modi critics are calling it out as CHEAP BLACKMAIL by disgruntled insiders who expected power and got nothing.
They believed they carried Modi to Delhi; Modi showed them their place😂
Now they scream on social media for relevance. Stop treating these bitter ex-lobbyists as credible SOURCES.
आम आदमी बोलकर ठग लिया 🤦♂️
दिल्ली से जनता द्वारा खदेड़े गए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आजकल गोवा और गुजरात के भ्रमण पर अक्सर देखा जा रहा है। केजरीवाल ने भगवंत मान को ही अपना बुकिंग एजेंट बना दिया है। उनकी जब भी राजनीतिक पर्यटन की इच्छा होती है वह पंजाब से चार्टर्ड प्लेन लेकर निकल पड़ते हैं। कर्ज में डूबे पंजाब की हालत केजरीवाल और मान ने मिलकर बद से बदतर कर दिया है।
नीली वैगनआर से राजनीतिक एंट्री लेने वाले और खुद को आम आदमी कहने वाले केजरीवाल ने जितनी तेजी से रंग बदला उतनी तेज तो गिरगिट भी नहीं बदलता। आम आदमी हूं जी बोलकर शीशमहल बनाया, सुरक्षा नहीं लूंगा बोलकर सैकड़ों गाड़ियों का काफिला लिया, कोई लाल बत्ती की गाड़ी नहीं लूंगा कहा और चार्टर्ड प्लेन से चलने लगे।
केजरीवाल जी शर्म आती है या नहीं?
@kajal_jaihind@RSSorg मैडम जी अब आपका समय पूरा हो चुका है।
अब आप घर में रहकर अपने परिवार वालों को संभालो उनकी सेवा में समय लगाओ।
अब आप इन सामाजिक मुद्दों पर हस्तक्षेप करने योग्य नहीं रह गई हो।
🚨 Flip Alert : Eid Edition
Before 🙅♂️
“Happy Eid to all #EidMubarak.”
Attending Eid Milan programs.
“A Happy Eid to all. To Hindu, Muslim, Jew, Buddhist, Sikh, Christian and atheist alike.”
After 🤦♂️
“Secularism shown by Hindus on Eid will come back and haunt them.”
“Build some Shatru Bodh or Perish!”
“A good lesson for all Hindus wishing Eid Mubarak!”
From “Eid Mubarak to all”
To warning Hindus for wishing Eid.
Before 🙅♂️ | After 🤦♂️
महान नीतिज्ञों और महापुरुषों की हर बात से आप सहमत रहो ऐसा जरूरी नहीं है। उनके कई विचारों से मतभेद भी रहे होंगे — लेकिन उससे उनके प्रति मेरे मन में जो श्रद्धा है, उसमें रत्ती भर भी कमी नहीं आनी चाहिए।
अगर जन्मना जातिगत ऊँच-नीच के प्रश्न पर मेरा अपने पिता से मतभेद हो सकता है, तो क्या इसका अर्थ यह है कि मैं उन्हें गाली देना शुरू कर दूँ?
भाई-भाई के बीच भी कई मुद्दों पर तीखी बहस होती है, लेकिन जब उस भाई पर बाहर से कोई हमला करे, तो क्या मैं तमाशा देखता रहूँगा?
पूजनीय दीदी माँ Sadhvi Ritambhara भी मेरे लिए ऐसा ही व्यक्तित्व हैं।
उनके प्रति मेरे मन में जो सम्मान है, वह स्थायी है। किसी विषय पर मतभेद हो सकता है, लेकिन मैं व्यक्तिगत स्तर पर उनके विरुद्ध कभी अपमानजनक शब्द नहीं बोल सकता।
लेकिन आज कुछ दो कौड़ी के लोग, जिनकी औकात उनके त्याग, तप और समदर्शिता की धूल के बराबर भी नहीं है, वे उन पर उंगली उठा रहे हैं — सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने यूजीसी के मुद्दे पर राष्ट्रवाद का मुखौटा पहनकर घूम रहे जातिवादियों का साथ देने से इनकार कर दिया और उन्हें साफ-साफ फटकार लगा दी।
आज हालत यह है कि कुछ गालीबाज यूट्यूबर, जिनका स्तर और चरित्र दीदी माँ के चरणों की धूल के बराबर भी नहीं, वे बैठकर उन्हें प्रमाणपत्र बाँट रहे हैं कि कौन हिंदू है और कौन नहीं।
लोग अक्सर कहते हैं कि मोदी का इतना समर्थन ठीक नहीं।
लेकिन इन स्वयंभू बुद्धिजीवियों को शायद कभी यह नहीं पता कि नीतियों की आलोचना करते करते मोदी विरोध समाप्त होकर राष्ट्र विरोध शुरू हो जाता है😡
क्योंकि मेरे लिए यह किसी व्यक्ति की भक्ति नहीं है — यह हिंदू सत्ता की निरंतरता का प्रश्न है।
आज की वास्तविकता यह है कि मोदी उस शक्ति का सबसे बड़ा गुरुत्वकेंद्र हैं।
यदि यह केंद्र अचानक हट गया, तो सत्ता का संतुलन बिखर जाएगा — और उसके बाद केंद्र में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव जैसे टोंटी की सत्ता आने में देर नहीं लगेगी।
और यह मत भूलिए कि 2004 इलेक्शन के समय भी कुछ तथाकथित हिंदू बुद्धिजीवियों ने व्यक्तिगत खुन्नस में कांग्रेस को वापस लाने का अभियान चलाया था।
उसके बाद के दस वर्षों में देश की कई संस्थाएँ — सेना, खुफिया तंत्र और बैंकिंग व्यवस्था — किस हालत में पहुँचीं, यह इतिहास का हिस्सा है।
आज वही खेल फिर से रचा जा रहा है।
कुछ व्हाट्सएपिया ज्ञान से विद्वान बने लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि मोदी को हटाकर Yogiji को लाया जाएगा।
लेकिन हकीकत यह है कि ये वही पेड यूट्यूबर हैं जिनका दाना-पानी बंद हो चुका है।
आज वे पप्पू अक्ल की गोद में बैठे हैं, और 2027 आते-आते यही लोग योगी को भी निशाना बनाएँगे — बहाना होगा कि “योगी ब्राह्मण विरोधी हैं।”
सवर्ण एकता के नाम पर कुछ ठेकेदार लोग पहले ही देश तोड़ने का पूरा खाका बना चुके हैं।
ऊपर से भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ अभियान दिखेगा, लेकिन असली निशाना योगी मोदी को कमजोर करना होगा।
सच्चाई यह है कि अगर इन लोगों में सचमुच इतनी बुद्धि होती, तो हिंदू समाज हजार साल की गुलामी क्यों झेलता?
फिर #RamJanmabhoomi, #GyanvapiMosque और #KrishnaJanmabhoomi जैसी जगहों पर इतिहास का वह अध्याय क्यों बनता?
मेरा दृष्टिकोण स्पष्ट है — यदि मोदी के नेतृत्व में इस देश में हिंदू समाज धीरे-धीरे ही सही, लेकिन संगठित और आत्मरक्षी बनता दिखे, यदि इस्लामी वर्चस्ववाद के सामने झुकने की बजाय प्रतिरोध की मानसिकता पैदा हो — तो यूजीसी जैसी काल्पनिक आशंकाएँ मेरे लिए बहुत छोटी बात हैं।
ज़रूरत पड़ी तो मैं व्यक्तिगत कष्ट भी सह लूँगा — लेकिन हिंदू समाज की दीर्घकालिक शक्ति को कमजोर करने वाली राजनीति का समर्थन कभी नहीं करूँगा।
और अंत में उन कुंठित लोगों से बस इतना कहना है — अगर मेरे विचार से असहमति है तो तर्क से जवाब दो, या नज़रअंदाज़ करो।
लेकिन यह कौन सा तरीका है कि व्यक्तिगत कीचड़ उछालो, गालियाँ दो और फिर भी मित्र सूची में रहकर चुगलियों की राजनीति करो?
अगर बहस करनी है — तो रीढ़ के साथ करो।
#UGC के नाम पर कुछ वामपंथी और जातिवादी गिरोह जिस तरह हिन्दू समाज में ज़हर घोलने, देश को बाँटने और हिन्दू नेतृत्व को गाली देने का अभियान चला रहे हैं, उसका करारा जवाब आदरणीय साध्वी ऋतंभरा जी ने दिया है।🔥
शताब्दी आनंद महोत्सव के मंच से साध्वी ऋतंभरा जी ने साफ शब्दों में उन लोगों को आईना दिखाया जो सनातन के मंचों को भी अपनी सस्ती राजनीति और नेतागिरी की सीढ़ी बनाना चाहते हैं।
प्रश्न : क्या UGC गाइडलाइन कोई बिल है?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : क्या यह कोई क़ानून है?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : यह पहली बार कब लागू किया गया?
