Amit Thackeray's father said he'll go to Ayodhya soon.
-> Brij Bhushan said: "NO MOTHER’S SON will allow Raj into Ayodhya unless he APOLOGISES for HATE against North Indians"
Next? Raj cancelled trip. Hasn't gone TILL DATE🤣
Yesterday Amit Thackeray had a problem that why PM’s picture is next to Chatrapati Shivaji Maharaj picture..
Find Chatrapati Shivaji Maharaj in below picture..
Does Raj Thackeray is greater than Maharaj??
And what Amit Thackeray’s achievement, why his picture is next to Chatrapati Shivaji Maharaj ??
PET 2026 का फॉर्म भरने के लिए OTP तक नहीं आ रहा है।
पिछले एक हफ्ते से हजारों अभ्यर्थी परेशान हैं, लेकिन आयोग की तरफ से कोई ठोस समाधान नहीं दिख रहा। 1 सितंबर आखिरी तारीख है और पोर्टल OTP भेजने जैसी बुनियादी सुविधा भी ठीक से नहीं दे पा रहा।
यह कैसी व्यवस्था है?
डिजिटल इंडिया का दावा करने वाले सिस्टम में एक फॉर्म भरने के लिए भी अभ्यर्थियों को दिन-रात परेशान होना पड़ रहा है।
@UpssscOfficial1 @UPGovt @myogiadityanath
या तो OTP और पोर्टल की समस्या तत्काल ठीक की जाए, या PET 2026 की आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए।
अभ्यर्थियों की परेशानी को नजरअंदाज करके चुप बैठना समाधान नहीं है।
#UPSSSC_PET_OTP_PROBLEM #UPSSSC
महाराष्ट्र उत्तर भारतीयांना पोसतो,
हा सर्वात हास्यास्पद बालिश युक्तिवाद आहे.
उत्तर भारतीय लोक मुंबई येतात,कष्ट करतात,पैसे कमावतात,त्या पैशाने खातात.यात महाराष्ट्राने पोसण्याचा संबंध येतोच कोठे?
हाच निकष लावला तर अमेरिकेत राहणाऱ्या भारतीयांना अमेरिका पोसते असे म्हणावे लागेल.
🚨 Bihar rescued 106 Maharashtra pilgrims stranded in Nepal floods.
On CM Samrat Chaudhary’s order, Sitamarhi officials coordinated with Nepal to evacuate them.
After food and health checks, they were sent to Nagpur on Saturday by train (2 AC coaches).
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल