अगर हम इस समय भी एक-दूसरे पर शक करते रहे, तो आतंकवाद जीत जाएगा। लेकिन अगर हम हिंदू-मुसलमान साथ खड़े हो जाएँ दर्द में भी, ग़ुस्से में भी तो कोई भी ताकत हमारी एकता को नहीं तोड़ सकती।
मैं देख रहा हूँ कैसे इस हमले के बाद हिंदू-मुस्लिम के बीच का माहौल फिर से ज़हर से भरने लगा है। सोशल मीडिया से लेकर चौराहों तक, हर जगह एक ही बात दोहराई जा रही है “सिर्फ हिंदू मारे गए।” हाँ, ये सच है। आतंकियों ने नाम पूछा, धर्म देखा, और सिर्फ हिंदू यात्रियों को निशाना बनाया।
ये एक सोची-समझी नफ़रत थी। लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि हर मुसलमान उस गोली का हिस्सा था? क्या वो माँ जो अपने मुस्लिम बेटे को डरा हुआ देख रही है, कम भारतीय है? क्या वो बुज़ुर्ग जो मस्जिद में बैठकर इस हिंसा के लिए आंसू बहा रहा है, उसका कोई मतलब नहीं?
हमें समझना होगा आतंकवादियों की गोलियों ने सिर्फ हिंदू को नहीं मारा, भारत की आत्मा पर वार किया और वो आत्मा, सिर्फ एक धर्म की नहीं सबकी है। जो मुसलमान इस हमले से खुद को कटे हुए, आरोपों में घिरा हुआ महसूस कर रहा है वो भी इस देश का उतना ही बेटा है जितना वो यात्री जो शहीद हुए
Idk if what’s wrong with this universe but in recent days I can find many corpses out there on quora having same problem i am facing today, 8 years ago they faced the same 🫂
@ShashiTharoor Wow, like India does not have a fixed parliamentary calendar, session has a specific recess so that Parliamentary Committees can discuss the budgetary proposals but chillane se aur tadne aur uljul harkaton se time mile tab na kare kaam ki bat, tab tak ko sa jeb se ja raha paisa
@PVVNLHQ please Malik ab yeh mera last tweet ho sakta hai kyuki battery 2 percent hai aur bijli pichle 5ghante se nahi hai: please malik please bijli dedo 😭😭😭