उत्तर : सन् 2012 में।
प्रश्न : क्या इसमें इससे पहले कोई बदलाव हुआ?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : क्या यह बदलाव सरकार की सक्रियता से हुआ?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : तो अचानक बदलाव क्यों हुआ?
उत्तर : सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार।
प्रश्न : क्या इस बदलाव के लिए कोर्ट स्वयं सक्रिय हुआ?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : कौन सक्रिय हुआ?
उत्तर : कांग्रेस के वकील।
प्रश्न : किसने बदलाव का आदेश दिया?
उत्तर : सुप्रीम कोर्ट ने।
प्रश्न : क्या बदलाव संसद ने किया?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : तो बदलाव किसने किया?
उत्तर : सर्वदलीय समिति ने।
प्रश्न : बदलाव का विरोध होने पर किसने स्टे दिया?
उत्तर : सुप्रीम कोर्ट ने।
प्रश्न : क्या केंद्र सरकार ने स्टे का विरोध किया?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न : क्या केंद्र सरकार अभी इसे वापस ले सकती है?
उत्तर : नहीं, क्योंकि 19 मार्च को सुनवाई है।
प्रश्न : सरकार का स्टैंड क्या रहेगा?
उत्तर : वह इस कानून के वापस लेने का विरोध नहीं करेगी।
प्रश्न : तो इस कानून के बने रहने के पक्ष में कौन बोलेगा?
उत्तर : कांग्रेसी वकील।
प्रश्न : UGC रेगुलेशन के विरोधियों के अनुसार यह क्या है?
उत्तर : उनके अनुसार यह बिल अथवा एक्ट है, जो असत्य है।
प्रश्न : क्या इसे केंद्र सरकार ने अपने से लाया?
उत्तर : नहीं, सुप्रीम कोर्ट के कहने पर यह हुआ।
प्रश्न : UGC रेगुलेशन विरोधी किसे अपने खून का प्यासा बता रहे हैं?
उत्तर : भाजपा एवं नरेंद्र मोदी को।
प्रश्न : उनकी फिलहाल क्या मांग है?
उत्तर : UGC रेगुलेशन रोल बैक।
प्रश्न : क्या यह सरकार कर सकती है?
उत्तर : नहीं, यह कोर्ट कर सकता है।
प्रश्न : विरोध करने वाले क्यों मोदी का विरोध कर रहे हैं?
उत्तर : मूर्खता और धूर्तता में।
प्रश्न : धूर्त कौन हैं?
उत्तर : जो UGC के बहाने राजनीति को 1990 से पहले ले जाने का सपना देख रहे हैं।
प्रश्न : क्या यह स्वप्न पूरा होगा?
उत्तर : बिल्कुल नहीं।
प्रश्न : यह स्वप्न क्यों पूर्ण नहीं हो सकता?
उत्तर : क्योंकि सर्व समाज में राजनीतिक चेतना आ चुकी है।
प्रश्न : भाजपा विरोध से क्या सवर्णों के अच्छे दिन आ जाएंगे?
उत्तर : नहीं आएंगे।
प्रश्न : क्या भाजपा को हराकर सवर्ण भाजपा को सबक सिखा देंगे?
उत्तर : नहीं, स्वयं को सिखाएंगे।
प्रश्न : आखिर भाजपा को वह सबक क्यों नहीं सिखा पाएंगे?
उत्तर : क्योंकि भाजपा कोई व्यक्ति अथवा कंपनी नहीं है, वह समान विचार रखने वाले लोगों का राजनीतिक उपकरण है। सबक मशीन नहीं सीखती, मालिक सीखता है।
प्रश्न : तो भाजपा का मालिक कौन है?
उत्तर : कोई नहीं।
प्रश्न : क्या अमित शाह और मोदी भी नहीं?
उत्तर : नहीं, बिल्कुल नहीं।
प्रश्न : भाजपा का मालिक कौन है?
उत्तर : जो लोग इसे अपनी विचारधारा का राजनीतिक उपकरण मानते हैं।
प्रश्न : ऐसा क्यों कि मोदी, शाह को भाजपा का मालिक न माना जाए?
उत्तर : इस हिसाब से अटल, आडवाणी, जोशी जी का परिवार आज भी इसे संभाल रहा होता। यह एक रास्ता है, जिस पर कुछ लोग कुछ दिन चलते हैं, फिर कोई नया आ जाता है।
प्रश्न : क्या इसका विकल्प तैयार किया जा सकता है?
उत्तर : किया जा सकता है, दो–तीन पीढ़ियों में बन सकता है।
प्रश्न : क्या उससे कोई क्रांति हो जाएगी?
उत्तर : नहीं, कोई क्रांति नहीं होगी।
प्रश्न : आखिर क्यों?
उत्तर : क्योंकि उस नए दल में आप सवर्ण समाज को संगठन और पार्टी के शीर्ष पर ले जाकर बैठाना चाहेंगे, जबकि वे पहले से संघ और भाजपा में बहुमत में बैठे हैं।
प्रश्न : तो क्या वह 1990 से पहले वाला दौर नहीं लाएंगे?
उत्तर : नहीं, क्योंकि जैसे ही कोई व्यक्ति कुछ समय राजनीतिक और सामाजिक अनुभव प्राप्त कर लेता है, उसे समाज की वास्तविक स्थिति समझ में आ जाती है।
प्रश्न : उसके बाद क्या होगा?
उत्तर : वह वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा वर्तमान में भाजपा कर रही है।
प्रश्न : क्या उसके पास व्यवहार का कोई और विकल्प है?
उत्तर : बिल्कुल है।
प्रश्न : कौन सा?
उत्तर : सपा, राजद, कांग्रेस जैसा।
कितना अजीब दौर है…
अगर कोई हिन्दू समाज को जातियों में बांटकर आत्मघात करने को रोक रहा है, अगर कोई कह दे कि भाजपा या मोदी से नाराज़गी हो सकती है, पर अपने ही राजनीतिक आधार को जला देना समाधान नहीं है,
अगर कोई कह दे कि हिन्दू पहले रहो, फिर कुछ और —
तो वो चाटुकार, भाजपिल्ला, अंधभक्त, नमोला हो जाता है ?
ज़रा ठंडे दिमाग से सोचिए।
आज जो तथाकथित जातिवादी ठेकेदार आपको भड़का रहे हैं —
जो हर मुद्दे को ब्राह्मण बनाम ठाकुर बनाम ओबीसी, सवर्ण बनाम दलित में बदल रहे हैं —
जो राष्ट्रवाद के सबसे मजबूत स्तंभ हिन्दू को जातियों में तोड़ रहे हैं, देश को पुनः मुस्लिमलीगी माओवादी कॉंग्रेस के हिन्दू हंता खूनी हाथों में देने, आपको आत्मघात के लिए उकसा रहे हैं वो टूलकिटीए आपके/हिन्दुओं के शुभचिंतक हैं?
मतलब जो एकजुट रहने की बात करे वो ग़लत, और जो आपको जाति–जाति में काटकर राजनीतिक शतरंज की गोटी बना दे वो सही?
UGC जैसे मुद्दे पर असहमति हो सकती है। सवाल उठाइए। बहस कीजिए।
लेकिन क्या हर असहमति का अंत यही होगा कि भाजपा को हराओ, मोदी को गिराओ?
अलग देश बनाओ? अलग राज्य बनाओ?
याद रखिए —
जब हिन्दू जातियों में टूटता है, तो सत्ता किसी और के हाथ में जाती है।जब हिन्दू भावनाओं में बहता है, तो रणनीति कोई और लिखता है।और जब हिन्दू आत्मघात करता है, तो इतिहास फिर वही दोहराता है।
जातिवाद सच में मीठा ज़हर है।
पहले सम्मान का भ्रम देता है, फिर संख्या की राजनीति में आपको अकेला छोड़ देता है।
मैं साफ कहता हूँ — मैं एक राष्ट्रवादी हूँ।
मैं एक हिन्दू हूँ। आप भी बनिए I
और मेरा सीधा सा आग्रह है —
असहमति रखिए, सवाल पूछिए, सुधार की मांग कीजिए…लेकिन अपने ही घर में आग मत लगाइए।
समय रहते समझना ही बुद्धिमानी है।
PM @narendramodi ji calls out the Congress mindset that repeatedly disrespects the Sikh community—insulting a Sikh Minister is not just an insult to an individual, but to the sacrifices and dignity of Sikhs. Such politics stands exposed. The Congress party has never stood firmly with its workers, while the BJP stands like a wall beside every karyakarta—this is the fundamental difference between the two parties.